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मां के संस्कार से बनता है जीवन : सविता
hathras
Updated Thu, 17 Dec 2015 12:01 AM IST
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सिकंदराराऊ (ब्यूरो)। बुधवार को नगर के जीटी रोड स्थित देवेन्द्र यादव परिसर में द्वादश ज्योतिर्लिंगम शिव दर्शन मेले के तहत महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने मां की महिमा का गुणगान करते हुये कहा कि मां संस्कारों की ध्ुारी है घर से ही बच्चे मे ंसंस्कारों का उदय होता है।
कार्यक्रम के प्रारमभ में सर्वोदय पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मंच पर उपस्थित अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। मुरलीधर भाई ने परमात्मा शिव को कैसे याद करें रुहानी ड्रिल सिखलायी। सीता दीदी ने कहा कि महिलाओं को जाग्रत होने की आवश्यकता है। उन पर हो अत्याचार के विरोध में शसक्त बन कर दिखाना होगा। अनुपम बहिन ने ये रूहों का मेला जन्नत नहंीं तो और क्या है गीत सुनाया।
भावना बहिन ने कहा कि बहू, बेटी, मॉ और बहना नारी है घर घर का गहना। माउंट आबू राजस्थान से पधारी राजयोगिनी डॉ. सबिता दीदी ने कहा कि मां घर की ध्ुारी है जो संस्कार अपने बच्चों में भर देती है वे साथ साथ चलते हैं। मां चाहे तो बच्चे को उच्च संस्कारों की गंगा में नहला सकती है।
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उन्होनें कहा कि धन गया तो कुछ भी नहंीं गया, स्वास्थ गया तो थोड़ा गया, चरित्र गया तो सब कुछ गया। जीवन को चािरत्रवान बनाने की शिक्षा ब्रह्मकुमारी के द्वारा दी जाती है। प्रमुख रूप से थे सीमा यादव, गीता बहिन, विनीता, सुरेश, ऊषा, सुलोचना,सुमित, शम्भू, रिषी, संजय, शोभा, विकास आदि थे।
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कार्यक्रम के प्रारमभ में सर्वोदय पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मंच पर उपस्थित अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। मुरलीधर भाई ने परमात्मा शिव को कैसे याद करें रुहानी ड्रिल सिखलायी। सीता दीदी ने कहा कि महिलाओं को जाग्रत होने की आवश्यकता है। उन पर हो अत्याचार के विरोध में शसक्त बन कर दिखाना होगा। अनुपम बहिन ने ये रूहों का मेला जन्नत नहंीं तो और क्या है गीत सुनाया।
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भावना बहिन ने कहा कि बहू, बेटी, मॉ और बहना नारी है घर घर का गहना। माउंट आबू राजस्थान से पधारी राजयोगिनी डॉ. सबिता दीदी ने कहा कि मां घर की ध्ुारी है जो संस्कार अपने बच्चों में भर देती है वे साथ साथ चलते हैं। मां चाहे तो बच्चे को उच्च संस्कारों की गंगा में नहला सकती है।
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उन्होनें कहा कि धन गया तो कुछ भी नहंीं गया, स्वास्थ गया तो थोड़ा गया, चरित्र गया तो सब कुछ गया। जीवन को चािरत्रवान बनाने की शिक्षा ब्रह्मकुमारी के द्वारा दी जाती है। प्रमुख रूप से थे सीमा यादव, गीता बहिन, विनीता, सुरेश, ऊषा, सुलोचना,सुमित, शम्भू, रिषी, संजय, शोभा, विकास आदि थे।