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Hathras News: इंतजार...न मेडिकल कॉलेज बना, ट्रांसपोर्ट नगर का सपना हुआ पूरा
Tue, 30 Dec 2025 01:57 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 30 Dec 2025 01:57 AM IST
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वर्ष 2025 को अलविदा कहने में अब महज दो दिन शेष बचे हैं, लेकिन पूरे साल जिले में विकास की कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का काम पूरा होने का इंतजार खत्म नहीं हो सका। कहीं बजट के अभाव में योजनाएं अधूरी रह गईं तो कहीं अधिकारी पूरे साल बजट और स्वीकृति का इंतजार करते नजर आए।
सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की नियुक्ति हो, मेडिकल कॉलेज का निर्माण, ट्रांसपोर्ट नगर, ऑडिटोरियम, छात्रावास और राज्य कर भवन का निर्माण सब अधर में हैं। कुल मिलाकर वर्ष 2025 जिले के लिए विकास के लिहाज से इंतजार का साल साबित हुआ। लोगों को उम्मीद है कि नए वर्ष में लंबित परियोजनाओं को गति मिलेगी और जिले का विकास वास्तविक रूप से नजर आएगा। डीएम अतुल वत्स ने बताया कि सभी परियोजनाओं की निगरानी की जा रही है। जिन योजनाओं के लिए बजट का अभाव चल रहा है, उनके लिए पत्राचार किया जा रहा है।
50 बेड वाले छात्रावास के लिए बजट का इंतजार
जिले में छात्रावास निर्माण की योजना लंबे समय से प्रस्तावित है, लेकिन पूरे वर्ष इसके लिए बजट की स्वीकृति नहीं मिल सकी। 50 बेड की क्षमता के छात्रावास के निर्माण के लिए करीब 3.20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके चलते जरूरतमंद छात्रों को आवासीय सुविधा नहीं मिल पाई।
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स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिले चिकित्सक
पूरे साल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए चिकित्सकों का इंतजार रहा। सरकारी अस्पताल पूरे साल चिकित्सकों की कमी से जूझते रहे। डॉक्टरों के पद खाली होने से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल सका।
इन प्रोजेक्ट के लिए नहीं मिली भूमि
जिले में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी वर्षभर कागजों में ही घूमती रही। कई बार फाइलें ऊपर-नीचे हुईं, लेकिन जमीन हस्तांतरण का कार्य पूरा नहीं हो सका। इसी तरह राज्यकर विभाग की भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी शासन स्तर पर लंबित बनी रही, जिससे विभाग से जुड़ी योजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं। दोनों के लिए ही भूमि का चयन काफी समय पहले हो चुका है।
ऑडिटोरियम का निर्माण भी अधर में
जिले में एक आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण का सपना भी इस साल साकार नहीं हो सका। ऑडिटोरियम के लिए प्रस्ताव तैयार तो हुआ, लेकिन फाइलें विभिन्न स्तरों पर घूमती रहीं और बजट स्वीकृति नहीं मिल पाई। इससे सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए अब भी निजी गेस्ट हाउस व खुले मैदान के विकल्प विकल्प तलाशने पड़ते हैं।
अधूरा रह गया ट्रांसपोर्ट नगर का इंतजार ट्रांसपोर्ट नगर की मंजूरी इस वर्ष भी नहीं मिल सकी। व्यापारियों और परिवहन से जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि इस साल ट्रांसपोर्ट नगर की दिशा में कोई बड़ा कदम उठेगा, लेकिन पूरा वर्ष बीत जाने के बावजूद योजना आगे नहीं बढ़ पाई। आज भी मुख्य मार्गों के फुटपाथ पर ही हजारों की संख्या में वाहन खड़े हो रहे हैं और जाम का कारण बन रहे हैं।
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सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की नियुक्ति हो, मेडिकल कॉलेज का निर्माण, ट्रांसपोर्ट नगर, ऑडिटोरियम, छात्रावास और राज्य कर भवन का निर्माण सब अधर में हैं। कुल मिलाकर वर्ष 2025 जिले के लिए विकास के लिहाज से इंतजार का साल साबित हुआ। लोगों को उम्मीद है कि नए वर्ष में लंबित परियोजनाओं को गति मिलेगी और जिले का विकास वास्तविक रूप से नजर आएगा। डीएम अतुल वत्स ने बताया कि सभी परियोजनाओं की निगरानी की जा रही है। जिन योजनाओं के लिए बजट का अभाव चल रहा है, उनके लिए पत्राचार किया जा रहा है।
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50 बेड वाले छात्रावास के लिए बजट का इंतजार
जिले में छात्रावास निर्माण की योजना लंबे समय से प्रस्तावित है, लेकिन पूरे वर्ष इसके लिए बजट की स्वीकृति नहीं मिल सकी। 50 बेड की क्षमता के छात्रावास के निर्माण के लिए करीब 3.20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके चलते जरूरतमंद छात्रों को आवासीय सुविधा नहीं मिल पाई।
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स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिले चिकित्सक
पूरे साल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए चिकित्सकों का इंतजार रहा। सरकारी अस्पताल पूरे साल चिकित्सकों की कमी से जूझते रहे। डॉक्टरों के पद खाली होने से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल सका।
इन प्रोजेक्ट के लिए नहीं मिली भूमि
जिले में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी वर्षभर कागजों में ही घूमती रही। कई बार फाइलें ऊपर-नीचे हुईं, लेकिन जमीन हस्तांतरण का कार्य पूरा नहीं हो सका। इसी तरह राज्यकर विभाग की भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी शासन स्तर पर लंबित बनी रही, जिससे विभाग से जुड़ी योजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं। दोनों के लिए ही भूमि का चयन काफी समय पहले हो चुका है।
ऑडिटोरियम का निर्माण भी अधर में
जिले में एक आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण का सपना भी इस साल साकार नहीं हो सका। ऑडिटोरियम के लिए प्रस्ताव तैयार तो हुआ, लेकिन फाइलें विभिन्न स्तरों पर घूमती रहीं और बजट स्वीकृति नहीं मिल पाई। इससे सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए अब भी निजी गेस्ट हाउस व खुले मैदान के विकल्प विकल्प तलाशने पड़ते हैं।
अधूरा रह गया ट्रांसपोर्ट नगर का इंतजार ट्रांसपोर्ट नगर की मंजूरी इस वर्ष भी नहीं मिल सकी। व्यापारियों और परिवहन से जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि इस साल ट्रांसपोर्ट नगर की दिशा में कोई बड़ा कदम उठेगा, लेकिन पूरा वर्ष बीत जाने के बावजूद योजना आगे नहीं बढ़ पाई। आज भी मुख्य मार्गों के फुटपाथ पर ही हजारों की संख्या में वाहन खड़े हो रहे हैं और जाम का कारण बन रहे हैं।