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हाथरस : क्रय केद्रों पर फेल हो रहा गेहूं आढ़तियों के यहां बिक रहा
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हाथरस : मंडी समिति में आढ़तिये के यहां पड़ा गेहूं।
- फोटो : HATHRAS
गौरव भारद्वाज
हाथरस। मौसम की मार का असर गेहूं की फसल पर अब नजर आ रहा है। किसान का गेहूं सरकार क्रय केंद्रों पर मानकाें पर खरा नहीं उतर पा रहा है। क्रय केंद्रों पर इस गेहूं को गुणवत्ता के विपरीत बताकर फेल किया जा रहा है। किसान इस गेहूं को मजबूरी में आढ़तियों के यहां 1,700 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल में बेचने को मजबूर हैं, जबकि क्रय केंद्रों पर इस गेहूं का दाम 1,975 रुपये रखा गया है। मतलब, किसान को नुकसान पर यह गेहूं बेचना पड़ रहा है, जिससे उनके माथे पर चिंता के बल गहरा गए हैं।
जिले में बड़े पैमाने पर गेहूं की पैदावार होती है। फरवरी माह में अंत में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल पर बुरा असर पड़ा था। जिले में कई जगहों पर गेहूं की फसल बुरी तरह बिछ गई थी। गर्मी के कारण गेहूं का दाना बढ़ नहीं पाया और यह पतला रह गया। अब यही गेहूं सरकारी क्रय केंद्रों के मानक पर फेल हो रहा है। यही वजह है कि क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद रफ्तार भी नहीं पकड़ पा रही है। अभी तक जिले के 53 क्रय केंद्रों पर मात्र पांच हजार क्विंटल ही गेहूं खरीदा जा सका है। हालांकि पंचायत चुनाव के बाद अधिकारी गेहूं की खरीद में तेजी आने की बात कह रह हैं। क्रय केंद्रों के प्रभारी भी मान रहे हैं कि मौसम की मार से गेहूं का दाना पूरी तरह परिपक्व नहीं हो पाया है, जिससे खरीद में मुश्किल हो रही है।
आढ़तियों के यहां गेहूं बेचकर चला रहे काम
वर्तमान में मंडी में गेहूं की आवक सही हो रही है। क्रय केंद्रों पर गेहूं का दाम 1,975 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। मंडी में आढ़तों पर 1,700 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं की बिक्री हो रही है। क्रय केंद्रों पर गेहूं मानक में फेल हो रहा है। इस कारण अन्नदाता आढ़तों पर गेहूं बेचकर अपना काम चला रहे हैं। हालांकि आढ़तियों द्वारा किसानों से गेहूं को क्रय केंद्र पर लेकर जाने के लिए कहा भी जाता है, लेकिन वह मानक की वजह से वहीं रुक जाता है।
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गेहूं बेचने के बाद कट न जाएं पैसे
जिले के अधिकांश अन्नदाता ने अपनी दिनचर्या को सामान्य रूप से चलाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) व अन्य माध्यमों से कर्ज ले रखा है। केंद्र पर गेहूं बेचने के दौरान उनको पंजीकरण कराना होगा। जैसे ही उनके खाते में गेहूं की धनराशि आएगी तो किसानों को डर है कि कहीं उनके खाते से कर्ज में ली गई धनराशि कट न जाए और उन्हें अपनी जरूरत के लिए पैसा ही न मिल पाए। इस कारण भी किसान क्रय केंद्रों का गेहूं बेचने से बच रहे हैं।
गेहूं का दाना है पतला
क्रय केंद्र पर पहुंचने वाले गेहूं का दाना मोटा हो। गेहूं में धूल मिट्टी न हो। नमी की मात्रा ज्यादा न हो। दाना भी काला नहीं होना चाहिए। जिले में पैदा हुए अधिकांश गेहूं का दाना पतला है। इस बार गर्मी अधिक होने के कारण गेहूं की कटाई भी जल्दी हो गई है। इस कारण दाना मोटा नहीं है, इसलिए गुणवत्ता प्रभावित होने से किसान गेहूं को आढ़तों पर बेच रहे हैं।
बीते महीनों में मौसम खराब रहा। इस कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित है। केंद्र पर मोटे दाने का गेहूं लिया जा रहा है। इस बार गेहूं का दाना पतला है। उनके द्वारा किसानों से क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए कहा भी जा रहा है। वहां गेहूं मानक पर खरा नहीं उतर पा रहा है। जिन किसानों का गेहूं मानक पर खरा नहीं उतर पा रहा है, वह आढ़तों पर गेहूं को बेच रहे हैं।
-राजेश वार्ष्णेय, आढ़तिया
बीते महीनों में मौसम की मार से गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। गेहूं का दाना पिछले साल की अपेक्षा हल्का है। इस बार क्रय केंद्र पर गेहूं का रेट सही है तो यह मानक पर खरा नहीं उतर पा रहा है। क्रय केंद्र पर पास न होने के कारण हमें भी नुकसान हो रहा है। फसल के हिसाब से गेहूं के मानक तय किए जाएं।
