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हाथरस : आज खत्म हो जाएगा पालिका बोर्ड का कार्यकाल
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हाथरस : जीर्णोद्धार के बाद शहर का घंटाघर। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
नगर पालिका परिषद के वर्तमान अध्यक्ष और बोर्ड का शुक्रवार को कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। पिछले पांच साल में शहर में सौंदर्यीकरण के जहां कई कार्य हुए तो रात्रि में सफाई अभियान भी चला। कई कार्यों की शुरुआत तो हुई, लेकिन यह काम बीच में ही अटक गए। इस बोर्ड के कार्यकाल के दौरान शहर की सीमा वृद्धि भी हुई, लेकिन बजट के अभाव में सीमा वृद्धि में शामिल हुए इलाकों में विकास कार्य नहीं हो सके। कुछ कार्यों पर उंगली भी उठी और इनकी जांच भी हुई। नगर पालिका के कुछ सभासद पालिकाध्यक्ष के खिलाफ मुखर भी हुए और एक माह से ज्यादा समय तक धरने पर भी बैठे रहे।
ज्यादातर चौराहों का हुआ सौंदर्यीकरण, घंटाघर का हुआ जीर्णोद्धार
हाथरस। नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा व पालिका के 27 सभासदों ने पांच साल पहले छह जनवरी को शपथ ली थी। अब पांच साल बाद इस बोर्ड का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो जाएगा। इस पांच साल की अवधि में नगर पालिका परिषद द्वारा कराए गए कार्यों का आंकलन करें तो सफाई व्यवस्था पर ज्यादा जोर रहा। दिन के अलावा रात्रि में भी नियमित सफाई अभियान चला। इसके अलावा शहर में सौंदर्यीकरण के काम भी जमकर हुए। शहर के ज्यादातर चौराहों व पार्कों का सौंदर्यीकरण इस बोर्ड के कार्यकाल में कराया गया। शहर के घंटाघर का जीर्णोद्धार कराया गया। अलीगढ़ रोड स्थित गांधी पार्क तिराहे का भी सौंदर्यीकरण हुआ और इसे स्वच्छता चौक का नाम दिया गया।
शहीद भगत सिंह पार्क का भी हुआ सौंदर्यीकरण
इसी प्रकार आगरा रोड पर शहीद भगत सिंह पार्क का भी सौंदर्यीकरण का काम हुआ। वहां 151 फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया गया। शहर के ज्यादातर चौराहों के सौंदर्यीकरण के काम हुए और देवी- देवताओं व महापुरुषों के नाम पर उनका नामकरण भी किया गया। नगर पालिका प्रशासन ने सड़क किनारों के फुटपाथ भी दुरुस्त कराए। कई गलियों व सड़कों का निर्माण कार्य भी हुआ। शौचालयों के निर्माण हुए। नगर पालिका के सीवेज फॉर्म के बाहर मार्केट भी बना और इसमें दुकानों का आवंटन भी हुआ। कई सीवर पंपिंग स्टेशनों पर भी काम हुआ। वहीं इस बोर्ड के कार्यकाल के दौरान जल निगम ने अमृत योजना के तहत पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन तो बिछाई, लेकिन इससे शहर की सड़कों की दशा बिगड़ गई।
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तालाब का सौंदर्यीकरण नहीं हुआ पूरा, कूड़ा निस्तारण प्लांट अटका
इस बोर्ड के कार्यकाल के दौरान कई काम शुरू तो हुए, लेकिन यह पूरे नहीं हुए। इसमें शहर के बीचों-बीच तालाब के सौंदर्यीकरण का काम शुरू तो हुआ, लेकिन पूरा नहीं हो सका। यह अभी अटका हुआ है। कई वार्डों में बरातघर का निर्माण पूरा नहीं हुआ। नगर पालिका परिसर में नगर सेवा सदन के निर्माण की योजना बनी और इस पर अमल भी शुरू हुआ, लेकिन यह बीच में ही अटक गई। शहर का कूड़ा नगर पालिका के जलेसर रोड स्थित सीवेज फॉर्म पर एकत्रित होता है। यहां कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट लगाया गया, लेकिन अभी यह प्लांट शुरू नहीं हुआ। शहर के कई इलाकों में गंदगी व जलभराव की समस्या दूर नहीं हुई। इसकी वजह से लोग परेशान रहे। कुछ और काम भी अभी पूरे नहीं हुए। कुछ अभी निर्माणाधीन हैं।
