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मैडम! बस सही कराओ, तब डीजल के नुकसान की भरपाई करो
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
हाथरस डिपो की अधिकांश बसें खटारा हैं। बंद होने के बाद बस को धक्का न लगाने पड़े, इसलिए बसों को स्टॉपेज पर चालू रखते हैं। इस कारण डीजल औसत गिर रहा है। डिपो की एआरएम द्वारा डीजल खपत के नुकसान की भरपाई चालकों के वेतन से कटौती कर की जा रही है। अब तक कई चालकों के वेतन से कटौती की गई है। अफसरों की कार्यशैली से डिपो के चालकों में काफी गुस्सा है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 83 बसें हैं। कर्मियों का कहना है कि डिपो के बेड़े में दो दर्जन से अधिक बसें ऐसी हैं, जो पुरानी हैं। ये बसें कार्यशाला से धक्के से चालू होकर बस स्टैंड तक आती हैं। चालकों का कहना है कि बसों में बैटरी व सेल्फ की दिक्कत है। इस कारण स्टॉपेज पर बसों को चालू करके रखा जाता है। इस कारण डीजल की खपत बढ़ गई है। डिपो के अधिकारी इस बात को मानने को तैयार नहीं है। बसों के खटारा होने के कारण डीजल की खपत बढ़ गई है। डिपो की एआरएम द्वारा कई चालकों के वेतन से डीजल औसत गिरने पर कटौती की गई है। इसे लेकर चालक-परिचालक खासे परेशान हैं।
जो कटौती की जाती है, उसके लिए पिछले दो-तीन महीने का रिकॉर्ड देखा जाता है। तब कटौती की जाती है। बैटरियों की मांग भेज दी गई है। जल्द ही बैटरी आ जाएंगी। - शशी रानी, एआरएम हाथरस डिपो
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हाथरस डिपो की अधिकांश बसें खटारा हैं। बंद होने के बाद बस को धक्का न लगाने पड़े, इसलिए बसों को स्टॉपेज पर चालू रखते हैं। इस कारण डीजल औसत गिर रहा है। डिपो की एआरएम द्वारा डीजल खपत के नुकसान की भरपाई चालकों के वेतन से कटौती कर की जा रही है। अब तक कई चालकों के वेतन से कटौती की गई है। अफसरों की कार्यशैली से डिपो के चालकों में काफी गुस्सा है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 83 बसें हैं। कर्मियों का कहना है कि डिपो के बेड़े में दो दर्जन से अधिक बसें ऐसी हैं, जो पुरानी हैं। ये बसें कार्यशाला से धक्के से चालू होकर बस स्टैंड तक आती हैं। चालकों का कहना है कि बसों में बैटरी व सेल्फ की दिक्कत है। इस कारण स्टॉपेज पर बसों को चालू करके रखा जाता है। इस कारण डीजल की खपत बढ़ गई है। डिपो के अधिकारी इस बात को मानने को तैयार नहीं है। बसों के खटारा होने के कारण डीजल की खपत बढ़ गई है। डिपो की एआरएम द्वारा कई चालकों के वेतन से डीजल औसत गिरने पर कटौती की गई है। इसे लेकर चालक-परिचालक खासे परेशान हैं।
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जो कटौती की जाती है, उसके लिए पिछले दो-तीन महीने का रिकॉर्ड देखा जाता है। तब कटौती की जाती है। बैटरियों की मांग भेज दी गई है। जल्द ही बैटरी आ जाएंगी। - शशी रानी, एआरएम हाथरस डिपो
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