-बुद्धसेन, किसान
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हाथरस। मौसम की मार का असर गेहूं की फसल पर अब नजर आ रहा है। किसान का गेहूं सरकार क्रय केंद्रों पर मानकाें पर खरा नहीं उतर पा रहा है। क्रय केंद्रों पर इस गेहूं को गुणवत्ता के विपरीत बताकर फेल किया जा रहा है। किसान इस गेहूं को मजबूरी में आढ़तियों के यहां 1,700 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल में बेचने को मजबूर हैं, जबकि क्रय केंद्रों पर इस गेहूं का दाम 1,975 रुपये रखा गया है। मतलब, किसान को नुकसान पर यह गेहूं बेचना पड़ रहा है, जिससे उनके माथे पर चिंता के बल गहरा गए हैं।
जिले में बड़े पैमाने पर गेहूं की पैदावार होती है। फरवरी माह में अंत में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल पर बुरा असर पड़ा था। जिले में कई जगहों पर गेहूं की फसल बुरी तरह बिछ गई थी। गर्मी के कारण गेहूं का दाना बढ़ नहीं पाया और यह पतला रह गया। अब यही गेहूं सरकारी क्रय केंद्रों के मानक पर फेल हो रहा है। यही वजह है कि क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद रफ्तार भी नहीं पकड़ पा रही है। अभी तक जिले के 53 क्रय केंद्रों पर मात्र पांच हजार क्विंटल ही गेहूं खरीदा जा सका है। हालांकि पंचायत चुनाव के बाद अधिकारी गेहूं की खरीद में तेजी आने की बात कह रह हैं। क्रय केंद्रों के प्रभारी भी मान रहे हैं कि मौसम की मार से गेहूं का दाना पूरी तरह परिपक्व नहीं हो पाया है, जिससे खरीद में मुश्किल हो रही है।
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आढ़तियों के यहां गेहूं बेचकर चला रहे काम
वर्तमान में मंडी में गेहूं की आवक सही हो रही है। क्रय केंद्रों पर गेहूं का दाम 1,975 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। मंडी में आढ़तों पर 1,700 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं की बिक्री हो रही है। क्रय केंद्रों पर गेहूं मानक में फेल हो रहा है। इस कारण अन्नदाता आढ़तों पर गेहूं बेचकर अपना काम चला रहे हैं। हालांकि आढ़तियों द्वारा किसानों से गेहूं को क्रय केंद्र पर लेकर जाने के लिए कहा भी जाता है, लेकिन वह मानक की वजह से वहीं रुक जाता है।
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गेहूं बेचने के बाद कट न जाएं पैसे
जिले के अधिकांश अन्नदाता ने अपनी दिनचर्या को सामान्य रूप से चलाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) व अन्य माध्यमों से कर्ज ले रखा है। केंद्र पर गेहूं बेचने के दौरान उनको पंजीकरण कराना होगा। जैसे ही उनके खाते में गेहूं की धनराशि आएगी तो किसानों को डर है कि कहीं उनके खाते से कर्ज में ली गई धनराशि कट न जाए और उन्हें अपनी जरूरत के लिए पैसा ही न मिल पाए। इस कारण भी किसान क्रय केंद्रों का गेहूं बेचने से बच रहे हैं।
गेहूं का दाना है पतला
क्रय केंद्र पर पहुंचने वाले गेहूं का दाना मोटा हो। गेहूं में धूल मिट्टी न हो। नमी की मात्रा ज्यादा न हो। दाना भी काला नहीं होना चाहिए। जिले में पैदा हुए अधिकांश गेहूं का दाना पतला है। इस बार गर्मी अधिक होने के कारण गेहूं की कटाई भी जल्दी हो गई है। इस कारण दाना मोटा नहीं है, इसलिए गुणवत्ता प्रभावित होने से किसान गेहूं को आढ़तों पर बेच रहे हैं।
बीते महीनों में मौसम खराब रहा। इस कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित है। केंद्र पर मोटे दाने का गेहूं लिया जा रहा है। इस बार गेहूं का दाना पतला है। उनके द्वारा किसानों से क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए कहा भी जा रहा है। वहां गेहूं मानक पर खरा नहीं उतर पा रहा है। जिन किसानों का गेहूं मानक पर खरा नहीं उतर पा रहा है, वह आढ़तों पर गेहूं को बेच रहे हैं।
-राजेश वार्ष्णेय, आढ़तिया
बीते महीनों में मौसम की मार से गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। गेहूं का दाना पिछले साल की अपेक्षा हल्का है। इस बार क्रय केंद्र पर गेहूं का रेट सही है तो यह मानक पर खरा नहीं उतर पा रहा है। क्रय केंद्र पर पास न होने के कारण हमें भी नुकसान हो रहा है। फसल के हिसाब से गेहूं के मानक तय किए जाएं।
-बुद्धसेन, किसान