शहर के विस्तारित इलाकों में बजट के अभाव में रुका विकास
नगर पालिका की सीमा का विस्तार इस बोर्ड के कार्यकाल में पहली बार हुआ। वर्ष 2019 में हाथरस शहर से सटी 11 ग्राम पंचायतों को शहरी सीमा में शामिल कर लिया गया। इससे शहर की आबादी बढ़ गई और क्षेत्रफल भी, लेकिन इस दौरान कोरोना ने दस्तक दे दी। ऐसे में शहर की सीमा में शामिल हुए नए इलाकों में विकास कार्य नहीं हुए। दो साल तक इनके लिए बजट नहीं मिला। ऐसे में यह विस्तारित इलाके विकास से वंचित रहे। पिछले वर्ष अगस्त माह में मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना में दो करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित हुई है। इसके तहत काम स्वीकृत हुए हैं।
कुछ कामों को लेकर हुई शिकायतें, जांच की आई आंच
वहीं पांच साल की अवधि में कराए गए कुछ कामों पर जांच की आंच भी आई। इन्हें लेकर शिकायतें की गईं। तालाब के सौंदर्यीकरण के अलावा ठंडे पानी की आपूर्ति और आउटसोर्सिंग पर ज्यादा कर्मचारी रखने संबंधी में शिकायतें शासन तक पहुंचीं। नगर पालिकाध्यक्ष के खिलाफ की गई इन शिकायतों की जांच भी गई। जांच के बाद पालिकाध्यक्ष को आरोप पत्र भी दिया गया और जवाब मांगा गया। इसके अलावा अन्य आरोप भी सुर्खियों में रहे। नगर पालिका के ही सभासदों का एक गुट एक माह से ज्यादा समय तक एक बरातघर को पूरा निर्माण कराने जैसी कई मांगों को लेकर नगर पालिका में धरने पर बैठा रहा। बाद में भाजपा आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद सभासद धरने से उठे। संवाद
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नगर पालिका परिषद के वर्तमान अध्यक्ष और बोर्ड का शुक्रवार को कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। पिछले पांच साल में शहर में सौंदर्यीकरण के जहां कई कार्य हुए तो रात्रि में सफाई अभियान भी चला। कई कार्यों की शुरुआत तो हुई, लेकिन यह काम बीच में ही अटक गए। इस बोर्ड के कार्यकाल के दौरान शहर की सीमा वृद्धि भी हुई, लेकिन बजट के अभाव में सीमा वृद्धि में शामिल हुए इलाकों में विकास कार्य नहीं हो सके। कुछ कार्यों पर उंगली भी उठी और इनकी जांच भी हुई। नगर पालिका के कुछ सभासद पालिकाध्यक्ष के खिलाफ मुखर भी हुए और एक माह से ज्यादा समय तक धरने पर भी बैठे रहे।
ज्यादातर चौराहों का हुआ सौंदर्यीकरण, घंटाघर का हुआ जीर्णोद्धार
हाथरस। नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा व पालिका के 27 सभासदों ने पांच साल पहले छह जनवरी को शपथ ली थी। अब पांच साल बाद इस बोर्ड का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो जाएगा। इस पांच साल की अवधि में नगर पालिका परिषद द्वारा कराए गए कार्यों का आंकलन करें तो सफाई व्यवस्था पर ज्यादा जोर रहा। दिन के अलावा रात्रि में भी नियमित सफाई अभियान चला। इसके अलावा शहर में सौंदर्यीकरण के काम भी जमकर हुए। शहर के ज्यादातर चौराहों व पार्कों का सौंदर्यीकरण इस बोर्ड के कार्यकाल में कराया गया। शहर के घंटाघर का जीर्णोद्धार कराया गया। अलीगढ़ रोड स्थित गांधी पार्क तिराहे का भी सौंदर्यीकरण हुआ और इसे स्वच्छता चौक का नाम दिया गया।
