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नोट की चोट से बेहाल हुए कारोबारी

Mon, 14 Nov 2016 11:52 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
अमर उजाला, हाथरस Updated Mon, 14 Nov 2016 11:52 PM IST
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Note the businessman suffering from injury
नोटबंदी के कारण बाजार भी ठप पड़ा हुआ है। सोमवार को हाथरस में कुछ इस तरह दुकानें बंद पड़ी रहीं।  - फोटो : अमर उजाला
500 और 1 हजार के नोट बंद होने से एक तरफ आम लोग तो परेशान है हीं, वहीं बाजार भी बेहाल हो गया है। सहालगों के मौसम में जहां बाजार ग्राहकों की भीड़ से गुलजार रहते थे, वहां आज सन्नाटा पसरा हुआ है। कारोबारियों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं। नोट बंदी के पांच दिनों में ही कारोबार का बेड़ा गर्क हो गया है।
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कारोबारियों को काफी मंदी का सामना करना पड़ रहा है। स्टॉक में पड़े माल को बेचने के लाले पड़ गए हैं। कारोबारी यही सोच-सोचकर परेशान हैं कि यही हाल रहा तो वह कैसे अपनी आजीविका को चला पाएंगे। 
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व्यापारियों को यह आ रही परेशानी
1. काफी ग्राहक बंद हो चुके हजार पांच सौ का नोट लेकर आ रहे हैं।
2. जो भी ग्राहक दो हजार का नोट ला रहे हैं, उसके खुले नहीं हो पा रहे। 
3. सौ रुपये के सामान के लिए भी ग्राहक या तो 500 का नोट दे रहा है या फिर दो हजार का। 
4. नोटों के चक्कर में काफी सामान उधार बेचा जा रहा है।
5.नोटों को बदलने के लिए बैंक पर पूरे दिन लाइन में लगना पड़ रहा है, इससे दुकानों को कई घंटे तक बंद रखना पड़ रहा है। 

 न तो सोना बेच पा रहे हैं और न खरीद पा रहे हैं। लेनदेन भी बंद है। लेकिन कुछ दिन की परेशानी है, बाद में सबकुछ ठीक हो जाएगा। 
- राकेश वर्मा, सराफा कारोबारी। 

नोट बंदी के बाद से बाजार काफी सुस्त चल रहा है। एक  दिन की कमाई में    50 से 60 फीसदी   की गिरावट हो  रही है। 
- दिनेशचंद्र वार्ष्णेय, सराफ

ग्राहक खुले पैसे नहीं ला रहे। ऐसे में दुकानदारी ठप होकर रह गई है। न तो ग्राहक के पास खुले हैं और न दुकानदारों के पास। 
- प्रियरंजन वार्ष्णेय, कपड़ा व्यवसायी 

नोटबंदी से रबी की बुवाई पर असर 
सरकार की  500 और 1000 के नोट बंदी का असर किसानों की रबी की फसल की तैयारी पर भी पड़ रहा है। एक तरफ किसानों के पास अपनी फसल में लागत लगाने के लिए पैसा नहीं हैं तो दूसरी तरफ अब किसानों को गांवों में खेती में काम कराने के लिए मजदूरी देने के लिए नकदी नहीं हैं। 
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इसके बाद अब मजदूरों ने अपना नया धंधा तलाश लिया है। बडे़ धन्ना सेठ अब अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिए इन मजदूरों का खुलकर सहारा ले रहे हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में गांवाें से मजदूर प्रतिदिन ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए करोड़पतियों से 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से बैंकों के सामने 4,000 हजार रुपये बदलने के लिए अपनी आईडी लेकर लाइनों में लगने के लिए आ रहे है।


यह सुबह से शाम तक पांच-पांच सौ एवं एक-एक हजार के नोटों के बदले बैंकों से करेंसी बदल रहे हैं। हो यह रहा है कि इन मजदूरों को प्रतिदिन पांच सौ रुपये की मजदूरी भी मिल रही है।
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