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मेडिकल स्टोर वालों को भी देनी होगी टीबी मरीजों की जानकारी

Mon, 28 May 2018 11:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस। Updated Mon, 28 May 2018 11:34 PM IST
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 Medical stores should also give TB patient information
tb medicine
निजी चिकित्सकों की तरह मेडिकल स्टोर संचालक को भी दवा का पर्चा आते ही इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीपीसी) के तहत टीबी के उन्मूलन की तैयारी में सरकार जुटी है। अब प्राइवेट डॉक्टरों के अलावा उन मेडिकल स्टोरों को भी मरीजों की सूचना सीएमओ कार्यालय को देनी होगी, जहां से मरीज टीबी की दवाएं खरीद रहे हैं।
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 जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनिल सागर वशिष्ठ के मुताबिक इस संबंध में सरकार के नोटिफिकेशन के बारे में जिले के सभी दवा विक्रेताओं को अवगत करा दिया गया है। बीते महीने 25 दवा विक्रेताओं ने उनके यहां से दवा लेने वाले टीबी मरीजों की जानकारी सीएमओ कार्यालय को उपलब्ध कराई थी। सूचना देने वाले दवा विक्रेताओं को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को लेकर अभी कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गईं हैं। 
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रविवार शाम टीबी की रोकथाम को लेकर आईएमए के पदाधिकारियों के साथ आयोजित कार्यक्रम से पहले डीटीओ डॉ. वशिष्ठ ने बताया कि अब कोई मरीज एमबीबीएस या एमडी डॉक्टर की सलाह के बिना सीधे मेडिकल स्टोर से टीबी दवा सहित सभी शेड्यूल-एच (नारकोटिक्स के अंतर्गत 46 शामिल) दवाएं नहीं ले सकेगा। हर मेडिकल स्टोर संचालक को इन दवाओं की बिक्री का हिसाब रखकर सीएमओ कार्यालय को देना होगा। सभी निजी डॉक्टरों से कहा गया है कि वह टीबी की दवा देने के बाद इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें। ऐसा न करने पर डाक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत तीन वर्ष तक की सजा भी हो सकती है।
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संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीपीसी) में परिवर्तन करके टीबी को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिफिएबल डिजीज घोषित कर दिया है। बताया गया कि एक लाख की जनसंख्या पर टीबी के 215 मरीज संभावित होते हैं। इनमें से लगभग 175 मरीज किसी सरकारी अस्पताल से, जबकि शेष निजी डॉक्टरों से दवाई लेते हैं। इससे मरीज वास्तव में दवा खा रहे हैं या नहीं, इसका पता नहीं चल पाता। इसलिए आंकड़े जुटाने में भी यह योजना कारगर होगी। डीटीओ के मुताबिक वर्ष 2025 तक वर्तमान के मुकाबले आधे से भी कम मरीज करने और देशभर से टीबी को वर्ष 2035 तक जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। 
 
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