{"_id":"57cb20b14f1c1b3d782cd73f","slug":"make-jaundice-family-s-enemy","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीलिया बना परिवार का दुश्मन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीलिया बना परिवार का दुश्मन
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Sun, 04 Sep 2016 12:43 AM IST
विज्ञापन
Doctor
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गांव गंगोल (लाखनूं) के एक परिवार के लिए पीलिया का रोग जान का दुश्मन बन गया है। एक पिता पीलिया से पहले ही अपने दो जवान बेटों को खो चुका है। अब इसी रोग की चपेट में उसका एक और बेटा और पुत्रवधु आ चुकी है। यह दोनों अस्पतालोें में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। पीड़ित पिता ने सीएमओ और डीएम से मदद की गुहार लगाई है।
गांव गंगोल लाखनूं निवासी रामपाल वाल्मीकि पुत्र वित्तीलाल वाल्मीकि ने डीएम और सीएमओ भेजे गए पत्र में बताया कि करीब दो माह पहले नौ जून 2016 को उनके सबसे बड़े बेटे कपिल कुमार (35 साल) की हेपेटाइटिस की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है।
दूसरे सबसे बड़े बेटे शैलेश कुमार (30 साल) की मृत्यु 23 अगस्त 2016 को इसी बीमारी के कारण हो गई। वर्तमान में इसी बीमारी की चपेट में उनके मृतक बेटे कपिल की पत्नी साधना और तीसरा बेटा सचिन कुमार (24 साल) भी आ गए हैं। साधना आगरा के एक हॉस्पिटल और सचिन हाथरस के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
विज्ञापन
इस कारण उनका पूरा परिवार पूरी तरह से इस बीमारी की चपेट में है और बीमारी के चलते आर्थिक तंगी में आ गए हैं। अब वह इनका इलाज कराने में असमर्थ है। पत्र में रामपाल ने सीएमओ और डीएम से पुत्रवधु और बेटे को बेहतर इलाज की सुविधा मुहैया कराए जाने की मांग की है।
विज्ञापन
गांव गंगोल लाखनूं निवासी रामपाल वाल्मीकि पुत्र वित्तीलाल वाल्मीकि ने डीएम और सीएमओ भेजे गए पत्र में बताया कि करीब दो माह पहले नौ जून 2016 को उनके सबसे बड़े बेटे कपिल कुमार (35 साल) की हेपेटाइटिस की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
दूसरे सबसे बड़े बेटे शैलेश कुमार (30 साल) की मृत्यु 23 अगस्त 2016 को इसी बीमारी के कारण हो गई। वर्तमान में इसी बीमारी की चपेट में उनके मृतक बेटे कपिल की पत्नी साधना और तीसरा बेटा सचिन कुमार (24 साल) भी आ गए हैं। साधना आगरा के एक हॉस्पिटल और सचिन हाथरस के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
विज्ञापन
इस कारण उनका पूरा परिवार पूरी तरह से इस बीमारी की चपेट में है और बीमारी के चलते आर्थिक तंगी में आ गए हैं। अब वह इनका इलाज कराने में असमर्थ है। पत्र में रामपाल ने सीएमओ और डीएम से पुत्रवधु और बेटे को बेहतर इलाज की सुविधा मुहैया कराए जाने की मांग की है।