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हाथरस : होलिका दहन समय को लेकर दो गुटों में बंटे विद्वान
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
होलिका दहन के समय को लेकर विद्वानों में इस बार फिर मतभेद उभर आए हैं। उल्लेखनीय है कि 17 मार्च को होली का पर्व है। अभी तक होलिका दहन के समय को लेकर विद्वानों में लगातार मंथन चल रहा है।
शहर के कुछ विद्वान शाम को साढ़े छह बजे से साढ़े आठ बजे तक प्रदोष काल में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त बता रहे हैं तो कुछ विद्वानों का कहना है कि रात्रि एक बजे तक भद्राकाल रहेगा। पूर्णिमा अगले दिन दोपहर 12 बजे तक रहेगी, इसलिए सुबह साढ़े चार बजे होलिका दहन करना शुभ रहेगा। भद्राकाल में होलिका दहन अशुभ होता है।
इसे लेकर एक दो दिन में विद्वानों की बैठक होगी। विद्वानों के दोनों गुट होलिका दहन के लिए अपने समय को सही बता रहे हैं। ज्यादातर विद्वान होलिका दहन शाम को साढ़े छह से साढ़े आठ के बीच में होने की बात कह रहे हैं। इसे लेकर शहर के विद्वान लगातार आपस में संपर्क में भी हैं। संवाद
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होलिका दहन के समय को लेकर विद्वानों में इस बार फिर मतभेद उभर आए हैं। उल्लेखनीय है कि 17 मार्च को होली का पर्व है। अभी तक होलिका दहन के समय को लेकर विद्वानों में लगातार मंथन चल रहा है।
शहर के कुछ विद्वान शाम को साढ़े छह बजे से साढ़े आठ बजे तक प्रदोष काल में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त बता रहे हैं तो कुछ विद्वानों का कहना है कि रात्रि एक बजे तक भद्राकाल रहेगा। पूर्णिमा अगले दिन दोपहर 12 बजे तक रहेगी, इसलिए सुबह साढ़े चार बजे होलिका दहन करना शुभ रहेगा। भद्राकाल में होलिका दहन अशुभ होता है।
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इसे लेकर एक दो दिन में विद्वानों की बैठक होगी। विद्वानों के दोनों गुट होलिका दहन के लिए अपने समय को सही बता रहे हैं। ज्यादातर विद्वान होलिका दहन शाम को साढ़े छह से साढ़े आठ के बीच में होने की बात कह रहे हैं। इसे लेकर शहर के विद्वान लगातार आपस में संपर्क में भी हैं। संवाद
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