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Hathras News: मंडी परिसर खाली, फिर भी नहीं मिला किसानों को प्रवेश
Mon, 12 Oct 2026 01:56 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 12 Oct 2026 01:56 AM IST
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मंडी का गेट खुलने के इंतजार में ट्रैक्टर पर सोता किसान। संवाद
- फोटो : Samvad
धान की बंपर आवक के चलते घोषित दो दिन की बंदी के बाद रविवार को मंडी समिति परिसर खाली हो गया, लेकिन रविवार को किसानों को धान बेचने के लिए प्रवेश नहीं मिल सका। शुक्रवार रात से मंडी के गेट पर धान से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहन लेकर खड़े किसान तीन दिन से इंतजार कर रहे हैं।
कुछ किसान लौट गए, जबकि दूरदराज से आए किसान खर्च बढ़ने के कारण गेट पर ही डटे हुए हैं। मंडी में धान की भारी आवक और व्यापारियों के माल की लोडिंग नहीं हो पाने के कारण मंडी प्रशासन ने शुक्रवार को शनिवार और रविवार को बंदी की घोषणा की थी। इस दौरान गेट बंद रखकर व्यापारियों के माल की लोडिंग और निकासी कराई गई।
शुक्रवार रात करीब 11 बजे से धान लेकर पहुंचे किसानों को प्रवेश नहीं दिया गया। रविवार को भी व्यापारियों के धान की निकासी और मंडी की सफाई पर जोर रहा। किसानों का आरोप है कि मंडी खाली होने के बाद भी उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया।
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तीन दिन से गेट ही डाल रखा है डेरा
गांव बहरदोई निवासी किसान हरवीर सिंह ने बताया कि वह शुक्रवार रात 11 बजे ट्रैक्टर से धान लेकर मंडी पहुंचे थे। उस समय दो दिन की बंदी की जानकारी मिली। तीन दिन बीतने के बाद भी वह गेट पर ही खड़े हैं। उनका गांव करीब 25 किलोमीटर दूर है। वापस जाने और दोबारा आने में डीजल का खर्च बढ़ जाएगा। ऐसे में वह दिन-रात गेट पर इंतजार कर रहे हैं और सुबह-शाम ढाबे पर खाना खाकर समय गुजार रहे हैं।
रोजाना एक हजार रुपये मैक्स का भाड़ा
जमालपुर निवासी किसान सुखराम ने बताया कि वह शुक्रवार रात 12 बजे मैक्स गाड़ी में धान लेकर आए थे। गाड़ी एक हजार रुपये प्रतिदिन के भाड़े पर ली है। तीन दिन में तीन हजार रुपये भाड़ा हो चुका है। इसके अलावा खाने-पीने का खर्च अलग से बढ़ रहा है। उनका कहना है कि रविवार को मंडी खाली होने पर प्रवेश मिल जाता, तो आढ़ती के फड़ पर धान उतारकर गाड़ी खाली कर देते और आगे का भाड़ा बच जाता।
आज समय से खुलेगी मंडी
मंडी सचिव अनिल कुमार ने बताया कि रविवार को व्यापारियों के माल की निकासी पर जोर दिया गया। इसके साथ ही मंडी परिसर की सफाई कराई गई है। सोमवार को मंडी निर्धारित समय पर खोली जाएगी।
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कुछ किसान लौट गए, जबकि दूरदराज से आए किसान खर्च बढ़ने के कारण गेट पर ही डटे हुए हैं। मंडी में धान की भारी आवक और व्यापारियों के माल की लोडिंग नहीं हो पाने के कारण मंडी प्रशासन ने शुक्रवार को शनिवार और रविवार को बंदी की घोषणा की थी। इस दौरान गेट बंद रखकर व्यापारियों के माल की लोडिंग और निकासी कराई गई।
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शुक्रवार रात करीब 11 बजे से धान लेकर पहुंचे किसानों को प्रवेश नहीं दिया गया। रविवार को भी व्यापारियों के धान की निकासी और मंडी की सफाई पर जोर रहा। किसानों का आरोप है कि मंडी खाली होने के बाद भी उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया।
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तीन दिन से गेट ही डाल रखा है डेरा
गांव बहरदोई निवासी किसान हरवीर सिंह ने बताया कि वह शुक्रवार रात 11 बजे ट्रैक्टर से धान लेकर मंडी पहुंचे थे। उस समय दो दिन की बंदी की जानकारी मिली। तीन दिन बीतने के बाद भी वह गेट पर ही खड़े हैं। उनका गांव करीब 25 किलोमीटर दूर है। वापस जाने और दोबारा आने में डीजल का खर्च बढ़ जाएगा। ऐसे में वह दिन-रात गेट पर इंतजार कर रहे हैं और सुबह-शाम ढाबे पर खाना खाकर समय गुजार रहे हैं।
रोजाना एक हजार रुपये मैक्स का भाड़ा
जमालपुर निवासी किसान सुखराम ने बताया कि वह शुक्रवार रात 12 बजे मैक्स गाड़ी में धान लेकर आए थे। गाड़ी एक हजार रुपये प्रतिदिन के भाड़े पर ली है। तीन दिन में तीन हजार रुपये भाड़ा हो चुका है। इसके अलावा खाने-पीने का खर्च अलग से बढ़ रहा है। उनका कहना है कि रविवार को मंडी खाली होने पर प्रवेश मिल जाता, तो आढ़ती के फड़ पर धान उतारकर गाड़ी खाली कर देते और आगे का भाड़ा बच जाता।
आज समय से खुलेगी मंडी
मंडी सचिव अनिल कुमार ने बताया कि रविवार को व्यापारियों के माल की निकासी पर जोर दिया गया। इसके साथ ही मंडी परिसर की सफाई कराई गई है। सोमवार को मंडी निर्धारित समय पर खोली जाएगी।