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Hathras News: बहन के बेटे की मौत का बहाना बनाकर फरीदाबाद गई थी काजल
Sat, 17 Oct 2026 02:49 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 17 Oct 2026 02:49 AM IST
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चंदपा के गांव कुंवरपुर में बेटे की मौत की जानकारी पर विलाप करतीं मां हंसोदेवी। संवाद
- फोटो : Samvad
चंदपा (हाथरस)। गांव कुंवरपुर निवासी काजल कई महीनों से पति को रास्ते से हटाने की योजना बना रही थी। 12 अक्तूबर की शाम वह फरीदाबाद में बहन के बेटे की मौत का बहाना बनाकर घर से निकली थी। पीछे-पीछे गांव से उसका प्रेमी योगेंद्र भी फरीदाबाद पहुंच गया। प्रेमी के साथ मिलकर 14 अक्तूबर की रात को गोपाल का गला रेतकर उसे मौत के घाट उतार दिया गया।
कुंवरपुर निवासी गोपाल (38) चार भाइयों में सबसे बड़ा था। 22 साल पहले काम की तलाश में फरीदाबाद पहुंचा था। 16 साल पहले राया (मथुरा) की रहने वाली काजल से उसने पंजीकृत शादी की थी। गोपाल के छोटे भाई चंद्रवीर ने बताया कि दोनों की मुलाकात फरीदाबाद में हुई थी। छोटे भाई भूरी सिंह ने बताया कि गोपाल फरीदाबाद में काजल के मामा के लड़के के साथ ही किराये पर रहता था।
वहीं से नजदीकियां बढ़ी थीं। काजल की यह दूसरी शादी थी। वह पांच साल की शालिनी को साथ लाई थी। बृहस्पतिवार रात को फरीदाबाद की कोतवाली पल्ला पुलिस ने गांव में दबिश दी तो ग्रामीणों को घटना की जानकारी हुई।
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तीन साल से थे संबंध
काजल अपनी बेटी शालिनी व गोपाल से हुए तीन बच्चों के साथ गांव में ही रहती थी, जबकि गोपाल फरीदाबाद में ही रहकर कपड़े की फैक्टरी में काम करता था। गांव में तीन साल पहले पड़ोसी योगेंद्र से उसके प्रेम संबंध हो गए। गोपाल के भाई भूरी सिंह ने बताया कि घटना के बाद जानकारी हुई कि योगेंद्र व काजल तीन साल से संबंध में थे। योगेंद्र की पत्नी 10 साल पहले उसे छोड़कर जा चुकी है।
फरीदाबाद पुलिस ने दी दबिश
गोपाल फरीदाबाद की कोतवाली पल्ला की श्याम कॉलोनी में रहता था। पत्नी व सौतेली बेटी शालिनी को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने बृहस्पतिवार रात गांव कुंवरपुर में दबिश दी और आरोपी योगेंद्र को उसके घर से हिरासत में ले लिया।
शव आते ही मां हुई बदहवास
शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद देर शाम तीनों भाई गोपाल का शव लेकर गांव पहुंचे। इधर, हत्या की जानकारी के बाद से ही मां हंसो देवी का रो-रो कर बुरा हाल था। देर शाम करीब सात बजे शव आते ही परिवार में कोहराम मच गया। बड़े बेटे का चेहरा देख मां बदहवास हो गईं। रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। गोपाल से छोटा भाई अशोक व सबसे छोटा भाई चंद्रवीर गोवा में रहते हैं। वहीं तीसरे नंबर भाई भूरी सिंह गांव में ही रहता है। गोपाल के तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा 13 साल, दूसरा 10 साल व तीसरी बेटी 6 साल की है। तीनों बच्चे पिता के शव के साथ गांव नहीं आए, वे फरीदाबाद में ही मौसी के पास हैं।
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कुंवरपुर निवासी गोपाल (38) चार भाइयों में सबसे बड़ा था। 22 साल पहले काम की तलाश में फरीदाबाद पहुंचा था। 16 साल पहले राया (मथुरा) की रहने वाली काजल से उसने पंजीकृत शादी की थी। गोपाल के छोटे भाई चंद्रवीर ने बताया कि दोनों की मुलाकात फरीदाबाद में हुई थी। छोटे भाई भूरी सिंह ने बताया कि गोपाल फरीदाबाद में काजल के मामा के लड़के के साथ ही किराये पर रहता था।
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वहीं से नजदीकियां बढ़ी थीं। काजल की यह दूसरी शादी थी। वह पांच साल की शालिनी को साथ लाई थी। बृहस्पतिवार रात को फरीदाबाद की कोतवाली पल्ला पुलिस ने गांव में दबिश दी तो ग्रामीणों को घटना की जानकारी हुई।
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तीन साल से थे संबंध
काजल अपनी बेटी शालिनी व गोपाल से हुए तीन बच्चों के साथ गांव में ही रहती थी, जबकि गोपाल फरीदाबाद में ही रहकर कपड़े की फैक्टरी में काम करता था। गांव में तीन साल पहले पड़ोसी योगेंद्र से उसके प्रेम संबंध हो गए। गोपाल के भाई भूरी सिंह ने बताया कि घटना के बाद जानकारी हुई कि योगेंद्र व काजल तीन साल से संबंध में थे। योगेंद्र की पत्नी 10 साल पहले उसे छोड़कर जा चुकी है।
फरीदाबाद पुलिस ने दी दबिश
गोपाल फरीदाबाद की कोतवाली पल्ला की श्याम कॉलोनी में रहता था। पत्नी व सौतेली बेटी शालिनी को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने बृहस्पतिवार रात गांव कुंवरपुर में दबिश दी और आरोपी योगेंद्र को उसके घर से हिरासत में ले लिया।
शव आते ही मां हुई बदहवास
शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद देर शाम तीनों भाई गोपाल का शव लेकर गांव पहुंचे। इधर, हत्या की जानकारी के बाद से ही मां हंसो देवी का रो-रो कर बुरा हाल था। देर शाम करीब सात बजे शव आते ही परिवार में कोहराम मच गया। बड़े बेटे का चेहरा देख मां बदहवास हो गईं। रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला। गोपाल से छोटा भाई अशोक व सबसे छोटा भाई चंद्रवीर गोवा में रहते हैं। वहीं तीसरे नंबर भाई भूरी सिंह गांव में ही रहता है। गोपाल के तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा 13 साल, दूसरा 10 साल व तीसरी बेटी 6 साल की है। तीनों बच्चे पिता के शव के साथ गांव नहीं आए, वे फरीदाबाद में ही मौसी के पास हैं।