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हाथरस : लोकसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करने पर बसपा से निलंबित हुए थे रामवीर
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने भाजपा प्रत्याशियों का समर्थन शुरू कर दिया था। यह बसपा को अखरा था और इसके चलते बसपा ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद रामवीर के परिजनों ने बसपा ने नाता तोड़ना शुरू कर दिया था। रामवीर की पत्नी, पुत्र व भाई पहले भाजपा में शामिल हो गए थे और विधानसभा चुनाव से पहले रामवीर उपाध्याय को भी बीमारी की हालत में भाजपा में शामिल कर उन्हें सादाबाद से चुनाव लड़ाया गया था।
पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा का गठबंधन था, लेकिन पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने गठबंधन प्रत्याशियों की बजाय भाजपा के प्रत्याशियों का समर्थन करना शुरू कर दिया था। अलीगढ़ में उन्होंने सांसद सतीश गौतम के लिए वोट मांगे तो आगरा में एसपी सिंह बघेल के साथ उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। उन पर बसपा नेतृत्व ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाया और पार्टी से निलंबित कर दिया।
ऐसे में रामवीर ने अपनी रणनीति की बदल दी थी। उनके एक भाई मुकुल उपाध्याय तो पहले से ही भाजपा में शामिल हो चुके थे। अन्य भाइयों व परिजनों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया था। रामवीर यदि भाजपा या किसी दल में शामिल होते तो उनकी विधायकी जा सकती थी, क्योंकि वह बसपा से निर्वाचित हुए थे और बसपा ने उन्हें निलंबित किया था, निष्कासित नहीं। ऐसे में उन्होंने इंतजार किया और विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले वह भी भाजपा में शामिल हो गए थे। ऐसे में करीब 25 साल बाद वह बसपा से अलग हुए। संवाद
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वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने भाजपा प्रत्याशियों का समर्थन शुरू कर दिया था। यह बसपा को अखरा था और इसके चलते बसपा ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद रामवीर के परिजनों ने बसपा ने नाता तोड़ना शुरू कर दिया था। रामवीर की पत्नी, पुत्र व भाई पहले भाजपा में शामिल हो गए थे और विधानसभा चुनाव से पहले रामवीर उपाध्याय को भी बीमारी की हालत में भाजपा में शामिल कर उन्हें सादाबाद से चुनाव लड़ाया गया था।
पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा का गठबंधन था, लेकिन पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने गठबंधन प्रत्याशियों की बजाय भाजपा के प्रत्याशियों का समर्थन करना शुरू कर दिया था। अलीगढ़ में उन्होंने सांसद सतीश गौतम के लिए वोट मांगे तो आगरा में एसपी सिंह बघेल के साथ उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। उन पर बसपा नेतृत्व ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाया और पार्टी से निलंबित कर दिया।
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ऐसे में रामवीर ने अपनी रणनीति की बदल दी थी। उनके एक भाई मुकुल उपाध्याय तो पहले से ही भाजपा में शामिल हो चुके थे। अन्य भाइयों व परिजनों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया था। रामवीर यदि भाजपा या किसी दल में शामिल होते तो उनकी विधायकी जा सकती थी, क्योंकि वह बसपा से निर्वाचित हुए थे और बसपा ने उन्हें निलंबित किया था, निष्कासित नहीं। ऐसे में उन्होंने इंतजार किया और विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले वह भी भाजपा में शामिल हो गए थे। ऐसे में करीब 25 साल बाद वह बसपा से अलग हुए। संवाद
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