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हाथरस : हाथरस वालों ने भी विशेष दवा खाकर लड़ी कोरोना से जंग
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना काल में बुखार को रोकने के लिए एक विशेष कंपनी की गोली की जबर्दस्त बिक्री हुई। इसे बनाने वाली कंपनी फिर चर्चा में है।
इसकी वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की गई और यह दावा किया गया कि इसे बनाने वाली कंपनी ने चिकित्सकों को एक हजार करोड़ से ज्यादा के उपहार दिए गए थे, ताकि वह इस गोली को ज्यादा से ज्यादा लिखें। इसकी बाजार में बंपर बिक्री हुई थी।
हालांकि बुखार के इलाज के लिए अन्य दवाएं भी काफी प्रयोग में आती हैं, लेकिन क्या कारण रहा कि कोरोना काल में सबसे ज्यादा यही गोली बिकी। क्या सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर किए जा रहे दावे सही हैं। इसे लेकर यहां के चिकित्सक और दवा विक्रेताओं की अलग-अलग राय है।
कोई अच्छा चिकित्सक सौदेबाजी नहीं करता। उसके लिए यह जरूरी है कि मरीज जल्द से जल्द स्वस्थ हो। रही बात इस कंपनी विशेष की दवा की तो यह इसने बुखार पर काबू पाया। इसका अच्छा परिणाम मिला। वैसे किसी दवा की अत्यधिक बिक्री हो रही है तो इसमें केवल चिकित्सक ही कड़ी नहीं है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अन्य कर्मी, केमिस्ट की वजह से भी दवाओं की ज्यादा बिक्री होती है। चिकित्सक तो शुरू में दवा लिखते हैं, लेकिन उसके बाद जब उसका प्रचलन बढ़ जाता है तो उसकी अपने आप की बिक्री होने लगती है।
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-डॉ. आरपी सिंह, अध्यक्ष इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, हाथरस व पूर्व सीएमओ।
यह दवा इसलिए कोरोना काल में सबसे ज्यादा बिकी थी, क्योंकि इसकी हर जगह उपलब्धता थी। गांव के छोटे-छोटे विक्रेताओं पर भी यह दवा मिल जाती थी। कीमत भी ज्यादा नहीं थी। गोली बुखार के रोगियों के लिए लाभप्रद साबित हो रही थी। इसके अलावा इसका नाम भी आसान था। लोगों को आसानी के याद हो गया था। अन्य कंपनियों की दवाओं का बाजार में संकट हो गया था। यह दवा ज्यादा कारगर साबित हुई। वैसे इस मामले में चिकित्सकों को उपहार देने की बात कहने की बात बिल्कुल सही नहीं है।
-डॉ. सुनील अग्रवाल, चिकित्सक।
पहले ज्यादातर दवा कंपनियां चिकित्सकों को सैंपल देती थीं, लेकिन अब बड़ी कंपनियां चिकित्सकों को गिफ्ट देती हैं। चिकित्सक इन कंपनियों की दवा लिखते हैं। यह अब आम चलन हैं। निश्चित ही इस दवा की निर्माता कंपनी ने चिकित्सकों को बड़े-बड़े उपहार दिए। कोरोनाकाल में लगभग सभी चिकित्सक बुखार से बचाव के लिए इस दवा को ही लिख रहे थे। मरीज के लिए बीमारी में चिकित्सक से बड़ा कोई नहीं होता। हालांकि बाजार में अन्य गोलियां भी उपलब्ध थीं और उनकी कीमत भी ज्यादा नहीं थी।
-कन्हैयालाल वार्ष्णेय, दवा विक्रेता
कोरोना काल में काफी दवाएं उपलब्ध थीं, लेकिन सबसे ज्यादा चिकित्सकों ने इस दवा को ही लिखा। ऐसा भी लगता था कि इसे बनाने वाली कंपनी ने यह तैयारी कर ली हो कि उसका उत्पाद ज्यादा बिकेगा। ऐसे में इसकी उपलब्धता भी कम नहीं हुई। इसकी बिक्री काफी ज्यादा हुई। बुखार और दर्द होने पर लोग अपने आप ही इसकी खरीदारी करने लगे। बाजार में वैसे भेड़ चाल भी होती है। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। ऐसे में जांच और फैसले में सारी सच्चाई आ जाएगी।
