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Hathras News: ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं हुमा
Tue, 14 Apr 2026 01:57 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 14 Apr 2026 01:57 AM IST
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सासनी के गांव जलालपुर में महिलाओं को प्रेरित करतीं हुमा। स्रोत : स्वयं
- फोटो : Self
सासनी क्षेत्र के गांव जलालपुर की निवासी हुमा खान ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं। यमुना प्रेरणा संकुल संघ से जुड़कर वह महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं, बल्कि उन्हें शिक्षा के महत्व से भी जोड़ रही हैं।
हुमा महिलाओं को समूह से जुड़ने के फायदे समझाते हुए उन्हें छोटे-छोटे रोजगार शुरू करने, बचत करने और आत्मनिर्भर बनने के तरीके सिखाती हैं। वह महिलाओं को परिवार और समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, साथ ही बच्चों की शिक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए जागरूक करती हैं। एमए और बीएड शिक्षित हुमा खान ने निरक्षर महिलाओं को पढ़ाने का बीड़ा भी उठाया है।
वह गांव की ऐसी महिलाओं को पढ़ना-लिखना सिखा रही हैं, जो पहले अपना नाम तक नहीं लिख पाती थीं। अब कई महिलाएं उनके मार्गदर्शन में पढ़ने-लिखने योग्य बन चुकी हैं। हुमा का कहना है कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही महिलाओं के सशक्तीकरण की असली कुंजी है।
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उनके प्रयासों से गांव की ही नहीं, बल्कि आसपास के मजरों की कई महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अब अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। हुमा की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है और इससे महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
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हुमा महिलाओं को समूह से जुड़ने के फायदे समझाते हुए उन्हें छोटे-छोटे रोजगार शुरू करने, बचत करने और आत्मनिर्भर बनने के तरीके सिखाती हैं। वह महिलाओं को परिवार और समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, साथ ही बच्चों की शिक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए जागरूक करती हैं। एमए और बीएड शिक्षित हुमा खान ने निरक्षर महिलाओं को पढ़ाने का बीड़ा भी उठाया है।
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वह गांव की ऐसी महिलाओं को पढ़ना-लिखना सिखा रही हैं, जो पहले अपना नाम तक नहीं लिख पाती थीं। अब कई महिलाएं उनके मार्गदर्शन में पढ़ने-लिखने योग्य बन चुकी हैं। हुमा का कहना है कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही महिलाओं के सशक्तीकरण की असली कुंजी है।
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उनके प्रयासों से गांव की ही नहीं, बल्कि आसपास के मजरों की कई महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अब अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। हुमा की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है और इससे महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।