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Hathras News: हरियाणा-पंजाब जा रहा हाथरस से धान, कम दाम से मुश्किल में किसान
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इस बार धन की की अच्छी पैदावार है, लेकिन सरकार और निर्यातकों के बीच दाम को लेकर बने टकराव से बाजार में भाव गिर गए हैं। निर्यातकों ने खरीद बंद कर दी और बाजार में पिछले साल के मुकाबले बासमती धान के दाम 500 रुपये क्विंटल कम चल रहे हैं। दाम कम है तो पंजाब और हरियाणा के चावल मिल मालिक हाथरस से धान खरीदकर स्टॉक कर रहे हैं। अब तक करीब तीन लाख क्विंटल बासमती धान हाथरस से दोनों राज्यों में भेजा जा चुका है।
जिले के किसान खरीफ के सीजन में प्रमुख रूप से धान की पैदावार लेते हैं। इस बार करीब 22700 हेक्टेयर रकबे में धान की फसल की रोपाई की गई थी। इसमें करीब 450 हेक्टेयर में मोटे धान की फसल थी। इस बार पैदावार अच्छी है और जिले में करीब 11 लाख क्विंटल धान की पैदावार होने की उम्मीद जताई जा रही है। यहां के किसान बासमती धान की खेती अधिक करते हैं। पिछले साल बासमती धान का दाम 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा था। इस बार 3300-3400रुपये क्विंटल चल रहा है।
दाम गिरने का एक बड़ा कारण निर्यातकों और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध बताया जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस बार न्यूनतम निर्यात दर 1200 डॉलर प्रति क्विंटल तय की है, निर्यातक 800-900 रुपये प्रति क्विंटल की दर चाहते हैं। इसके विरोध में उन्होंने खरीद बंद की हुई है।सरकार ने वार्ता के लिए 26 अक्तूबर तक का समय दिया है। कुछ मिल मालिकों को उम्मीद है कि इस समस्या का कुछ न कुछ समाधान मिल निकल जाएगा और बाद में दाम बढ़ जाएंगे। इसी के चलते वह स्टॉक कर रहे हैं।
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जिले में होता है दो तरह का धान
जिले में 1509 यानी बासमती और मोटे धान की खेती होती है। मंडी में बासमती का भाव 3300 से 3400 रुपये के बीच चल रहा है। मोटे धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2183 घोषित किया गया है।
इस समय धान का निर्यात बंद है। सरकार ने मिलर्स एसोसिएशन को वार्ता के लिए 26 अक्तूबर का समय दिया है। इस समय मंडी में स्थानीय मिलर्स के लिए ही खरीद हो रही है। धान हरियाणा और पंजाब के मिलों में भेजा जा रहा है। लेकिन वह लोग भी निर्यात नहीं कर रहे हैं।
अमन बंसल, आढ़ती।
इस साल धान की कीमत पिछले साल की तुलना में कम हैं। शनिवार को 3300 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान बिका, पिछले साल यह भाव 4000 रुपये क्विंटल तक गया था।
- लालाराम, किसान, रूहेरी।
व्यापारी बता रहे हैं कि धान का निर्यात नहीं हो रहा है। इससे धान कम भाव पर बिक रहा है। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- छोटेलाल, किसान, अहबरनपुर।
हाथरस मंडी से अधिकांश धान हरियाणा और पंजाब के चावल मिलों में भेजा जाता है। अब तक करीब तीन लाख क्विंटल धान यहां से जा चुका है।
- गौरव सिंह, मंडी सचिव।
20700 हेक्टेयर भूमि में इस वर्ष हुई है धान की फसल
450 हेक्टेयर भूमि में है मोटा धान, शेष में बासमती धान
03 लाख क्विंटल धान अब तक पंजाब और हरियाणा गया
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जिले के किसान खरीफ के सीजन में प्रमुख रूप से धान की पैदावार लेते हैं। इस बार करीब 22700 हेक्टेयर रकबे में धान की फसल की रोपाई की गई थी। इसमें करीब 450 हेक्टेयर में मोटे धान की फसल थी। इस बार पैदावार अच्छी है और जिले में करीब 11 लाख क्विंटल धान की पैदावार होने की उम्मीद जताई जा रही है। यहां के किसान बासमती धान की खेती अधिक करते हैं। पिछले साल बासमती धान का दाम 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा था। इस बार 3300-3400रुपये क्विंटल चल रहा है।
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दाम गिरने का एक बड़ा कारण निर्यातकों और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध बताया जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस बार न्यूनतम निर्यात दर 1200 डॉलर प्रति क्विंटल तय की है, निर्यातक 800-900 रुपये प्रति क्विंटल की दर चाहते हैं। इसके विरोध में उन्होंने खरीद बंद की हुई है।सरकार ने वार्ता के लिए 26 अक्तूबर तक का समय दिया है। कुछ मिल मालिकों को उम्मीद है कि इस समस्या का कुछ न कुछ समाधान मिल निकल जाएगा और बाद में दाम बढ़ जाएंगे। इसी के चलते वह स्टॉक कर रहे हैं।
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जिले में होता है दो तरह का धान
जिले में 1509 यानी बासमती और मोटे धान की खेती होती है। मंडी में बासमती का भाव 3300 से 3400 रुपये के बीच चल रहा है। मोटे धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2183 घोषित किया गया है।
इस समय धान का निर्यात बंद है। सरकार ने मिलर्स एसोसिएशन को वार्ता के लिए 26 अक्तूबर का समय दिया है। इस समय मंडी में स्थानीय मिलर्स के लिए ही खरीद हो रही है। धान हरियाणा और पंजाब के मिलों में भेजा जा रहा है। लेकिन वह लोग भी निर्यात नहीं कर रहे हैं।
अमन बंसल, आढ़ती।
इस साल धान की कीमत पिछले साल की तुलना में कम हैं। शनिवार को 3300 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान बिका, पिछले साल यह भाव 4000 रुपये क्विंटल तक गया था।
- लालाराम, किसान, रूहेरी।
व्यापारी बता रहे हैं कि धान का निर्यात नहीं हो रहा है। इससे धान कम भाव पर बिक रहा है। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- छोटेलाल, किसान, अहबरनपुर।
हाथरस मंडी से अधिकांश धान हरियाणा और पंजाब के चावल मिलों में भेजा जाता है। अब तक करीब तीन लाख क्विंटल धान यहां से जा चुका है।
- गौरव सिंह, मंडी सचिव।
20700 हेक्टेयर भूमि में इस वर्ष हुई है धान की फसल
450 हेक्टेयर भूमि में है मोटा धान, शेष में बासमती धान
03 लाख क्विंटल धान अब तक पंजाब और हरियाणा गया