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पुतले में सरकारी किताबों के प्रयोग के मामले में सबकी निगाहें अब अलीगढ़ में होने वाली जांच पर

Wed, 09 Oct 2019 11:46 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 09 Oct 2019 11:46 PM IST
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In the case of the use of government books in effigies, all eyes are now on the investigation in Aligarh
अलीगढ़ में होने वाली जांच पर सबकी नजरें
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रावण के पुतले में निशुल्क बंटने वाली सरकारी किताबों के प्रयोग का मामला
स्थानीय प्रशासन ने इन्हें सरकारी किताबें मानने से कर दिया था इंकार
रात्रि में धू-धूकर जला था इन्हीं पन्नों का बना रावण का पुतला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। रावण के पुतले में सरकारी किताबों के पन्ने लगाने के मामले में स्थानीय प्रशासन ने तो जांच में क्लीन चिट देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है, लेकिन अब लोगों की नजर अलीगढ़ में होने वाली जांच पर लगी है।
उल्लेखनीय है कि पॉलीटेक्निक के मैदान में विजयादशमी के पर्व पर मंगलवार को रावण का पुतला दहन किया गया था। पुतला दहन से पहले जब लोगों ने यह देखा था कि इस पुतले में सरकारी किताबें, जो कि निशुल्क वितरण के लिए हैं, लगी हुई हैं तो वहां हंगामा हुआ था। इसे लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। काफी पन्नों पर यह लिखा था कि यह किताबें निशुल्क वितरण के लिए हैं और इन पर सत्र 2018-19 और 2019-20 लिखा था।
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कांग्रेसियों का आरोप था कि शिक्षा माफिया और प्रदेश सरकार की मिलीभगत से जो किताबें बच्चों के हाथ में होनी चाहिए, वह स्कूलों की जगह रद्दी की दुकानों पर पहुंच गई हैं और यह किताबें रावण के पुतले में लगाई गई हैं। प्रशासन में भी इस घटना को लेकर खलबली मच गई थी। पुतला बनाने वाले ठेकेदार से जब पूछताछ की तो उसने यह बताया कि यह रद्दी अलीगढ़ के मदार गेट रफातगंज में एक विक्रेता रमेश चंद्र मोटे लाला के यहां से 30 रुपये किलो के हिसाब से खरीदकर लाया था। हालांकि जिला प्रशासन ने रावण के पुतले के दहन को देखते हुए तत्काल ही इसकी जांच कराई और जांच के बाद इस कागज को सरकारी किताबें मानने से इंकार कर दिया था।
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डीएम का कहना था कि पुतला बनाने में किताबें इस्तेमाल नहीं की गई हैं। जिन कागजों को पुतले में लगाया गया है, वह किताब छापे जाने से पूर्व ट्रायल के लिए चार्ट के रूप में तैयार किए गए पृष्ठ हैं। जिन पर किताबों के पृष्ठों की छपाई मात्र है। मामला चूंकि अलीगढ़ से संबंधित है, इसलिए स्थानीय लोगों की अब इस बात पर टकटकी है कि अलीगढ़ का बेसिक शिक्षा विभाग क्या एक्शन लेगा। वहां के बीएसए ने भी जांच कराने की बात कही थी।
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