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Hathras: किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म करने वाले को आजीवन कारावास, रिश्ते में आरोपी की भांजी लगती थी पीड़िता
Sat, 30 Mar 2024 09:35 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: चमन शर्मा
Updated Sat, 30 Mar 2024 09:35 PM IST
सार
2 नवंबर 2008 को मां-बाप खेत पर गए थे। घर पर उनकी बड़ी बेटी और छोटी बेटी थी। जब वह खेत से वापस घर आए तो उन्हें घर पर बड़ी बेटी नहीं मिली। उसके बारे में उन्होंने अपनी छोटी पुत्री से पूछा तो उसने बताया कि ताऊजी की बेटी घर पर आई थी। आते ही उसने उसे छत पर भेज दिया। जब वह छत से वापस आई तो घर का दरवाजा बंद था।
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कारावास
- फोटो : dummy picture
विस्तार
हाथरस के अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी प्रथम पारुल वर्मा के न्यायालय ने एक 14 वर्षीय किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म करने के आरोपी रिश्ते के मामा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
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अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले एडीजीसी मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि थाना सिकंदराराऊ क्षेत्र के एक मोहल्ले के रहने वाले एक व्यक्ति ने न्यायालय में सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल करके मुकदमा दर्ज कराया था। प्रार्थना पत्र में कहा था कि दो नवंबर 2008 को वह अपनी पत्नी के साथ सुबह करीब आठ बजे अपने खेत पर गए थे। घर पर उनकी 14 वर्षीय बड़ी बेटी और करीब छह वर्षीय छोटी बेटी थी।
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जब वह खेत से वापस घर आए तो उन्हें घर पर बड़ी बेटी नहीं मिली। उसके बारे में उन्होंने अपनी छोटी पुत्री से पूछा तो उसने बताया कि ताऊजी की बेटी घर पर आई थी। आते ही उसने उसे छत पर भेज दिया। जब वह छत से वापस आई तो घर का दरवाजा बंद था। जब छोटी लड़की छत से आ रही थी तो ताऊजी की बेटी व आरोपी ललित डांटने लगे और बोले कि तू इतनी जल्दी छत से क्यों आ गई, फिर वह ऊपर की तरफ जाने लगी।
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फिर उसने छुप कर देखा कि इन लोगों ने गड्ढे से कटोरदान निकाला और उसमें रखा सामान, रुपया व गहने लेकर उसकी बड़ी बहन को आरोपी ललित व ताऊजी की लड़की अपने साथ ले गए। इस मामले में थाना सिकंदराराऊ में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/ एफटीसी प्रथम पारुल वर्मा के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने आरोपी ललित को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।