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कागजों पर दूर हो रहा बच्चों का कुपोषण

Wed, 26 Oct 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला, हाथ्ारस
अमर उजाला, हाथ्ारस Updated Wed, 26 Oct 2016 11:44 PM IST
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Malnutrition of children on paper are away
ऑफिस - फोटो : demo pics
शासन के दूत बनकर आए विशेष सचिव लघु सिंचाई राजीव रौतेला के सामने जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर हौसला पोषण योजना की पोल खुल गई। विशेष सचिव ने हाथरस, सासनी और मुरसान ब्लॉक के गांवों में योजना की जमीनी हकीकत परखी तो पता चला कि केंद्र और प्रदेश सरकार की यह महत्वाकांछी योजना जमीन पर कम, कागजों पर ज्यादा दौड़ रही है।
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पहले दिन के दौरे में एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री को नौकरी गंवानी पड़ी, जबकि सीडीपीओ और सुपरवाइजर को भी प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई। दूसरे दिन डीएम के गोद लिए गांव पहाड़पुर और सीडीओ के गोद लिए गांव धाधऊ में योजना चरमराई दिखी तो यहां एक एएनएम कार्रवाई की शिकार बन गईं। सचिव को पता चला कि जिले में यह योजना ग्रामीण अंचल के 1,480 केंद्रों पर लागू की गई है।
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अभी भी 752 केंद्रों पर बर्तन नहीं हैं,  जबकि 707 केंद्रों की दीवार पर पेंटिंग नहीं हुई है। कागजों में 72 फीसदी अति कुपोषित बच्चों और 42 फीसदी हाईरिस्क प्रेग्नेंसी महिलाओं को ही इसका लाभ मिलने की जानकारी मिली।
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कहीं धनराशि तो कहीं संसाधनों की कमी से योजना पिछड़ती नजर आई। सचिव तब दंग रह गए, जब रुहेरी में तो आंगनबाड़ी कार्यकत्री योजना का नाम तक नहीं बता सकीं। योजना में पीसीडीएफ की  घी और दूध आपूर्ति की समस्या भी मिली। एक बार घी-दूध देने के  बाद पीसीडीएफ के अफसरों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई।

मुरसान के गांव खरगू में जिन पांच बच्चों को अति कुपोषित बताया गया, जांच में वह सब सामान्य मिले। मतलब, साफ था कि योजना के नाम पर कागजी खानापूर्ती का खुला खेल चल रहा है। अब इन हालात में जिले के केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों की देखभाल किस तरह हो रही होगी, इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है।


अहम सवाल यह है कि क्या सचिव के दौरे के बाद जिले में इस योजना की तस्वीर बदल पाएगी या फिर यूं ही कागजों पर कुपोषण से जंग चलती रहेगी।

हौसला पोषण योजना बेहद महत्वपूर्ण योजना है। इसे पूरी ईमानदारी से लागू कराया जा रहा है। जहां भी कमियां मिलती हैं, वहां संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
- अविनाशकृष्ण सिंह, डीएम हाथरस
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