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हाथरस : पराग डेयरी प्लांट बंद होने के साथ टूटा श्वेत क्रांति का सपना
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हाथरस : पराग डेयरी प्लांट में बेकार पड़ी मशीनरी। संवाद
- फोटो : SASNI
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
क्षेत्र में श्वेत क्रांति लाने के सपने के साथ स्थापित किए गए पराग डेयरी का प्लांट बंद होने से यह सपना चकनाचूर हो गया है। इस प्लांट से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। राजमार्ग के किनारे बने प्लांट का भवन और भूमि बदहाली की शिकार है। प्रशासन ने यहां अस्थायी गोशाला बनाकर इस प्लांट के चालू होने की उम्मीदों को और कमजोर कर दिया है। हालांकि शासन इस प्लांट को चालू कराने का प्रस्ताव मानने से इंकार कर चुका है, इसलिए इसके दोबारा चालू होने की उम्मीद भी लगभग खत्म ही हो गई है, फिर भी किसानों और पशुपालकों को उम्मीद है कि यदि ठोस पैरवी हो जाए तो यह प्लांट चालू हो सकता है।
वर्ष 1992 में आगरा-अलीगढ़ राजमार्ग के किनारे ग्राम पंचायत सठिया, बिजाहरी और अजरोई की करीब 255 बीघा भूमि पर तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने पराग डेयरी के प्लांट का शिलान्यास किया था। इसमें चारदीवारी के अंदर कार्यशाला, चिलिंग प्लांट, गोदाम और कार्यालय बनवाए गए थे। इनमें प्रतिदिन करीब दो लाख लीटर दूध अलीगढ़ और हाथरस के ग्रामीण इलाकों में स्थापित एक हजार सहकारी सघन इकाइयों के माध्यम से एकत्रित होता था। इस दूध से यहां घी, मट्ठा, पैक्ड दूध, मक्खन और पनीर का उत्पादन होता था। उन दिनों बाजार में पराग डेयरी के उत्पादों का भरमार रहती थी, लेकिन अब यह उत्पाद नजर ही नहीं आते। प्लांट बंद होने के बाद करोड़ों रुपये की मशीनरी धूल फांक रही है।
एक समय यह प्लांट दुग्ध उत्पादकों, पशुपालकों एवं एजेंटों के परिवार के अलावा करीब 50 मजदूर, 100 स्थायी कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड और ट्रांसपोर्टरों के भरण पोषण का जरिया था, लेकिन निरंतर घाटे की वजह से 22 अप्रैल 2008 को इस प्लांट को बंद कर दिया गया। यहां के स्थानीय कर्मचारियों को अलीगढ़ प्लांट से संबद्ध कर दिया गया। संवाद
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पराग डेयरी का प्लांट जब खुला था तो स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल था। लोगों को रोजी-रोटी के लिए दूसरे क्षेत्र में नहीं जाना पड़ता था। पराग डेयरी बंद होने से गरीबों की रोजी रोटी छिन गई।
-प्रकाशचंद्र शर्मा, स्थानीय निवासी
श्वेत क्रांति का सपना साकार होने से क्षेत्र में खुशी का माहौल था। यहां के बड़ी संख्या में बेरोजगारों को प्लांट के जरिये रोजी रोटी कमाने का अवसर मिला था, लेकिन प्लांट बंद होने से सबकुछ छिन गया।
-सुधीर अग्रवाल, स्थानीय निवासी
शासन को पुराने की जगह नया प्लांट लगवाने के लिए 2017 में प्रस्ताव भेजा गया था। इस प्लांट को चालू करने के लिए करीब 60 से 70 करोड़ रुपये का खर्चा होना है। प्रस्ताव को अभी मंजूरी नहीं मिली है। कई बार इसे लेकर पत्र व्यवहार किया गया है। एक बार फिर शासन को स्मरण पत्र भेजा जाएगा।
-सुशील कुमार बालियान, महाप्रबंधक पराग डेयरी
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क्षेत्र में श्वेत क्रांति लाने के सपने के साथ स्थापित किए गए पराग डेयरी का प्लांट बंद होने से यह सपना चकनाचूर हो गया है। इस प्लांट से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। राजमार्ग के किनारे बने प्लांट का भवन और भूमि बदहाली की शिकार है। प्रशासन ने यहां अस्थायी गोशाला बनाकर इस प्लांट के चालू होने की उम्मीदों को और कमजोर कर दिया है। हालांकि शासन इस प्लांट को चालू कराने का प्रस्ताव मानने से इंकार कर चुका है, इसलिए इसके दोबारा चालू होने की उम्मीद भी लगभग खत्म ही हो गई है, फिर भी किसानों और पशुपालकों को उम्मीद है कि यदि ठोस पैरवी हो जाए तो यह प्लांट चालू हो सकता है।
वर्ष 1992 में आगरा-अलीगढ़ राजमार्ग के किनारे ग्राम पंचायत सठिया, बिजाहरी और अजरोई की करीब 255 बीघा भूमि पर तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने पराग डेयरी के प्लांट का शिलान्यास किया था। इसमें चारदीवारी के अंदर कार्यशाला, चिलिंग प्लांट, गोदाम और कार्यालय बनवाए गए थे। इनमें प्रतिदिन करीब दो लाख लीटर दूध अलीगढ़ और हाथरस के ग्रामीण इलाकों में स्थापित एक हजार सहकारी सघन इकाइयों के माध्यम से एकत्रित होता था। इस दूध से यहां घी, मट्ठा, पैक्ड दूध, मक्खन और पनीर का उत्पादन होता था। उन दिनों बाजार में पराग डेयरी के उत्पादों का भरमार रहती थी, लेकिन अब यह उत्पाद नजर ही नहीं आते। प्लांट बंद होने के बाद करोड़ों रुपये की मशीनरी धूल फांक रही है।
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एक समय यह प्लांट दुग्ध उत्पादकों, पशुपालकों एवं एजेंटों के परिवार के अलावा करीब 50 मजदूर, 100 स्थायी कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड और ट्रांसपोर्टरों के भरण पोषण का जरिया था, लेकिन निरंतर घाटे की वजह से 22 अप्रैल 2008 को इस प्लांट को बंद कर दिया गया। यहां के स्थानीय कर्मचारियों को अलीगढ़ प्लांट से संबद्ध कर दिया गया। संवाद
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पराग डेयरी का प्लांट जब खुला था तो स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल था। लोगों को रोजी-रोटी के लिए दूसरे क्षेत्र में नहीं जाना पड़ता था। पराग डेयरी बंद होने से गरीबों की रोजी रोटी छिन गई।
-प्रकाशचंद्र शर्मा, स्थानीय निवासी
श्वेत क्रांति का सपना साकार होने से क्षेत्र में खुशी का माहौल था। यहां के बड़ी संख्या में बेरोजगारों को प्लांट के जरिये रोजी रोटी कमाने का अवसर मिला था, लेकिन प्लांट बंद होने से सबकुछ छिन गया।
-सुधीर अग्रवाल, स्थानीय निवासी
शासन को पुराने की जगह नया प्लांट लगवाने के लिए 2017 में प्रस्ताव भेजा गया था। इस प्लांट को चालू करने के लिए करीब 60 से 70 करोड़ रुपये का खर्चा होना है। प्रस्ताव को अभी मंजूरी नहीं मिली है। कई बार इसे लेकर पत्र व्यवहार किया गया है। एक बार फिर शासन को स्मरण पत्र भेजा जाएगा।
-सुशील कुमार बालियान, महाप्रबंधक पराग डेयरी