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हाथरस : हाथरस की राजनीति पर खूब चढ़ा परिवारवाद का रंग

Tue, 01 Feb 2022 12:51 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Feb 2022 12:51 AM IST
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Hathras: The color of familyism rose a lot on the politics of Hathras
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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सभी राजनीतिक दल कहने को तो परिवारवाद का विरोध करते हैं लेकिन हकीकत इससे अलग है। हाथरस की राजनीति में भी परिवारवाद सिर चढ़कर बोल रहा है। कई राजनेताओं के भाई, पत्नी, पुत्रवधू भी राजनीति में सफल रहे। कई पूर्व सांसदों व पूर्व विधायकों के बेटे अपने पिता की तरह सांसद और विधायक बने।
सादाबाद सीट से चार बार विधायक और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन रहे अशरफ अली खां के बेटे जावेद अली खां भी सादाबाद से दो बार विधायक चुने गए और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। वर्तमान में हाथरस के सांसद राजवीर दिलेर को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता किशनलाल दिलेर हाथरस से चार बार सांसद रहे।
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वह चार बार कोल सीट से विधायक भी रहे। राजवीर दिलेर पहले इगलास से विधायक चुने गए और बाद में वह हाथरस से सांसद चुने गए। पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन केे भी कई परिजन राजनीति में सफल रहे। सुमन की पत्नी प्रेमवती सुमन जहां आगरा से जिला पंचायत अध्यक्ष रही तो उनके बेटे रणजीत सुमन जलेसर से विधायक रह चुके हैं।
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रणजीत सुमन फिर एटा की जलेसर सीट से ही चुनाव मैदान में हैं। सुमन के छोटे भाई नारायण सिंह सुमन भी प्रदेश में कबीना मंत्री रहे। सुमन का पिछले साल देहांत हो गया था। पूर्व मंत्री और सादाबाद से भाजपा के उम्मीदवार रामवीर उपाध्याय का परिवार भी राजनीति में जमकर फला-फूला।
रामवीर उपाध्याय लगातार पांच बार से विधायक हैं और तीन बार कबीना मंत्री भी रहे हैं तो उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय वर्तमान में हाथरस जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। उनके छोटे भाई विनोद उपाध्याय भी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। रामवीर के एक और छोटे भाई मुकुल उपाध्याय विधायक और विधान परिषद सदस्य भी रहे।
रामवीर के सबसे छोटे भाई रामेश्वर उपाध्याय कई बार ब्लॉक प्रमुख रहे और अभी भी मुरसान से ब्लॉक प्रमुख है। विनोद उपाध्याय की पत्नी सरोज उपाध्याय, रामेश्वर उपाध्याय की पत्नी कल्पना उपाध्याय भी जिला पंचायत सदस्य रही हैं।

वर्तमान में हाथरस सीट से भाजपा विधायक हरीशंकर माहौर का इस बार टिकट भले कट गया हो लेकिन पिछले साल हुए पंचायत चुनाव में उनकी पुत्रवधू प्रतिभा कमल माहौर सासनी से ब्लॉक प्रमुख चुनी गई। इसके अलावा जिले में कई और ऐसी राजनीतिक हस्तियां हैं, जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है।
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