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हाथरस : पोलैंड तक बस से पहुंचने की कर रहा हूं कोशिश, वहां से लौटूंगा अपने वतन
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हाथरस : आलोक चौधरी। संवाद
- फोटो : SHAPHU
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले के भी कई विद्यार्थी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उनके परिजन काफी चिंतित हैं और यूक्रेन में फंसे विद्यार्थी वहां से वतन आने के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। सादाबाद कस्बे में सलेमपुर रोड निवासी राजेंद्र चौधरी के बेटे आलोक चौधरी यूक्रेन में टार्निपिल शहर की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के तीसरे वर्ष के छात्र हैं।
वीडियोकॉल पर हुई बातचीत में खुद आलोक चौधरी ने दोपहर चार बजे के करीब बताया कि वह अभी टार्निपिल शहर में ही फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनके काफी सीनियर पोलैंड की सीमा तक बस के जरिये रवाना हो गए हैं। ऐसे में वह भी इसी कोशिश में हैं कि पोलैंड सीमा तक वह बस से पहुंच जाएं और उसके बाद वह दूसरे रास्ते से भारत आ जाएं।
उन्होंने कहा कि अभी तक भारतीय दूतावास की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिली है। परिजनों से लगातार उनका संपर्क हो रहा है। आलोक ने बताया कि वैसे उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही वह भी बस के जरिये ही पोलैंड की सीमा तक पहुंच जाएंगे। फिर उन्हें भारतीय दूतावास से मदद मिल जाएगी। आलोक का कहना था कि हालांकि यूक्रेन में युद्ध छिड़ा हुआ है, लेकिन टर्निपिल में अभी हालात बहुत ज्यादा गंभीर नहीं हैं। संवाद
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जिले के भी कई विद्यार्थी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उनके परिजन काफी चिंतित हैं और यूक्रेन में फंसे विद्यार्थी वहां से वतन आने के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। सादाबाद कस्बे में सलेमपुर रोड निवासी राजेंद्र चौधरी के बेटे आलोक चौधरी यूक्रेन में टार्निपिल शहर की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के तीसरे वर्ष के छात्र हैं।
वीडियोकॉल पर हुई बातचीत में खुद आलोक चौधरी ने दोपहर चार बजे के करीब बताया कि वह अभी टार्निपिल शहर में ही फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनके काफी सीनियर पोलैंड की सीमा तक बस के जरिये रवाना हो गए हैं। ऐसे में वह भी इसी कोशिश में हैं कि पोलैंड सीमा तक वह बस से पहुंच जाएं और उसके बाद वह दूसरे रास्ते से भारत आ जाएं।
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उन्होंने कहा कि अभी तक भारतीय दूतावास की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिली है। परिजनों से लगातार उनका संपर्क हो रहा है। आलोक ने बताया कि वैसे उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही वह भी बस के जरिये ही पोलैंड की सीमा तक पहुंच जाएंगे। फिर उन्हें भारतीय दूतावास से मदद मिल जाएगी। आलोक का कहना था कि हालांकि यूक्रेन में युद्ध छिड़ा हुआ है, लेकिन टर्निपिल में अभी हालात बहुत ज्यादा गंभीर नहीं हैं। संवाद
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