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किसान सम्मान निधि की राशि छह हजार से ज्यादा की जाए
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ऋषि जायसवाल।
- फोटो : SADABAD
संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
लंबे समय से लागू लॉक डाउन ने सभी वर्गों को प्रभावित किया है, देश की आर्थिक गतिविधियों को काफी पीछे कर दिया है, लेकिन हम सभी देश वासी एकजुट होकर स्वदेशी उत्पादन व प्रयोग से जल्दी ही आत्मनिर्भर बनेंगे।
यह विचार राष्ट्रीय कृषक समृद्धि आयोग के सदस्य ऋषि जायसवाल ने व्यक्त किए। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों के तहत बाजार खोलने की घोषणा का पालन व्यापारियों, ग्राहकों को करना चाहिए। सभी को मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए। केन्द्र सरकार द्वारा बीस लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा से समाज के सभी वर्गों को पुन: आत्मनिर्भर व स्वावलंबी के दूरगामी परिणाम भी प्राप्त होंगे। केवल योजनाओ को समझने व क्रियांन्वित करने की आवश्यकता है, भारत के किसान भाइयों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा कुल पांच लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा से निश्चत ही किसानी खेती को आत्मनिर्भर बनाने व निर्यात के अवसर बढ़ेंगे। इस लॉकडाउन के दौरान किसानों को अपनी फसलों का वाजिव मूल्य नहीं मिला, इससे किसानों के आर्थिक नुकसान को देखते हुए किसानो को सीधे नगदी सहायता की जानी चाहिए। भारतीय किसान संघ की स्पष्ट सोच है कि किसान सम्मान निधि की धनराशि 6000 से ज्यादा की जाए। इसके लिए उन्होने केंद्र व राज्य सरकार को पत्राचार किया है। प्रवासी मजदूर भाईयों को स्थानीय स्तर पर ही लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से रोजगार की व्यवस्था के लिये प्रवासियों की सूची के लिए जिलाधिकारी हाथरस से वार्ता हो चुकी है।
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लंबे समय से लागू लॉक डाउन ने सभी वर्गों को प्रभावित किया है, देश की आर्थिक गतिविधियों को काफी पीछे कर दिया है, लेकिन हम सभी देश वासी एकजुट होकर स्वदेशी उत्पादन व प्रयोग से जल्दी ही आत्मनिर्भर बनेंगे।
यह विचार राष्ट्रीय कृषक समृद्धि आयोग के सदस्य ऋषि जायसवाल ने व्यक्त किए। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों के तहत बाजार खोलने की घोषणा का पालन व्यापारियों, ग्राहकों को करना चाहिए। सभी को मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए। केन्द्र सरकार द्वारा बीस लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा से समाज के सभी वर्गों को पुन: आत्मनिर्भर व स्वावलंबी के दूरगामी परिणाम भी प्राप्त होंगे। केवल योजनाओ को समझने व क्रियांन्वित करने की आवश्यकता है, भारत के किसान भाइयों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा कुल पांच लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा से निश्चत ही किसानी खेती को आत्मनिर्भर बनाने व निर्यात के अवसर बढ़ेंगे। इस लॉकडाउन के दौरान किसानों को अपनी फसलों का वाजिव मूल्य नहीं मिला, इससे किसानों के आर्थिक नुकसान को देखते हुए किसानो को सीधे नगदी सहायता की जानी चाहिए। भारतीय किसान संघ की स्पष्ट सोच है कि किसान सम्मान निधि की धनराशि 6000 से ज्यादा की जाए। इसके लिए उन्होने केंद्र व राज्य सरकार को पत्राचार किया है। प्रवासी मजदूर भाईयों को स्थानीय स्तर पर ही लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से रोजगार की व्यवस्था के लिये प्रवासियों की सूची के लिए जिलाधिकारी हाथरस से वार्ता हो चुकी है।
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