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हाथरस : दफनाने के विवाद में तीन दिन घर में पड़ा रहा शव
सार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)क्षेत्र के गांव मानिकपुर निवासी एक युवक का शव दफनाने को लेकर विवाद के चलते तीन दिन तक उसके घर में ही पड़ा रहा। प्रशासन को मामले की सूचना मिली तो तहसीलदार ने गांव पहुंचकर परिजनों को समझाया और गांव के ही कब्रिस्तान में शव को दफन कराया।गांव में कुछ घुमंतु जाति के परिवार आवास बनाकर रहते हैं। उसकी मां अनाड़ी देवी ने बताया कि उसे कुछ दिन पहले पीलिया रोग हो गया था।
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हाथरस : गांव मानिकपुर में शव को दफनाने के लिए खोदी गई कब्र। संवाद
- फोटो : SHAPHU
विस्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)
क्षेत्र के गांव मानिकपुर निवासी एक युवक का शव दफनाने को लेकर विवाद के चलते तीन दिन तक उसके घर में ही पड़ा रहा। युुवक पंजाब के अमृतसर में रहकर शिलाजीत बेचने का काम करता था। प्रशासन को मामले की सूचना मिली तो तहसीलदार ने गांव पहुंचकर परिजनों को समझाया और गांव के ही कब्रिस्तान में शव को दफन कराया।
गांव में कुछ घुमंतु जाति के परिवार आवास बनाकर रहते हैं। इसी परिवार के करन सिंह का 35 वर्षीय पुत्र अकल सिंह अन्य लोगों के साथ मिलकर पंजाब के अमृतसर में शिलाजीत बेचने का कार्य करता था। उसकी मां अनाड़ी देवी ने बताया कि उसे कुछ दिन पहले पीलिया रोग हो गया था। इलाज के दौरान सोमवार सुबह चार बजे उसकी मौत हो गई। अपने रीति रिवाज के तहत वह शव को दफनाने के लिए सोमवार की रात में ही ले आए। इसके बाद वह अपने रिश्तेदार एवं परिचितों के आने के इंतजार करते रहे।
बुधवार को उन्होंने जिस जगह उनके पुरखे दफनाए गए थे, वहां कब्र खोदनी शुरू की तो ग्राम प्रधान और उनके प्रतिनिधि ने उसे रुकवा दिया। इसे लेकर उनमें काफी विवाद हुआ। प्रधान का कहना था कि जिस स्थान पर मृतक के परिजन कब्र खोद रहे थे, वह चारागाह की जगह है और इसके पास ही गांव का खेल मैदान बन चुका है।
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इधर, मृतक के परिजनों का कहना था कि जिस स्थान पर उनके पुरखे दफन हुए हैं, वह वहीं शव को दफनाएंगे। विवाद बढ़ता गया। मृतक की मां का आरोप है कि प्रधान पति एवं प्रधान ने उनके द्वारा खोदवाई गई कब्र को बंद कर दिया। वह उनके साथ हाथापाई पर उतर आए। विवाद बढ़ता देख किसी ने पुलिस को सूचना दी। चौकी प्रभारी सतीश कुमार ने मृतक के परिवार को काफी समझाने की कोशिश की।
सूचना मिलने पर तहसीलदार सादाबाद कीर्ति सिंह एवं क्षेत्रीय लेखपाल सूर्यरंजन भी पहुंच गए। तहसीलदार ने उनको समझा-बुझाकर अन्य कब्रिस्तान में शव को दफनाने के लिए तैयार कर लिया। देर शाम को परिजनों ने शव को गांव में ही दफना दिया। तहसीलदार का कहना है कि शव को गांव के कब्रिस्तान में ही दफन करा दिया गया है। संवाद
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क्षेत्र के गांव मानिकपुर निवासी एक युवक का शव दफनाने को लेकर विवाद के चलते तीन दिन तक उसके घर में ही पड़ा रहा। युुवक पंजाब के अमृतसर में रहकर शिलाजीत बेचने का काम करता था। प्रशासन को मामले की सूचना मिली तो तहसीलदार ने गांव पहुंचकर परिजनों को समझाया और गांव के ही कब्रिस्तान में शव को दफन कराया।
गांव में कुछ घुमंतु जाति के परिवार आवास बनाकर रहते हैं। इसी परिवार के करन सिंह का 35 वर्षीय पुत्र अकल सिंह अन्य लोगों के साथ मिलकर पंजाब के अमृतसर में शिलाजीत बेचने का कार्य करता था। उसकी मां अनाड़ी देवी ने बताया कि उसे कुछ दिन पहले पीलिया रोग हो गया था। इलाज के दौरान सोमवार सुबह चार बजे उसकी मौत हो गई। अपने रीति रिवाज के तहत वह शव को दफनाने के लिए सोमवार की रात में ही ले आए। इसके बाद वह अपने रिश्तेदार एवं परिचितों के आने के इंतजार करते रहे।
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बुधवार को उन्होंने जिस जगह उनके पुरखे दफनाए गए थे, वहां कब्र खोदनी शुरू की तो ग्राम प्रधान और उनके प्रतिनिधि ने उसे रुकवा दिया। इसे लेकर उनमें काफी विवाद हुआ। प्रधान का कहना था कि जिस स्थान पर मृतक के परिजन कब्र खोद रहे थे, वह चारागाह की जगह है और इसके पास ही गांव का खेल मैदान बन चुका है।
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इधर, मृतक के परिजनों का कहना था कि जिस स्थान पर उनके पुरखे दफन हुए हैं, वह वहीं शव को दफनाएंगे। विवाद बढ़ता गया। मृतक की मां का आरोप है कि प्रधान पति एवं प्रधान ने उनके द्वारा खोदवाई गई कब्र को बंद कर दिया। वह उनके साथ हाथापाई पर उतर आए। विवाद बढ़ता देख किसी ने पुलिस को सूचना दी। चौकी प्रभारी सतीश कुमार ने मृतक के परिवार को काफी समझाने की कोशिश की।
सूचना मिलने पर तहसीलदार सादाबाद कीर्ति सिंह एवं क्षेत्रीय लेखपाल सूर्यरंजन भी पहुंच गए। तहसीलदार ने उनको समझा-बुझाकर अन्य कब्रिस्तान में शव को दफनाने के लिए तैयार कर लिया। देर शाम को परिजनों ने शव को गांव में ही दफना दिया। तहसीलदार का कहना है कि शव को गांव के कब्रिस्तान में ही दफन करा दिया गया है। संवाद