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लंदन के प्रकाशन को भायीं हाथरस के शिक्षक की रचनाएं
अमर उजाला ब्यूरो ,हाथरस।
Updated Mon, 13 Nov 2017 12:12 AM IST
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कविता संग्रह के लेखक लोकेंद्र पौरुष।
- फोटो : amar ujala
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हाथरस की धरती पर जन्मे एक कवि की फेसबुक वॉल पर लिखी अंग्रेजी की कविताएं (पोइट्री) लंदन के एक मशहूर प्रकाशन को इतनी पसंद आईं कि उसने इस कवि की कविताओं के एक नहीं, बल्कि दो कविता संग्रह प्रकाशित किए हैं। यही नहीं यह पब्लिकेशन कविता संग्रह की बिक्री से मिल रही रॉयल्टी भी कवि लोकेंद्र पौरुष को लगातार भेज रहा है। अब तक लोकेंद्र को दो लाख रुपये बतौर रॉयल्टी भेजे जा चुके हैं। पब्लिकेशन ने उनको लंदन आने का न्यौता भी दिया है। इसी पब्लिकेशन की सलाह पर अंग्रेजी में अब वे एक उपन्यास लिख रहे हैं।
45 वर्षीय लोकेंद्र पौरुष शहर के खोंडा हजारी इलाके के रहने वाले हैं। 1994 में बागला डिग्री कॉलेज से अंग्रेजी में एमए करने के दौरान ही उनकी पहली कविता कॉलेज की मैगजीन में प्रकाशित हुई थी। लोकेंद्र ने पत्रकारिता और अंग्रेजी में क्रिएटिव राइटिंग की शिक्षा ली। इसके बाद उनका चयन नवोदय विद्यालय में शिक्षक के तौर पर हो गया। फिलहाल वह सिकंदराराऊ के अगसौली स्थित नवोदय विद्यालय में छात्र-छात्राओं को अंग्रेजी पढ़ाते हैं। लोकेंद्र का कहना है कि अंग्रेजी कविताएं पढ़ने के शौक ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया।
पोइट्री की ठीक-ठाक समझ विकसित होने के बाद उन्होंने कविताएं लिखना शुरू किया। अपने गूढ़ अर्थों से भरी इन कविताओं को लिखने के लिए लोकेंद्र देर रात तक जागते हैं। वे बताते हैं कि कई बार एक-एक लाइन लिखने में कई दिन बीत जाते हैं। एक कविता लिखने में महीना भर तक लग जाता। इसके बाद उन्होंने फेसबुक पर अपनी कविताएं पोस्ट करना शुरू किया। उन्हें पता भी नहीं चला और फेसबुक पर उनकी कविताआें को पसंद करने वाले लोगों की संख्या बढ़ने लगी।
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लंदन में काम करने वाले एक भारतीय, जिनकी अंग्रेजी साहित्य में काफी दिलचस्पी है, लोकेंद्र की कविताओं के फैन हो गए। उन्होंने ही लोकेंद्र की रचनाओं को लंदन के मशहूर एफएनवी पब्लिकेशन तक पहुंचाया। पब्लिकेशन ने बीते साल लोकेंद्र पौरुष का कविता संग्रह ‘ऑन द विंग्स ऑफ लव’ प्रकाशित किया जो रोमांस और फिलॉसफी पर आधारित था।
इस कविता संग्रह की सफलता से उत्साहित पब्लिकेशन ने चंद रोज पहले (नवंबर में ही) लोकेंद्र का दूसरा कविता संग्रह ‘ए फेक स्टोन’ प्रकाशित किया है, जो जीवन की फिलॉसफी पर आधारित है। कविता संग्रह के प्रकाशन में लोकेंद्र पौरुष का कोई भी खर्च नहीं हुआ। उन्हें लाखों की रॉयल्टी भी मिल गई जो आगे भी जारी रहेगी। प्रकाशक ने लोकेंद्र को लंदन आने का न्यौता भी दिया है।
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45 वर्षीय लोकेंद्र पौरुष शहर के खोंडा हजारी इलाके के रहने वाले हैं। 1994 में बागला डिग्री कॉलेज से अंग्रेजी में एमए करने के दौरान ही उनकी पहली कविता कॉलेज की मैगजीन में प्रकाशित हुई थी। लोकेंद्र ने पत्रकारिता और अंग्रेजी में क्रिएटिव राइटिंग की शिक्षा ली। इसके बाद उनका चयन नवोदय विद्यालय में शिक्षक के तौर पर हो गया। फिलहाल वह सिकंदराराऊ के अगसौली स्थित नवोदय विद्यालय में छात्र-छात्राओं को अंग्रेजी पढ़ाते हैं। लोकेंद्र का कहना है कि अंग्रेजी कविताएं पढ़ने के शौक ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया।
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पोइट्री की ठीक-ठाक समझ विकसित होने के बाद उन्होंने कविताएं लिखना शुरू किया। अपने गूढ़ अर्थों से भरी इन कविताओं को लिखने के लिए लोकेंद्र देर रात तक जागते हैं। वे बताते हैं कि कई बार एक-एक लाइन लिखने में कई दिन बीत जाते हैं। एक कविता लिखने में महीना भर तक लग जाता। इसके बाद उन्होंने फेसबुक पर अपनी कविताएं पोस्ट करना शुरू किया। उन्हें पता भी नहीं चला और फेसबुक पर उनकी कविताआें को पसंद करने वाले लोगों की संख्या बढ़ने लगी।
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लंदन में काम करने वाले एक भारतीय, जिनकी अंग्रेजी साहित्य में काफी दिलचस्पी है, लोकेंद्र की कविताओं के फैन हो गए। उन्होंने ही लोकेंद्र की रचनाओं को लंदन के मशहूर एफएनवी पब्लिकेशन तक पहुंचाया। पब्लिकेशन ने बीते साल लोकेंद्र पौरुष का कविता संग्रह ‘ऑन द विंग्स ऑफ लव’ प्रकाशित किया जो रोमांस और फिलॉसफी पर आधारित था।
इस कविता संग्रह की सफलता से उत्साहित पब्लिकेशन ने चंद रोज पहले (नवंबर में ही) लोकेंद्र का दूसरा कविता संग्रह ‘ए फेक स्टोन’ प्रकाशित किया है, जो जीवन की फिलॉसफी पर आधारित है। कविता संग्रह के प्रकाशन में लोकेंद्र पौरुष का कोई भी खर्च नहीं हुआ। उन्हें लाखों की रॉयल्टी भी मिल गई जो आगे भी जारी रहेगी। प्रकाशक ने लोकेंद्र को लंदन आने का न्यौता भी दिया है।