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हाथरस : क्रय केंद्रों से भी महंगे दामों में गेहूं खरीद रहे व्यापारी
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से एशियाई देशों में गेहूं की किल्लत होने लगी है। इसे देखते हुए जिले के बडे़ कारोबारी गेहूं निर्यात करने की तैयारी में जुटे हुए हैं। कारोबारी क्रय केंद्रों पर मिल रहे दामों से अधिक दाम देकर गेहूं खरीद रहे हैं। साथ ही वे किसानों को हाथों-हाथ भुगतान भी कर रहे हैं। इस वजह से क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद में काफी कमी आ गई है।
उल्लेखनीय है कि रूस और यूक्रेन गेहूं उत्पादन के बड़े देश हैं। इन दिनों इन दोनों देशो के बीच युद्ध चल रहा है। इस कारण एशियाई देशों में गेहूं की कमी हो गई है। इसका फायदा देश के कारोबारी उठाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। आढ़तियां ढाई हजार रुपये क्विंटल तक गेहूं खरीद रहे हैं।
वहीं, क्रय केंद्रों पर दो हजार पंद्रह रुपये के दर से गेहूं की खरीद हो रही है। आढ़तियां गेहूं का स्टॉक करने के लिए दो हजार पचास रुपये प्रति कुंतल तक खरीद रहे हैं। साथ ही किसानों को भुगतान भी हाथों हाथ आढ़तियों द्वारा किया जा रहा है।
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इस कारण ज्यादातर किसान आढ़तियों को गेहूं बेच रहे हैं। क्रय केंद्रों पर कुछ ही किसान गेहूं लेकर आ रहे हैं। किसानों को जागरूक करने के लिए केंद्र प्रभारी व अधिकारी लगातार संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद पर्याप्त गेहूं नहीं आ पा रहा है। इसे लेकर केंद्र प्रभारी खासे परेशान है। अभी तक सिर्फ दस प्रतिशत गेहूं की ही खरीद हो सकी है।
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रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से एशियाई देशों में गेहूं की किल्लत होने लगी है। इसे देखते हुए जिले के बडे़ कारोबारी गेहूं निर्यात करने की तैयारी में जुटे हुए हैं। कारोबारी क्रय केंद्रों पर मिल रहे दामों से अधिक दाम देकर गेहूं खरीद रहे हैं। साथ ही वे किसानों को हाथों-हाथ भुगतान भी कर रहे हैं। इस वजह से क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद में काफी कमी आ गई है।
उल्लेखनीय है कि रूस और यूक्रेन गेहूं उत्पादन के बड़े देश हैं। इन दिनों इन दोनों देशो के बीच युद्ध चल रहा है। इस कारण एशियाई देशों में गेहूं की कमी हो गई है। इसका फायदा देश के कारोबारी उठाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। आढ़तियां ढाई हजार रुपये क्विंटल तक गेहूं खरीद रहे हैं।
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वहीं, क्रय केंद्रों पर दो हजार पंद्रह रुपये के दर से गेहूं की खरीद हो रही है। आढ़तियां गेहूं का स्टॉक करने के लिए दो हजार पचास रुपये प्रति कुंतल तक खरीद रहे हैं। साथ ही किसानों को भुगतान भी हाथों हाथ आढ़तियों द्वारा किया जा रहा है।
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इस कारण ज्यादातर किसान आढ़तियों को गेहूं बेच रहे हैं। क्रय केंद्रों पर कुछ ही किसान गेहूं लेकर आ रहे हैं। किसानों को जागरूक करने के लिए केंद्र प्रभारी व अधिकारी लगातार संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद पर्याप्त गेहूं नहीं आ पा रहा है। इसे लेकर केंद्र प्रभारी खासे परेशान है। अभी तक सिर्फ दस प्रतिशत गेहूं की ही खरीद हो सकी है।