-अमित सबलोक, केमिस्ट।
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कोरोना काल में बुखार को रोकने के लिए एक विशेष कंपनी की गोली की जबर्दस्त बिक्री हुई। इसे बनाने वाली कंपनी फिर चर्चा में है।
इसकी वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की गई और यह दावा किया गया कि इसे बनाने वाली कंपनी ने चिकित्सकों को एक हजार करोड़ से ज्यादा के उपहार दिए गए थे, ताकि वह इस गोली को ज्यादा से ज्यादा लिखें। इसकी बाजार में बंपर बिक्री हुई थी।
हालांकि बुखार के इलाज के लिए अन्य दवाएं भी काफी प्रयोग में आती हैं, लेकिन क्या कारण रहा कि कोरोना काल में सबसे ज्यादा यही गोली बिकी। क्या सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर किए जा रहे दावे सही हैं। इसे लेकर यहां के चिकित्सक और दवा विक्रेताओं की अलग-अलग राय है।
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कोई अच्छा चिकित्सक सौदेबाजी नहीं करता। उसके लिए यह जरूरी है कि मरीज जल्द से जल्द स्वस्थ हो। रही बात इस कंपनी विशेष की दवा की तो यह इसने बुखार पर काबू पाया। इसका अच्छा परिणाम मिला। वैसे किसी दवा की अत्यधिक बिक्री हो रही है तो इसमें केवल चिकित्सक ही कड़ी नहीं है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अन्य कर्मी, केमिस्ट की वजह से भी दवाओं की ज्यादा बिक्री होती है। चिकित्सक तो शुरू में दवा लिखते हैं, लेकिन उसके बाद जब उसका प्रचलन बढ़ जाता है तो उसकी अपने आप की बिक्री होने लगती है।
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-डॉ. आरपी सिंह, अध्यक्ष इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, हाथरस व पूर्व सीएमओ।
यह दवा इसलिए कोरोना काल में सबसे ज्यादा बिकी थी, क्योंकि इसकी हर जगह उपलब्धता थी। गांव के छोटे-छोटे विक्रेताओं पर भी यह दवा मिल जाती थी। कीमत भी ज्यादा नहीं थी। गोली बुखार के रोगियों के लिए लाभप्रद साबित हो रही थी। इसके अलावा इसका नाम भी आसान था। लोगों को आसानी के याद हो गया था। अन्य कंपनियों की दवाओं का बाजार में संकट हो गया था। यह दवा ज्यादा कारगर साबित हुई। वैसे इस मामले में चिकित्सकों को उपहार देने की बात कहने की बात बिल्कुल सही नहीं है।
-डॉ. सुनील अग्रवाल, चिकित्सक।
पहले ज्यादातर दवा कंपनियां चिकित्सकों को सैंपल देती थीं, लेकिन अब बड़ी कंपनियां चिकित्सकों को गिफ्ट देती हैं। चिकित्सक इन कंपनियों की दवा लिखते हैं। यह अब आम चलन हैं। निश्चित ही इस दवा की निर्माता कंपनी ने चिकित्सकों को बड़े-बड़े उपहार दिए। कोरोनाकाल में लगभग सभी चिकित्सक बुखार से बचाव के लिए इस दवा को ही लिख रहे थे। मरीज के लिए बीमारी में चिकित्सक से बड़ा कोई नहीं होता। हालांकि बाजार में अन्य गोलियां भी उपलब्ध थीं और उनकी कीमत भी ज्यादा नहीं थी।
-कन्हैयालाल वार्ष्णेय, दवा विक्रेता
कोरोना काल में काफी दवाएं उपलब्ध थीं, लेकिन सबसे ज्यादा चिकित्सकों ने इस दवा को ही लिखा। ऐसा भी लगता था कि इसे बनाने वाली कंपनी ने यह तैयारी कर ली हो कि उसका उत्पाद ज्यादा बिकेगा। ऐसे में इसकी उपलब्धता भी कम नहीं हुई। इसकी बिक्री काफी ज्यादा हुई। बुखार और दर्द होने पर लोग अपने आप ही इसकी खरीदारी करने लगे। बाजार में वैसे भेड़ चाल भी होती है। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। ऐसे में जांच और फैसले में सारी सच्चाई आ जाएगी।
-अमित सबलोक, केमिस्ट।