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हाथरस : मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए दुग्ध विभाग से एनओसी का इंतजार
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सासनी के निकट पराग डेयरी में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनने के मामले में अभी दुग्ध विकास विभाग का रोड़ा अटका हुआ है। प्रशासन की ओर से दुग्ध विकास विभाग की भूमि को लेने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा गया है। संबंधित विभाग की ओर से शासन से अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए पत्राचार किया गया है। दुग्ध विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी होने के बाद ही इस परिसर में मेडिकल कॉलेज निर्माण की कार्यवाही शुरू हो सकेगी। हालांकि जिले में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के लिए शासन की ओर से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।
शासन की ओर से विगत में जिले में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज निर्माण किए जाने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा के बाद यहां जिले वासियों में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर होने को लेकर आगे जिला प्रशासन की ओर से मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए भूमि के चयन प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन की ओर से शासन को नगर पालिका की सीवेज फॉर्म की भूमि व सासनी स्थित पराग डेयरी की भूमिका प्रस्ताव भेजा गया।
इसके सापेक्ष शासन की ओर से सासनी स्थित पराग डेयरी की भूमि का चयन करते हुए मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। पराग डेयरी में मेडिकल कॉलेज निर्माण में अब अटकलें सामने आई हैं। प्रशासन की ओर से दुग्ध विकास विभाग को अनापत्ति प्रमाण पत्र देने को निर्देश दिए गए हैं। इस क्रम में संबंधित विभाग की ओर से अपने उच्चाधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पत्राचार किया गया है। अब दुग्ध विभाग की ओर से अनापत्ति जारी होने के बाद ही मेडिकल कॉलेज निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
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दुग्ध विभाग से एनओसी मिलने का इंतजार है। एनओसी मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज निर्माण संबंधी प्रक्रिया आगे की जाएगी।
-अर्चना वर्मा, डीएम
मेडिकल कॉलेज बनने स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने की उम्मीद
हाथरस। जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं लचर हैं। ऐसे में जिले के लोगों को मेडिकल कॉलेज की लंबे समय से दरकार है। जिले में जिला व महिला अस्पताल है, लेकिन यहां चिकित्सकों व संसाधनों का अभाव है। ऐसे में यहां का जिला स्तरीय अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है। मरीजों को उनके तीमारदार अलीगढ़ या आगरा ले जाने को मजबूर हो जाते हैं। लंबे समय से यहां के लोगों को मेडिकल कॉलेज बनने का इंतजार है। तीन साल पहले इसकी घोषणा भी हो चुकी थी, लेकिन कोरोना काल के बाद इस पर अमल नहीं हुआ। अब शासन ने पीपीपी मॉडल पर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया शुरू की है तो यहां के लोगों को आस है कि जिले की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरेंगी। संवाद
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सासनी के निकट पराग डेयरी में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनने के मामले में अभी दुग्ध विकास विभाग का रोड़ा अटका हुआ है। प्रशासन की ओर से दुग्ध विकास विभाग की भूमि को लेने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा गया है। संबंधित विभाग की ओर से शासन से अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए पत्राचार किया गया है। दुग्ध विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी होने के बाद ही इस परिसर में मेडिकल कॉलेज निर्माण की कार्यवाही शुरू हो सकेगी। हालांकि जिले में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के लिए शासन की ओर से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।
शासन की ओर से विगत में जिले में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज निर्माण किए जाने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा के बाद यहां जिले वासियों में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर होने को लेकर आगे जिला प्रशासन की ओर से मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए भूमि के चयन प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन की ओर से शासन को नगर पालिका की सीवेज फॉर्म की भूमि व सासनी स्थित पराग डेयरी की भूमिका प्रस्ताव भेजा गया।
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इसके सापेक्ष शासन की ओर से सासनी स्थित पराग डेयरी की भूमि का चयन करते हुए मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। पराग डेयरी में मेडिकल कॉलेज निर्माण में अब अटकलें सामने आई हैं। प्रशासन की ओर से दुग्ध विकास विभाग को अनापत्ति प्रमाण पत्र देने को निर्देश दिए गए हैं। इस क्रम में संबंधित विभाग की ओर से अपने उच्चाधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पत्राचार किया गया है। अब दुग्ध विभाग की ओर से अनापत्ति जारी होने के बाद ही मेडिकल कॉलेज निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
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दुग्ध विभाग से एनओसी मिलने का इंतजार है। एनओसी मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज निर्माण संबंधी प्रक्रिया आगे की जाएगी।
-अर्चना वर्मा, डीएम
मेडिकल कॉलेज बनने स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने की उम्मीद
हाथरस। जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं लचर हैं। ऐसे में जिले के लोगों को मेडिकल कॉलेज की लंबे समय से दरकार है। जिले में जिला व महिला अस्पताल है, लेकिन यहां चिकित्सकों व संसाधनों का अभाव है। ऐसे में यहां का जिला स्तरीय अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है। मरीजों को उनके तीमारदार अलीगढ़ या आगरा ले जाने को मजबूर हो जाते हैं। लंबे समय से यहां के लोगों को मेडिकल कॉलेज बनने का इंतजार है। तीन साल पहले इसकी घोषणा भी हो चुकी थी, लेकिन कोरोना काल के बाद इस पर अमल नहीं हुआ। अब शासन ने पीपीपी मॉडल पर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया शुरू की है तो यहां के लोगों को आस है कि जिले की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरेंगी। संवाद