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शौचालय नहीं बनवाने वाली पंचायतें निशाने पर
अमर उजाला ब्यूरो/ हाथरस।
Updated Mon, 19 Jun 2017 10:59 PM IST
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शौचालयों के निर्माण में मनमानी करने वाली ग्राम पंचायतों के खिलाफ जिला प्रशासन के तेवर सख्त होते जा रहे हैं। बार-बार चेतावनी के बावजूद शौचालयों का निर्माण नहीं कराने वाली ग्राम पंचायतों के खिलाफ कार्रवाई तेज होती जा रही है। अब तक सहपऊ ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधान और कार्रवाई के शिकार हो चुके हैं। तीनों ही मामलों में पूर्व प्रधान और पंचायत सेक्रेटरियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, जिससे इन ग्राम पंचायतों में खलबली मच गई है। कई और ग्राम पंचायतें डीएम के निशाने पर हैं।
सूत्र बताते हैं कि डीएम उन सभी ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधान और पंचायत सचिवों को फोन पर व्यक्तिगत रूप से चेतावनी दे रहे हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में शौचालयों का निर्माण नहीं कराया। इनसे कहा जा रहा है कि वह जल्द से जल्द इन शौचालयों का निर्माण पूरा करा दें, अन्यथा उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी। इन ग्राम पंचायतों के मौजूदा प्रधान और सचिवों को भी ताकीद की जा रही है कि वह सुनिश्चित कर लें कि अब तक जो बजट शौचालयों के लिए दिया गया है, उसका सौ फीसदी इस्तेमाल हो जाए। वह सभी ग्राम पंचायतों में शौचालयों का सत्यापन कराएंगे। जहां भी शौचालय बने हुए नहीं मिलेंगे या मानक के अनुरूप नहीं होंगे, वहां के जिम्मेदार प्रधान और सचिव के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शौचालयों पर डीएम की सख्ती से ग्राम पंचायतें ही नहीं, बल्कि पंचायतराज विभाग भी सकते में है। सूत्र बताते हैं कि डीएम ने उन सभी ग्राम पंचायतों की सूची तैयार कर ली है, जहां पूर्व प्रधान और सचिव के कार्यकाल में शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया। इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और रिकवरी जारी करने की तैयारी की जा रही है। एक-एक करके इस कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि कार्रवाई की भनक लगने के बाद इन पूर्व प्रधान और सचिवों ने अपने कार्यकाल के अवशेष शौचालयों का निर्माण भी शुरू करा दिया है, जबकि जो शौचालयों का पैसा हजम कर चुके हैं, वह कार्रवाई से बचने का रास्ता तलाश रहे हैं।
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तीन पूर्व प्रधान-सचिवों पर हो चुकी कार्रवाई
गौरतलब है कि डीएम ने पिछले एक महीने के भीतर सहपऊ ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधान और पूर्व सचिवों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। एक पंचायत सेक्रेटरी तो निलंबित होने के बाद जेल तक जा चुके हैं। इन पर दो ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण में घोटाले का आरोप है। जिन ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधान और सचिवों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनमें धाधऊ, बहादुरपुर देवकरण और मकनपुर शामिल हैं। इन तीनों पंचायतों के पूर्व प्रधान और पंचायत सचिवों पर शौचालय निर्माण की धनराशि हजम करने के आरोप हैं।
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सूत्र बताते हैं कि डीएम उन सभी ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधान और पंचायत सचिवों को फोन पर व्यक्तिगत रूप से चेतावनी दे रहे हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में शौचालयों का निर्माण नहीं कराया। इनसे कहा जा रहा है कि वह जल्द से जल्द इन शौचालयों का निर्माण पूरा करा दें, अन्यथा उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी। इन ग्राम पंचायतों के मौजूदा प्रधान और सचिवों को भी ताकीद की जा रही है कि वह सुनिश्चित कर लें कि अब तक जो बजट शौचालयों के लिए दिया गया है, उसका सौ फीसदी इस्तेमाल हो जाए। वह सभी ग्राम पंचायतों में शौचालयों का सत्यापन कराएंगे। जहां भी शौचालय बने हुए नहीं मिलेंगे या मानक के अनुरूप नहीं होंगे, वहां के जिम्मेदार प्रधान और सचिव के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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शौचालयों पर डीएम की सख्ती से ग्राम पंचायतें ही नहीं, बल्कि पंचायतराज विभाग भी सकते में है। सूत्र बताते हैं कि डीएम ने उन सभी ग्राम पंचायतों की सूची तैयार कर ली है, जहां पूर्व प्रधान और सचिव के कार्यकाल में शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया। इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और रिकवरी जारी करने की तैयारी की जा रही है। एक-एक करके इस कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि कार्रवाई की भनक लगने के बाद इन पूर्व प्रधान और सचिवों ने अपने कार्यकाल के अवशेष शौचालयों का निर्माण भी शुरू करा दिया है, जबकि जो शौचालयों का पैसा हजम कर चुके हैं, वह कार्रवाई से बचने का रास्ता तलाश रहे हैं।
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तीन पूर्व प्रधान-सचिवों पर हो चुकी कार्रवाई
गौरतलब है कि डीएम ने पिछले एक महीने के भीतर सहपऊ ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधान और पूर्व सचिवों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। एक पंचायत सेक्रेटरी तो निलंबित होने के बाद जेल तक जा चुके हैं। इन पर दो ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण में घोटाले का आरोप है। जिन ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधान और सचिवों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनमें धाधऊ, बहादुरपुर देवकरण और मकनपुर शामिल हैं। इन तीनों पंचायतों के पूर्व प्रधान और पंचायत सचिवों पर शौचालय निर्माण की धनराशि हजम करने के आरोप हैं।