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हाथरस : सामान की ढुलाई से रोडवेज को लग रही लाखों की चपत
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
रोडवेज बसों की खिड़की किसी यात्री के लिए भले ही आपातकालीन स्थिति में नहीं खुलती, लेकिन सामान की ढुलाई के लिए आसानी से खुल जाती है। चालक-परिचालकों द्वारा आपतकालीन खिड़की के जरिये बसों में सामान ढोकर रोडवेज को हर महीने लाखों रुपये की चपत लगाई जा रही है। इससे डिपो के अफसर अनजान बने हैं।
उल्लेखनीय है कि रोडवेज की बसों के अंदर सामान ले जाना बिल्कुल प्रतिबंधित है। यदि किसी व्यक्ति को सामान भेजना है तो वह पहले बुक कराएगा। उसके बाद बस की छत पर लगे जाल पर रखकर सामान को गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। खास बात यह है कि हाथरस डिपो की बसों के अंदर मनमानी से सामान ले जाया जा रहा है।
शहर के तालाब चौराहा स्थित ओवरब्रिज के निकट एक रोडवेज बस आपातकालीन खिड़की से सामान को परिचालक उतरवाता हुआ नजर आया। इससे डिपो के अधिकारी बेसुध बने हुए हैं। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) शशी रानी से वार्ता करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठ सका। संवाद
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रोडवेज बसों की खिड़की किसी यात्री के लिए भले ही आपातकालीन स्थिति में नहीं खुलती, लेकिन सामान की ढुलाई के लिए आसानी से खुल जाती है। चालक-परिचालकों द्वारा आपतकालीन खिड़की के जरिये बसों में सामान ढोकर रोडवेज को हर महीने लाखों रुपये की चपत लगाई जा रही है। इससे डिपो के अफसर अनजान बने हैं।
उल्लेखनीय है कि रोडवेज की बसों के अंदर सामान ले जाना बिल्कुल प्रतिबंधित है। यदि किसी व्यक्ति को सामान भेजना है तो वह पहले बुक कराएगा। उसके बाद बस की छत पर लगे जाल पर रखकर सामान को गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। खास बात यह है कि हाथरस डिपो की बसों के अंदर मनमानी से सामान ले जाया जा रहा है।
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शहर के तालाब चौराहा स्थित ओवरब्रिज के निकट एक रोडवेज बस आपातकालीन खिड़की से सामान को परिचालक उतरवाता हुआ नजर आया। इससे डिपो के अधिकारी बेसुध बने हुए हैं। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) शशी रानी से वार्ता करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठ सका। संवाद
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