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शहीद भगत सिंह पार्क का भी हुआ सौंदर्यीकरण
इसी प्रकार आगरा रोड पर शहीद भगत सिंह पार्क का भी सौंदर्यीकरण का काम हुआ। वहां 151 फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया गया। शहर के ज्यादातर चौराहों के सौंदर्यीकरण के काम हुए और देवी- देवताओं व महापुरुषों के नाम पर उनका नामकरण भी किया गया। नगर पालिका प्रशासन ने सड़क किनारों के फुटपाथ भी दुरुस्त कराए। कई गलियों व सड़कों का निर्माण कार्य भी हुआ। शौचालयों के निर्माण हुए। नगर पालिका के सीवेज फॉर्म के बाहर मार्केट भी बना और इसमें दुकानों का आवंटन भी हुआ। कई सीवर पंपिंग स्टेशनों पर भी काम हुआ। वहीं इस बोर्ड के कार्यकाल के दौरान जल निगम ने अमृत योजना के तहत पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन तो बिछाई, लेकिन इससे शहर की सड़कों की दशा बिगड़ गई।
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तालाब का सौंदर्यीकरण नहीं हुआ पूरा, कूड़ा निस्तारण प्लांट अटका
इस बोर्ड के कार्यकाल के दौरान कई काम शुरू तो हुए, लेकिन यह पूरे नहीं हुए। इसमें शहर के बीचों-बीच तालाब के सौंदर्यीकरण का काम शुरू तो हुआ, लेकिन पूरा नहीं हो सका। यह अभी अटका हुआ है। कई वार्डों में बरातघर का निर्माण पूरा नहीं हुआ। नगर पालिका परिसर में नगर सेवा सदन के निर्माण की योजना बनी और इस पर अमल भी शुरू हुआ, लेकिन यह बीच में ही अटक गई। शहर का कूड़ा नगर पालिका के जलेसर रोड स्थित सीवेज फॉर्म पर एकत्रित होता है। यहां कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट लगाया गया, लेकिन अभी यह प्लांट शुरू नहीं हुआ। शहर के कई इलाकों में गंदगी व जलभराव की समस्या दूर नहीं हुई। इसकी वजह से लोग परेशान रहे। कुछ और काम भी अभी पूरे नहीं हुए। कुछ अभी निर्माणाधीन हैं।
शहर के विस्तारित इलाकों में बजट के अभाव में रुका विकास
नगर पालिका की सीमा का विस्तार इस बोर्ड के कार्यकाल में पहली बार हुआ। वर्ष 2019 में हाथरस शहर से सटी 11 ग्राम पंचायतों को शहरी सीमा में शामिल कर लिया गया। इससे शहर की आबादी बढ़ गई और क्षेत्रफल भी, लेकिन इस दौरान कोरोना ने दस्तक दे दी। ऐसे में शहर की सीमा में शामिल हुए नए इलाकों में विकास कार्य नहीं हुए। दो साल तक इनके लिए बजट नहीं मिला। ऐसे में यह विस्तारित इलाके विकास से वंचित रहे। पिछले वर्ष अगस्त माह में मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना में दो करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित हुई है। इसके तहत काम स्वीकृत हुए हैं।
कुछ कामों को लेकर हुई शिकायतें, जांच की आई आंच
वहीं पांच साल की अवधि में कराए गए कुछ कामों पर जांच की आंच भी आई। इन्हें लेकर शिकायतें की गईं। तालाब के सौंदर्यीकरण के अलावा ठंडे पानी की आपूर्ति और आउटसोर्सिंग पर ज्यादा कर्मचारी रखने संबंधी में शिकायतें शासन तक पहुंचीं। नगर पालिकाध्यक्ष के खिलाफ की गई इन शिकायतों की जांच भी गई। जांच के बाद पालिकाध्यक्ष को आरोप पत्र भी दिया गया और जवाब मांगा गया। इसके अलावा अन्य आरोप भी सुर्खियों में रहे। नगर पालिका के ही सभासदों का एक गुट एक माह से ज्यादा समय तक एक बरातघर को पूरा निर्माण कराने जैसी कई मांगों को लेकर नगर पालिका में धरने पर बैठा रहा। बाद में भाजपा आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद सभासद धरने से उठे। संवाद