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खेमेबंदी से नहीं उबर पा रही भाजपा
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Wed, 05 Oct 2016 11:49 PM IST
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बूथ सम्मेलन को संबोधित करते प्रकाश चंद्र शर्मा व मंचासीन पदाधिकारी।
- फोटो : amar ujala
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भाजपा में वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रहे मतभेद समाप्त होने का नाम नहीं ले रहे हैं। पार्टी दो खेमों में बंटकर रह गई है। पार्टी के विधानसभा स्तरीय बूथ सम्मेलन पर भी इस विवाद की छाया नजर आई। खेमेबाजी के चलते बूथ सम्मेलन में सभी बूथ अध्यक्ष और संयोजक शामिल नहीं हो पाए। कार्यक्रम में कुर्सियां खाली पड़ी रहीं।
हालांकि दोनों ही खेमे एक-दूसरे के कार्यक्रमों में अपनी गैर मौजूदगी को सामान्य बात बताते हुए गुटबंदी को सिरे से खारिज कर रहे हैं। दिग्गज नेताओं के बीच यह रार कब तक चलेगी, यह खुद पार्टी कार्यकर्ता ही नहीं समझ पा रहे हैं।
पार्टी हाईकमान के निर्देश पर हाथरस विधानसभा क्षेत्र का बूथ सम्मेलन राजरानी मेहरा गेस्ट हाउस में हुआ। उसी दिन अचानक अलीगढ़ रोड मंडी समिति के निकट दिव्यांगों को ट्राई साइकिल वितरण का कार्यक्रम रख दिया गया।
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पहले भी पार्टी हाईकमान से दिव्यांगों को सहायता उपकरण कार्यक्रम वितरण का कार्यक्रम हुआ था, जिसमें सांसद, जिलाध्यक्ष सहित सभी भाजपाइयों को शामिल होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसे लेकर गुटबंदी की चर्चाओं को फिर हवा मिली। एक गुट सांसद के साथ रहा तो दूसरा जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में मथुरा रोड स्थित जिला कार्यालय पर अचानक तय की गई बैठक में शामिल हुआ। इसी तरह मेला श्रीदाऊजी महाराज में लगे भाजपा के शिविर पर भी भाजपाई आपस में भिड़ गए थे, जिससे शिविर का विधिवत समापन भी नहीं हो सका था। पार्टी के अंदर चल रहे इस शीतयुद्ध को लेकर कार्यकर्ताओं में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
- सांसद के काम अलग होते हैं और संगठन के अलग होते हैं। बूथ के कार्यक्रम तो चलते रहते हैं, कल सिकंदराराऊ में भी कार्यक्रम होगा, उसमें शामिल हो सकता हूं। प्रधानमंत्री मुद्रा संचय योजना का कार्यक्रम हुआ था, मैं वहां भी गया था। रसोई गैस कनेक्शन वितरण, दिव्यांगों को उपकरण वितरण यह भी सरकार की योजनाएं हैं, वहां भी जाना होता है। जिलाध्यक्ष से किसी भी तरह का कोई विवाद नहीं है।
- राजेश दिवाकर, सांसद हाथरस
- बूथ सम्मेलन में सांसद का आना अनिवार्य तो नहीं था, फिर भी जनप्रतिनिधि के नाते निमंत्रण भेजा गया था। सांसद का कहीं बाहर कार्यक्रम लगा होगा, इसलिए वह नहीं आ पाए। सांसद से किसी भी तरह का कोई विवाद नहीं है। पार्टी पूरी तरह एकजुट है।
- रामवीर सिंह परमार, भाजपा जिलाध्यक्ष
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हालांकि दोनों ही खेमे एक-दूसरे के कार्यक्रमों में अपनी गैर मौजूदगी को सामान्य बात बताते हुए गुटबंदी को सिरे से खारिज कर रहे हैं। दिग्गज नेताओं के बीच यह रार कब तक चलेगी, यह खुद पार्टी कार्यकर्ता ही नहीं समझ पा रहे हैं।
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पार्टी हाईकमान के निर्देश पर हाथरस विधानसभा क्षेत्र का बूथ सम्मेलन राजरानी मेहरा गेस्ट हाउस में हुआ। उसी दिन अचानक अलीगढ़ रोड मंडी समिति के निकट दिव्यांगों को ट्राई साइकिल वितरण का कार्यक्रम रख दिया गया।
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पहले भी पार्टी हाईकमान से दिव्यांगों को सहायता उपकरण कार्यक्रम वितरण का कार्यक्रम हुआ था, जिसमें सांसद, जिलाध्यक्ष सहित सभी भाजपाइयों को शामिल होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसे लेकर गुटबंदी की चर्चाओं को फिर हवा मिली। एक गुट सांसद के साथ रहा तो दूसरा जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में मथुरा रोड स्थित जिला कार्यालय पर अचानक तय की गई बैठक में शामिल हुआ। इसी तरह मेला श्रीदाऊजी महाराज में लगे भाजपा के शिविर पर भी भाजपाई आपस में भिड़ गए थे, जिससे शिविर का विधिवत समापन भी नहीं हो सका था। पार्टी के अंदर चल रहे इस शीतयुद्ध को लेकर कार्यकर्ताओं में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
- सांसद के काम अलग होते हैं और संगठन के अलग होते हैं। बूथ के कार्यक्रम तो चलते रहते हैं, कल सिकंदराराऊ में भी कार्यक्रम होगा, उसमें शामिल हो सकता हूं। प्रधानमंत्री मुद्रा संचय योजना का कार्यक्रम हुआ था, मैं वहां भी गया था। रसोई गैस कनेक्शन वितरण, दिव्यांगों को उपकरण वितरण यह भी सरकार की योजनाएं हैं, वहां भी जाना होता है। जिलाध्यक्ष से किसी भी तरह का कोई विवाद नहीं है।
- राजेश दिवाकर, सांसद हाथरस
- बूथ सम्मेलन में सांसद का आना अनिवार्य तो नहीं था, फिर भी जनप्रतिनिधि के नाते निमंत्रण भेजा गया था। सांसद का कहीं बाहर कार्यक्रम लगा होगा, इसलिए वह नहीं आ पाए। सांसद से किसी भी तरह का कोई विवाद नहीं है। पार्टी पूरी तरह एकजुट है।
- रामवीर सिंह परमार, भाजपा जिलाध्यक्ष