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अब बगावत की राह पर गेंदालाल चौधरी
अमर उजाला, हाथरस
Updated Sat, 21 Jan 2017 11:22 PM IST
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राजनीति
- फोटो : demo
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बसपा छोड़कर भाजपा में पहुंचे विधायक गेंदालाल चौधरी अब भाजपा द्वारा भी टिकिट न दिए जाने से मायूस हैं और भाजपा से भी बगावत का मन बना रहे हैं। उन्होंने शनिवार को हाथरस और सादाबाद दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र प्राप्त किए हैं, जिससे दोनों विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोराें पर हैं।
सूत्र बताते हैं कि विधायक इन-दिनों शहर से बाहर हैं और भविष्य की रणनीति में उलझे हुए हैं। नामांकन के आखिरी दिन वह कोई धमाका करने की तैयारी में हैं। ऐनवक्त पर वह हाथरस या सादाबाद दोनों में से किसी एक विधानसभा क्षेत्र से बतौर प्रत्याशी उतर सकते हैं। वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे या फिर किसी पार्टी से चुनाव मैदान में उतरेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
हालांकि उनके करीबी तो यही कह रहे हैं कि विधायक निर्दलीय ही चुनाव लड़ेंगे। अगर विधायक चुनाव मैदान में उतरते हैं तो निश्चित रूप से बसपा और भाजपा की चुनौती और बढ़ जाएगी। इसी तरह चुनाव से पहले सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र से बसपा की टिकट के लिए दावेदारी कर रहे पूर्व विधायक अमर सिंह ने भी शनिवार को बतौर निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन दाखिल कर सबको चौंका दिया।
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अमर सिंह यादव 1993 में सपा के टिकट पर और 2002 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीत चुके हैं। इस चुनाव में भी उन्होंने बसपा की टिकट के लिए दावा ठोका था, लेकिन बसपा ने बनी सिंह बघेल को प्रत्याशी बनाकर उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। वह ऐनवक्त तक टिकट बदलवाने की कोशिश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली।
हालांकि उन्हें बसपा ने बागी तेवर दिखाने पर पिछले महीने ही निष्कासित कर दिया था। आखिरकार उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक दी। उनका नामांकन भी सपा व बसपा के लिए खतरे की घंटी के रूप में देखा जा रहा है। वहीं 2002 में रालोद के टिकट पर सादाबाद से विधायक रह चुके प्रताप चौधरी भी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
वह पिछले दिनों नामांकन पत्र भी ले चुके हैं। अगर वह मैदान में उतरते हैं तो निश्चित रूप से सादाबाद में जाट प्रत्याशियों के बीच दिलचस्प मुकाबले की तस्वीर बन सकती है। चुनावी समर में उनकी मौजूदगी भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल की भी मुश्किलें बढ़ाएगी।
गेंदालाल चौधरी द्वारा नामांकन पत्र खरीदना कोई गलत नहीं है। अभी तक उनकी तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया है, जिससे यह लगे कि वह बगावत कर रहे हैं। पहले हम पूरी स्थिति की जानकारी करेंगे, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया के बारे में विचार करेंगे।- रामवीर सिंह परमार, जिलाध्यक्ष भाजपा
गेंदालाल चौधरी दो बार लगातार विधायक रहे हैं। उन्होंने जनता से वादा किया था कि इस बार चुनाव जरूर लड़ेंगे। इसीलिए उन्होंने दो नामांकन पत्र प्राप्त किए हैं। 24 जनवरी तक तय कर लिया जाएगा कि कहां से और किस तरह चुनाव लड़ेंगे। - डॉ. चंद्रभान भारत प्रतिनिधि विधायक हाथरस
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सूत्र बताते हैं कि विधायक इन-दिनों शहर से बाहर हैं और भविष्य की रणनीति में उलझे हुए हैं। नामांकन के आखिरी दिन वह कोई धमाका करने की तैयारी में हैं। ऐनवक्त पर वह हाथरस या सादाबाद दोनों में से किसी एक विधानसभा क्षेत्र से बतौर प्रत्याशी उतर सकते हैं। वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे या फिर किसी पार्टी से चुनाव मैदान में उतरेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
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हालांकि उनके करीबी तो यही कह रहे हैं कि विधायक निर्दलीय ही चुनाव लड़ेंगे। अगर विधायक चुनाव मैदान में उतरते हैं तो निश्चित रूप से बसपा और भाजपा की चुनौती और बढ़ जाएगी। इसी तरह चुनाव से पहले सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र से बसपा की टिकट के लिए दावेदारी कर रहे पूर्व विधायक अमर सिंह ने भी शनिवार को बतौर निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन दाखिल कर सबको चौंका दिया।
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अमर सिंह यादव 1993 में सपा के टिकट पर और 2002 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीत चुके हैं। इस चुनाव में भी उन्होंने बसपा की टिकट के लिए दावा ठोका था, लेकिन बसपा ने बनी सिंह बघेल को प्रत्याशी बनाकर उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। वह ऐनवक्त तक टिकट बदलवाने की कोशिश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली।
हालांकि उन्हें बसपा ने बागी तेवर दिखाने पर पिछले महीने ही निष्कासित कर दिया था। आखिरकार उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक दी। उनका नामांकन भी सपा व बसपा के लिए खतरे की घंटी के रूप में देखा जा रहा है। वहीं 2002 में रालोद के टिकट पर सादाबाद से विधायक रह चुके प्रताप चौधरी भी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
वह पिछले दिनों नामांकन पत्र भी ले चुके हैं। अगर वह मैदान में उतरते हैं तो निश्चित रूप से सादाबाद में जाट प्रत्याशियों के बीच दिलचस्प मुकाबले की तस्वीर बन सकती है। चुनावी समर में उनकी मौजूदगी भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल की भी मुश्किलें बढ़ाएगी।
गेंदालाल चौधरी द्वारा नामांकन पत्र खरीदना कोई गलत नहीं है। अभी तक उनकी तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया है, जिससे यह लगे कि वह बगावत कर रहे हैं। पहले हम पूरी स्थिति की जानकारी करेंगे, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया के बारे में विचार करेंगे।- रामवीर सिंह परमार, जिलाध्यक्ष भाजपा
गेंदालाल चौधरी दो बार लगातार विधायक रहे हैं। उन्होंने जनता से वादा किया था कि इस बार चुनाव जरूर लड़ेंगे। इसीलिए उन्होंने दो नामांकन पत्र प्राप्त किए हैं। 24 जनवरी तक तय कर लिया जाएगा कि कहां से और किस तरह चुनाव लड़ेंगे। - डॉ. चंद्रभान भारत प्रतिनिधि विधायक हाथरस