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हाथरस : चार करोड़ से बना रुहेरी विद्युत उपकेंद्र 15 साल बाद भी नहीं हुआ चालू

Sat, 07 May 2022 11:36 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 07 May 2022 11:36 PM IST
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Hathras: Ruheri power substation made of four crores was not operational even after 15 years
हाथरस : बंद पड़ा रुहेरी बिजलीघर। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले के 20 गांवों की बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए चार करोड़ रुपये खर्च कर बनाया गया 33 केवी का विद्युत उपकेंद्र 15 साल बाद भी चालू नहीं नहीं हो सका है। रुहेरी और आसपास के 20 गांवों की विद्युत आपूर्ति में सुधार के लिए यह उपकेंद्र बनाया गया था, लेकिन आज तक इसमें करंट नहीं दौड़ सका है। विद्युत उपकेंद्र के भवन में भूसा भरा हुआ है। ग्रामीण इस परिसर का इस्तेमाल उपले पाथने के लिए कर रहे हैं। जिन 20 गांवों के लिए यह विद्युत उपकेंद्र बना था, उन गांवों को दूसरे उपकेंद्रों से आपूर्ति दी जा रही है। लाइनों की लंबाई अधिक होने के कारण कभी तार टूटते हैं तो कभी अन्य दिक्कतें आती है। नतीजा, इन गांवों को बेहतर विद्युत आपूर्ति मिलने का सपना आज तक अधूरा है।
वर्ष 2007 शासन स्तर से लोगों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए शहर से सटे गांव रुहरी के निकट 33/11 केवीए का विद्युत उपकेंद्र तैयार किया गया था। इसमें ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरण लगाए गए। ग्रामीणों को लगा कि अब उन्हें विद्युत आपूर्ति में व्यवधान का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन उनके अरमानों को तगड़ा झटका लगा। जिस कार्यदायी संस्था ने इसका निर्माण किया, उस पर गुणवत्ता पूर्वक निर्माण न करने का आरोप लगाया। ऐसे में विद्युत वितरण खंड ने इसे टेक ओवर ही नहीं किया। अभी तक इस बिजलीघर की जांच जारी है। यह उपकेंद्र आज भी शोपीस बना हुआ है। संवाद
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इन गांवों को नहीं मिल रही पर्याप्त बिजली
गांव रुहेरी में चार करोड़ रुपये की लागत से बना विद्युत उपकेंद्र यदि चालू होता तो रुहेरी, रहना, रघनिया, दयातनतपुर, नगला उम्मेद, बरसै, महदपुर, कोरना, दरकौली, गारवगढ़ी, नौपुरा, सुमरतगढ़ी आदि गांवों के लोगों को पर्याप्त बिजली मिलती। वर्तमान में इन गांवों को लहरा और सोखना विद्युत उपकेंद्र से से बिजली की आपूर्ति की जा रही है।
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ग्रामीणों का दर्द
वर्ष 2007 में इस विद्युत उपकेंद्र का निर्माण हुआ था। यह उपकेंद्र आज तक चालू नहीं हुआ है। इसके निर्माण में करीब चार करोड़ रुपये की लागत आई थी। इसके बनने के बाद भी 20 गांवों में आज भी बिजली का संकट है। इन गांवों को सोखना व लहरा उपकेंद्र से बिजली दी जा रही है। लाइनें लंबी होने के कारण आए-दिन दिक्कतें होती हैं।
-रामनिवास रावत, ग्रामीण
जब विद्युत उपकेंद्र का निर्माण हुआ था तो यह लगा कि बिजली की समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन आज तक हालत जस के तस बने हुए हैं। आए दिन बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस बिजलीघर को बनाने पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये बेकार चले गए।
- कुंती देवी, ग्रामीण
कई वर्ष पहले बना यह विद्युत उपकेंद्र आज तक शोपीस बना हुआ है। बिजलीघर में भूसा भरा हुआ है। उपले पथ रहे हैं। जिन अधिकारियों ने इसे चालू करने में हीलाहवाली बरती है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सरकारी खजाने का करोड़ों रुपया इन्होंने बर्बाद कर दिया।

-नंदकिशोर दीक्षित, ग्रामीण।
बिजलीघर निर्माण के मामले में अभी उच्चस्तरीय जांच चल रही है। लखनऊ स्तर से इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है। इसके चलते यह बिजलीघर अभी टेकओवर नहीं किया गया है। -नरेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता विद्युत विभाग।
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