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हाथरस: श्रीराम मंदिर निर्माण के संकल्प के लिए रखी थी चोटी
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हाथरस: राम मंदिर आंदोलन के समय जुलूस में शामिल अनूप अग्रवाल व अन्य। (फाइल फोटो)
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
श्रीराम जन्म भूमि का आंदोलन दो वर्ष तक लगातार चला था। इस आंदोलन में जिले से हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने अयोध्या का रुख कर गिरफ्तारी दी। तत्कालीन सरकार के खिलाफ तरह-तरह से विरोध भी जताया था। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से शहर के नवल नगर के अनूप अग्रवाल भी जुड़े हैं। उन्होंने राम ज्योति यात्रा व श्रीराम शिला के पूजन में योगदान दिया है। उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए चोटी रखी, जो आज भी है। आगरा की सेंट्रल जेल में करीब 45 दिन तक बंद भी रहे। वह अब मंदिर निर्माण से बेहद खुश हैं।
उन्होंने बताया कि एक शिला एक रुपया मंदिर के निर्माण को जैसे नारे लगाए जाते थे। तत्कालीन सरकार ने कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं तो आंदोलन और तेज हो गया था। उन्होंने बताया कि हमारी डाक जो आती थी, उस पर नौ नंबर डलके आता था। सबसे पहले डाक पुलिस चौकी में आती थी, उसको चेक करने के बाद दिया जाता था। उन्होंने बताया कि शहर के सासनी गेट चौराहा से उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद आगरा सेंट्रल जेल भेजा गया। राजनीतिक बंदी के रूप में रखा गया। उस समय में अलीगढ़ के विधायक केके नवमान, डींग के विधायक, भरतपुर के विधायक, महाराष्ट्र के सांसद को हमारी बैरक में रखा गया।
उनके साथ हाथरस के करीब 70 लोग बंद थे, जिनमें प्रेमनारायण वैद्य आदि थे। जिस समय तत्कालीन प्रदेश सरकार ने कार सेवकों पर गोलियां चलवाई थीं। उस समय यह संकल्प लिया गया था कि सरकार जाने के बाद ही बाल कटवाए जाएंगे। उसके बाद दिल्ली में शंखनाद रैली हुई। उस शंखनाद रैली प्रदेश सरकार के गिरने की सूचना मिली। उसके बाद मुंडन कराया था। उसी समय श्रीराम मंदिर निर्माण के संकल्प के लिए चोटी रखाई थी, जो आज कमर तक बड़ी हो गई है।
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श्रीराम जन्म भूमि का आंदोलन दो वर्ष तक लगातार चला था। इस आंदोलन में जिले से हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने अयोध्या का रुख कर गिरफ्तारी दी। तत्कालीन सरकार के खिलाफ तरह-तरह से विरोध भी जताया था। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से शहर के नवल नगर के अनूप अग्रवाल भी जुड़े हैं। उन्होंने राम ज्योति यात्रा व श्रीराम शिला के पूजन में योगदान दिया है। उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए चोटी रखी, जो आज भी है। आगरा की सेंट्रल जेल में करीब 45 दिन तक बंद भी रहे। वह अब मंदिर निर्माण से बेहद खुश हैं।
उन्होंने बताया कि एक शिला एक रुपया मंदिर के निर्माण को जैसे नारे लगाए जाते थे। तत्कालीन सरकार ने कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं तो आंदोलन और तेज हो गया था। उन्होंने बताया कि हमारी डाक जो आती थी, उस पर नौ नंबर डलके आता था। सबसे पहले डाक पुलिस चौकी में आती थी, उसको चेक करने के बाद दिया जाता था। उन्होंने बताया कि शहर के सासनी गेट चौराहा से उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद आगरा सेंट्रल जेल भेजा गया। राजनीतिक बंदी के रूप में रखा गया। उस समय में अलीगढ़ के विधायक केके नवमान, डींग के विधायक, भरतपुर के विधायक, महाराष्ट्र के सांसद को हमारी बैरक में रखा गया।
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उनके साथ हाथरस के करीब 70 लोग बंद थे, जिनमें प्रेमनारायण वैद्य आदि थे। जिस समय तत्कालीन प्रदेश सरकार ने कार सेवकों पर गोलियां चलवाई थीं। उस समय यह संकल्प लिया गया था कि सरकार जाने के बाद ही बाल कटवाए जाएंगे। उसके बाद दिल्ली में शंखनाद रैली हुई। उस शंखनाद रैली प्रदेश सरकार के गिरने की सूचना मिली। उसके बाद मुंडन कराया था। उसी समय श्रीराम मंदिर निर्माण के संकल्प के लिए चोटी रखाई थी, जो आज कमर तक बड़ी हो गई है।
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