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काका की याद में बना है काका हाथरसी स्मारक भवन

Sat, 17 Sep 2022 11:15 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Sep 2022 11:15 PM IST
सार

अभी तक इस स्मारक में काका की पुस्तकें, उनके दैनिक जीवन से जुड़ी तमाम धरोहरें संग्रहीत नहीं हैं। चूंकि काका बेहतरीन चित्रकार और संगीतकार भी थे, इसलिए उनकी बनाई गई पेंटिंगें, ब्रुश सहित अन्य तमाम जैसी भी यहां रखी जाएं और एक म्यूजियम बनाया जाए, जिससे लोग जब यहां आएं तो काका के पूरे विराट व्यक्तित्व को वह जान सकें। फिलहाल शहर में मथुरा रोड से जब बाहरी लोग प्रवेश करते हैं तो इस स्मारक को देखकर उन्हें यह अहसास हो जाता है कि वह काका हाथरसी के शहर में आ गए हैं।

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Kaka's monument was built, heritage was not saved
काका हाथरसी स्मारक भवन। संवाद - फोटो : HATHRAS

विस्तार

संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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शहर के ओढ़पुरा तिराहे पर काका हाथरसी स्मारक भवन है। इसमें काका की मुस्कुराती हुई प्रतिमा दिखाई देती है और शिला पट्टिकाओं पर काका के दोहे लिखे हैं। काका हाथरसी की वजह से हाथरस का नाम भी देश और दुनिया में पहचाना जाता है।
बात यदि काका की स्मृतियों की करें तो काका की किताबें और उनकी रचनाएं तो विश्वभर में प्रसिद्ध हैं ही, शहर में भी काका हाथरसी की स्मृति में उनका स्मारक बना है। इस स्मारक भवन में काका की प्रतिमा लगी है और काका के रचित कुछ दोहे लिखे हैं। अभी तक इस स्मारक में काका की पुस्तकें, उनके दैनिक जीवन से जुड़ी तमाम धरोहरें संग्रहीत नहीं हैं। हालांकि इसे लेकर स्मारक समिति के लोग पहल कर रहे हैं।
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काका हाथरसी की स्मृति में स्मारक स्थापित करने की पहल वर्ष 2002 में तत्कालीन डीएम रविकांत भटनागर ने की। इसके लिए काका हाथरसी स्मारक समिति भी गठित की गई। भटनागर इसके संस्थापक अध्यक्ष बने और शहर में मथुरा रोड पर ओढपुरा तिराहे पर काका हाथरसी स्मारक का शिलान्यास किया गया।
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क रीब एक साल में यह भवन बनकर तैयार हो गया। काका की स्मृति में यहां कार्यक्रम होने लगे। यह भी योजना बनाई गई कि काका की पुस्तकों को यहां रखा जाए और यहां पुस्तकालय बनाया जाए। चूंकि काका बेहतरीन चित्रकार और संगीतकार भी थे, इसलिए उनकी बनाई गई पेंटिंगें, ब्रुश सहित अन्य तमाम जैसी भी यहां रखी जाएं और एक म्यूजियम बनाया जाए, जिससे लोग जब यहां आएं तो काका के पूरे विराट व्यक्तित्व को वह जान सकें।

काका न केवल हास्य व्यंग्य के कवि थे, जबकि एक उम्दा चित्रकार और संगीतकार भी थे। हालांकि अभी इस पर अमल नहीं हुआ। अलबत्ता वर्ष 2008 में काका की एक प्रतिमा यहां जरूर लगाई गई। फिलहाल शहर में मथुरा रोड से जब बाहरी लोग प्रवेश करते हैं तो इस स्मारक को देखकर उन्हें यह अहसास हो जाता है कि वह काका हाथरसी के शहर में आ गए हैं।
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