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हाथरस : बिटिया के परिजन बोले, दरिंदे को सजा मिली तो हुई तसल्ली
Sun, 19 Dec 2021 01:21 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
amar ujala/hathras
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Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 01:21 AM IST
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हाथरस : हत्यारे को फांसी की सजा सुनाए जाने के दौरान कोर्ट परिसर में तैनात पुलिस। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
10 साल की जिस बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गई थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद उसके परिजनों को काफी सकून मिला है। परिजनों का कहना है कि उनका न्यायपालिका पर और विश्वास बढ़ा है। हालांकि परिजनों का यह दर्द भी था कि उन्हें अभी तक न तो पक्का आवास मिला है और न ही कोई आर्थिक मदद। उनके पास अंत्योदय योजना के तहत राशन कार्ड तक नहीं है। घटना के समय उन्हें आर्थिक मदद और पक्का आवास दिलाने का वादा प्रशासनिक अधिकारियों ने किया था।
बिटिया के पिता कहना था कि उनकी बच्ची को अब वापस नहीं आ सकती, लेकिन न्यायालय ने एक दुष्ट व्यक्ति को जो कठोर सजा सुनाई है, उससे वह खुश हैं। उनका यह भी कहना था कि इससे उन्हें काफी तसल्ली मिली है। हम यही चाहते थे कि जिसने हमारी बच्ची के साथ हैवानियत की है। उसे मौत की सजा ही मिले, जिसे जमाना याद करे। बिटिया की मां का कहना था कि उनकी फूल जैसी बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले को कोर्ट ने जो सजा दी है, वह बिल्कुल ठीक है। ऐसे दरिंदे के लिए यही फैसला होना चाहिए था। बिटिया के पिता एक गोशाला में नौकरी करते हैं।
तीन माह के अंदर फांसी की दूसरी सजा
हाथरस। विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) प्रतिभा सक्सेना के न्यायालय ने तीन माह के अंदर फांसी की यह दूसरी सजा सुनाई है। इससे पहले 23 सितंबर को कोतवाली एक युवक को भी फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस युवक ने सिकंदराराऊ क्षेत्र में एक किशोरी के साथ दुष्कर्म कर उसे जिंदा जलाकर मार दिया था। संवाद
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शातिर अपराधी है चंद्रपाल, पहले भी जा चुका है जेल
हाथरस। पुलिस की मानें तो मेंडू की 10 साल की बच्ची के साथ हैवानियत कर उसकी हत्या करने वाला चंद्रपाल एक शातिर अपराधी है। वह विवाहित है और उसकी बेटी तक की शादी हो चुकी है। उस पर हाथरस के अलावा कासगंज में भी कई मुकदमे दर्ज हैं। उस पर डकैती, नकबजनी, आबकारी एक्ट, गैंगस्टर, एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्जन भर मुकदमे दर्ज हैं और वह इस वारदात से पहले कई बार जेल जा चुका है। संवाद
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10 साल की जिस बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गई थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद उसके परिजनों को काफी सकून मिला है। परिजनों का कहना है कि उनका न्यायपालिका पर और विश्वास बढ़ा है। हालांकि परिजनों का यह दर्द भी था कि उन्हें अभी तक न तो पक्का आवास मिला है और न ही कोई आर्थिक मदद। उनके पास अंत्योदय योजना के तहत राशन कार्ड तक नहीं है। घटना के समय उन्हें आर्थिक मदद और पक्का आवास दिलाने का वादा प्रशासनिक अधिकारियों ने किया था।
बिटिया के पिता कहना था कि उनकी बच्ची को अब वापस नहीं आ सकती, लेकिन न्यायालय ने एक दुष्ट व्यक्ति को जो कठोर सजा सुनाई है, उससे वह खुश हैं। उनका यह भी कहना था कि इससे उन्हें काफी तसल्ली मिली है। हम यही चाहते थे कि जिसने हमारी बच्ची के साथ हैवानियत की है। उसे मौत की सजा ही मिले, जिसे जमाना याद करे। बिटिया की मां का कहना था कि उनकी फूल जैसी बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले को कोर्ट ने जो सजा दी है, वह बिल्कुल ठीक है। ऐसे दरिंदे के लिए यही फैसला होना चाहिए था। बिटिया के पिता एक गोशाला में नौकरी करते हैं।
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तीन माह के अंदर फांसी की दूसरी सजा
हाथरस। विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) प्रतिभा सक्सेना के न्यायालय ने तीन माह के अंदर फांसी की यह दूसरी सजा सुनाई है। इससे पहले 23 सितंबर को कोतवाली एक युवक को भी फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस युवक ने सिकंदराराऊ क्षेत्र में एक किशोरी के साथ दुष्कर्म कर उसे जिंदा जलाकर मार दिया था। संवाद
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शातिर अपराधी है चंद्रपाल, पहले भी जा चुका है जेल
हाथरस। पुलिस की मानें तो मेंडू की 10 साल की बच्ची के साथ हैवानियत कर उसकी हत्या करने वाला चंद्रपाल एक शातिर अपराधी है। वह विवाहित है और उसकी बेटी तक की शादी हो चुकी है। उस पर हाथरस के अलावा कासगंज में भी कई मुकदमे दर्ज हैं। उस पर डकैती, नकबजनी, आबकारी एक्ट, गैंगस्टर, एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्जन भर मुकदमे दर्ज हैं और वह इस वारदात से पहले कई बार जेल जा चुका है। संवाद