{"_id":"588250d14f1c1bc346eff245","slug":"now-rld-jeopardize-opponents-equation","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब रालोद बिगाड़ेगा विरोधियों के समीकरण ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब रालोद बिगाड़ेगा विरोधियों के समीकरण
अमर उजाला, हाथरस
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:41 PM IST
विज्ञापन
राजनीति
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सपा और कांग्रेस से गठबंधन नहीं हो पाने के कारण जिले में रालोद की राह मुश्किल होगी या आसान यह तो वक्त ही तय करेगा, लेकिन रालोद के लिए अपने दम पर जातीय समीकरणों का संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। हालांकि जिले की कम से कम दो सीटों पर रालोद विरोधी दलों के सियासी समीकरण गड़बड़ाने की कुव्वत रखता है।
खासकर सादाबाद और हाथरस में रालोद के खिलाफ विरोधी दलों को नए सिरे से रणनीति बनाने को मजबूर होना पड़ सकता है। यही नहीं रालोद के परंपरागत वोट बैंक के लिए भी रालोद और भाजपा के बीच रस्साकशी होनी तय है।
पिछले चुनाव में अपने सबसे मजबूत गढ़ सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में शिकस्त खा चुके रालोद के लिए इस चुनाव में वहां वापसी करना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा। यहां रालोद का मुकाबला बसपा के दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय और सपा के मौजूदा विधायक देवेंद्र अग्रवाल से होना तय है। जाहिर है कि रालोद के अकेले मैदान में उतरने से सादाबाद का सियासी मुकाबला इस बार सबसे ज्यादा दिलचस्प हो सकता है।
विज्ञापन
रालोद के महागठबंधन में शामिल नहीं होने से एक तरफ सियासी समीकरण गड़बड़ाएंगे। रालोद का गढ़ कही जाने वाली सादाबाद सीट की भूमिका काफी अहम होगी। रालोद के महागठबंधन से अलग चुनाव लड़ने के कारण यहां सपा, भाजपा और बसपा को भी कड़ी चुनौती मिलेगी।
इन दलाें को नए सिरे से रणनीति तय करनी होगी। 2012 के कांग्रेस से गठबंधन होने के बाद भी विधानसभा चुनाव में सादाबाद सीट से रालोद की हार हुई थी। इससे पहले 2007 के चुनावों में रालोद बिना किसी गठबंधन के ही यहां से चुनाव जीत गया था।
जाट बाहुल्य इस इलाके से भाजपा पहले ही जाट प्रत्याशी को खड़ा कर चुकी है, अगर रालोद भी यहां से जाट प्रत्याशी को उतारता है तो चर्चा है कि जाट मतदाताओं के वोट कहीं बंट न जाएं, जिसका फायदा अन्य पार्टियों को मिल जाए। फिलहाल तो जातीय समीकरणों का संतुलन बनाना रालोद के लिए असान नहीं होगा। इसका असर कांग्रेस, बसपा और सपा पर भी पड़ना तय है। इधर, शाम तक रालोद प्रत्याशियाें की घोषणा होने की संभावना जाहिर की जा रही थी।
यह बिल्कुल साफ हो चुका है कि रालोद अकेले ही चुनाव मैदान में उतरेगा। आज रात तक हमारे प्रत्याशी घोषित हो जाएंगे। हम पूरे दम से चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे भी।
- अनिल चौधरी, प्रदेश प्रवक्ता राष्ट्रीय लोकदल
विज्ञापन
खासकर सादाबाद और हाथरस में रालोद के खिलाफ विरोधी दलों को नए सिरे से रणनीति बनाने को मजबूर होना पड़ सकता है। यही नहीं रालोद के परंपरागत वोट बैंक के लिए भी रालोद और भाजपा के बीच रस्साकशी होनी तय है।
विज्ञापन
पिछले चुनाव में अपने सबसे मजबूत गढ़ सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में शिकस्त खा चुके रालोद के लिए इस चुनाव में वहां वापसी करना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा। यहां रालोद का मुकाबला बसपा के दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय और सपा के मौजूदा विधायक देवेंद्र अग्रवाल से होना तय है। जाहिर है कि रालोद के अकेले मैदान में उतरने से सादाबाद का सियासी मुकाबला इस बार सबसे ज्यादा दिलचस्प हो सकता है।
विज्ञापन
रालोद के महागठबंधन में शामिल नहीं होने से एक तरफ सियासी समीकरण गड़बड़ाएंगे। रालोद का गढ़ कही जाने वाली सादाबाद सीट की भूमिका काफी अहम होगी। रालोद के महागठबंधन से अलग चुनाव लड़ने के कारण यहां सपा, भाजपा और बसपा को भी कड़ी चुनौती मिलेगी।
इन दलाें को नए सिरे से रणनीति तय करनी होगी। 2012 के कांग्रेस से गठबंधन होने के बाद भी विधानसभा चुनाव में सादाबाद सीट से रालोद की हार हुई थी। इससे पहले 2007 के चुनावों में रालोद बिना किसी गठबंधन के ही यहां से चुनाव जीत गया था।
जाट बाहुल्य इस इलाके से भाजपा पहले ही जाट प्रत्याशी को खड़ा कर चुकी है, अगर रालोद भी यहां से जाट प्रत्याशी को उतारता है तो चर्चा है कि जाट मतदाताओं के वोट कहीं बंट न जाएं, जिसका फायदा अन्य पार्टियों को मिल जाए। फिलहाल तो जातीय समीकरणों का संतुलन बनाना रालोद के लिए असान नहीं होगा। इसका असर कांग्रेस, बसपा और सपा पर भी पड़ना तय है। इधर, शाम तक रालोद प्रत्याशियाें की घोषणा होने की संभावना जाहिर की जा रही थी।
यह बिल्कुल साफ हो चुका है कि रालोद अकेले ही चुनाव मैदान में उतरेगा। आज रात तक हमारे प्रत्याशी घोषित हो जाएंगे। हम पूरे दम से चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे भी।
- अनिल चौधरी, प्रदेश प्रवक्ता राष्ट्रीय लोकदल