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खिलाड़ियांे पर भारी विवि. की लापरवाही
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Mon, 10 Oct 2016 10:46 PM IST
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डॉ. बीआर अंबेडकर विवि की अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिताएं महाविद्यालयों में सिर्फ लापरवाही की भेंट चढ़ गई हैं। तीसरे वर्ष के एडमिशन प्रक्रिया की गति काफी धीमी होने के कारण जहां प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियाें को जुटाने में पसीने छूट रहे हैं तो वहीं खेल प्रतियोगिता के लिए नाम दर्ज करा चुके विद्यार्थियों को नियमित रूप से खेल प्रेक्टिस तक नहीं कराई गई है।
खेल के नाम पर छात्र-छात्राओं से महाविद्यालयों में क्रीड़ा शुल्क तो वसूला जाता है, लेकिन उन्हें खेल सुविधाएं देने में कॉलेज काफी पीछे रह जाते हैं। विश्विद्यालय का खेल कैलेंडर जारी होने के बाद भी महाविद्यालयों में खेल गतिविधियां ठप पड़ी हुई हैं। इसमें लापरवाही सिर्फ कॉलेजों की ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की भी है।
विवि की लापरवाही से ही खेल कैलेंडर देरी से जारी हुआ और दूसरी तरफ अभी तक महाविद्यालय अपने यहां परिणाम जारी नहीं होने से स्नातक और स्नातकोत्तर दूसरे और तीसरे वर्ष के एडमिशन नहीं कर पाए हैं, जिससे महाविद्यालयों को खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाने में पसीने छूट रहे हैं, तो दूसरी तरफ कॉलेजों में खेल प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ी अपने नाम तो दर्ज करा रहे हैं, लेकिन अभी तक कॉलेजों में खेल प्रेक्टिस भी शुरू नहीं कराई गई है, जबकि अंतर्महाविद्यालयीय प्रतियोगिताएं शुरू हो चुकी हैं।
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खेल के नाम पर छात्र-छात्राओं से महाविद्यालयों में क्रीड़ा शुल्क तो वसूला जाता है, लेकिन उन्हें खेल सुविधाएं देने में कॉलेज काफी पीछे रह जाते हैं। विश्विद्यालय का खेल कैलेंडर जारी होने के बाद भी महाविद्यालयों में खेल गतिविधियां ठप पड़ी हुई हैं। इसमें लापरवाही सिर्फ कॉलेजों की ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की भी है।
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विवि की लापरवाही से ही खेल कैलेंडर देरी से जारी हुआ और दूसरी तरफ अभी तक महाविद्यालय अपने यहां परिणाम जारी नहीं होने से स्नातक और स्नातकोत्तर दूसरे और तीसरे वर्ष के एडमिशन नहीं कर पाए हैं, जिससे महाविद्यालयों को खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाने में पसीने छूट रहे हैं, तो दूसरी तरफ कॉलेजों में खेल प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ी अपने नाम तो दर्ज करा रहे हैं, लेकिन अभी तक कॉलेजों में खेल प्रेक्टिस भी शुरू नहीं कराई गई है, जबकि अंतर्महाविद्यालयीय प्रतियोगिताएं शुरू हो चुकी हैं।
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