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रोके जाने पर बिफरीं साध्वी प्राची, जीटी रोड पर दिया धरना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)।
Updated Sun, 28 Jan 2018 12:07 AM IST
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कासगंज जाने से पुलिस द्वारा रोके जाने पर सिकंदराराऊ मेंे धरने पर बैठी साध्वी प्राची। अमर उजाला
- फोटो : Amar Ujala
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कासगंज में हुई सांप्रदायिक हिंसा में मृत युवक के परिजनों से मिलने जा रहीं साध्वी प्राची को शनिवार को दोपहर करीब एक बजे पंत चौराहे पर कोतवाली पुलिस ने रोक लिया, जिससे साध्वी बुरी तरह बिफर उठीं। उन्होंने पुलिस कर्मियों को जमकर खरी-खोटी सुनाईं।
पुलिस से नोक-झोंक के बाद साध्वी सर्मथकों के साथ सड़क पर ही धरना देकर बैठ गईं। करीब एक घंटे तक साध्वी अपने समर्थकों के साथ जीटी रोड पर जमी रहीं, जिससे राजमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर साध्वी उठकर गेस्ट हाउस गईं और वहां से करीब ढाई बजे हरिद्वार लौट गईं।
26 जनवरी को तिरंगा यात्रा के दौरान हुए बवाल में घायल युवक की मौत की खबर पर हरिद्वार से साध्वी प्राची अपने समर्थकों के साथ कासगंज जा रही थीं। उनके साथ अलीगढ़ और हाथरस के हिंदूवादी कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल थे। कासगंज में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शासन ने वहां ऐसे किसी भी नेता की आवाजाही पर रोक लगा दी है, जिससे वहां शांति भंग न होने का अंदेशा हो। यही वजह है कि आला अधिकारियों के निर्देश पर पंत चौराहे पर उनका काफिला कोतवाली पुलिस ने रोक लिया और गाड़ी से चाभी निकाल ली।
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चाभी निकालने पर साध्वी बुरी तरह भड़क गईं। उनकी पुलिस से तीखी नोक-झोंक होने लगी। सीओ आशीष प्रताप सिंह और तहसीलदार योगेंद्र सिंह मौके पर पहुंच गए। साध्वी प्राची से गेस्ट हाउस चलने का अनुरोध करने लगे। साध्वी के साथ आए समर्थकों ने वहां पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। साध्वी ने कोतवाल मनोज शर्मा को देख लेने तक की धमकी दे डाली। वे इस बात पर खफा थीं कि रोक लेते, लेकिन गाड़ी की चाभी क्यों निकाली।
काफी देर तक हंगामे के बाद साध्वी ने मुख्यमंत्री कार्यालय को फोन किया। वहां से निर्देश आया कि मुख्यमंत्री व्यस्त हैं, वे उनसे बाद में बात करेंगे। वह हंगामा बंद कर दें। इधर, सूचना के बाद जिले के कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। हाथरस से एएसपी डॉ. अरविंद कुमार भी पहुंच गए। एक घंटे के हंगामे के पश्चात साध्वी गेस्ट हाउस गईं और वहां से हरिद्वार लौट गईं।
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पुलिस से नोक-झोंक के बाद साध्वी सर्मथकों के साथ सड़क पर ही धरना देकर बैठ गईं। करीब एक घंटे तक साध्वी अपने समर्थकों के साथ जीटी रोड पर जमी रहीं, जिससे राजमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर साध्वी उठकर गेस्ट हाउस गईं और वहां से करीब ढाई बजे हरिद्वार लौट गईं।
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26 जनवरी को तिरंगा यात्रा के दौरान हुए बवाल में घायल युवक की मौत की खबर पर हरिद्वार से साध्वी प्राची अपने समर्थकों के साथ कासगंज जा रही थीं। उनके साथ अलीगढ़ और हाथरस के हिंदूवादी कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल थे। कासगंज में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शासन ने वहां ऐसे किसी भी नेता की आवाजाही पर रोक लगा दी है, जिससे वहां शांति भंग न होने का अंदेशा हो। यही वजह है कि आला अधिकारियों के निर्देश पर पंत चौराहे पर उनका काफिला कोतवाली पुलिस ने रोक लिया और गाड़ी से चाभी निकाल ली।
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चाभी निकालने पर साध्वी बुरी तरह भड़क गईं। उनकी पुलिस से तीखी नोक-झोंक होने लगी। सीओ आशीष प्रताप सिंह और तहसीलदार योगेंद्र सिंह मौके पर पहुंच गए। साध्वी प्राची से गेस्ट हाउस चलने का अनुरोध करने लगे। साध्वी के साथ आए समर्थकों ने वहां पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। साध्वी ने कोतवाल मनोज शर्मा को देख लेने तक की धमकी दे डाली। वे इस बात पर खफा थीं कि रोक लेते, लेकिन गाड़ी की चाभी क्यों निकाली।
काफी देर तक हंगामे के बाद साध्वी ने मुख्यमंत्री कार्यालय को फोन किया। वहां से निर्देश आया कि मुख्यमंत्री व्यस्त हैं, वे उनसे बाद में बात करेंगे। वह हंगामा बंद कर दें। इधर, सूचना के बाद जिले के कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। हाथरस से एएसपी डॉ. अरविंद कुमार भी पहुंच गए। एक घंटे के हंगामे के पश्चात साध्वी गेस्ट हाउस गईं और वहां से हरिद्वार लौट गईं।
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