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हाथरस : जिले के कई राजनेताओं से अंत तक रही रामवीर की अदावत
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले के कुछ राजनेताओं से पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय की अदावत चलती रही। यह अदावत कई बार खूनी संघर्ष में भी बदली। रामवीर उपाध्याय के समर्थकों और उनके विरोधियों के समर्थकों में कई बार खूनी संघर्ष हुआ। इसे लेकर आज भी मुकदमेबाजी चल रही है। एक मुकदमे में पिछले दिनों ही कोर्ट के आदेश पर रामवीर के खिलाफ कुर्की नोटिस चस्पा की कार्रवाई पुलिस ने की थी।
रामवीर उपाध्याय ने जब हाथरस की राजनीति में प्रवेश किया तो उन्हें सबसे ज्यादा ब्राह्मणों ने ही सहयोग किया था। वर्ष 1993 में वह निर्दलीय चुनाव लड़े तो उनके समर्थकों और इस चुनाव को जीतने वाले राजवीर सिंह पहलवान के समर्थकों में शहर के सरक्यूलर रोड पर जमकर फायरिंग हुई थी। इस घटना में रामवीर के समर्थक एक युवक की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। ऐसे में उनकी पूर्व विधायक राजवीर सिंह पहलवान से लंबे समय तक अदावत चली।
इसके अलावा उनकी पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल से भी अदावत जगजाहिर है। दोनों ने एक-दूसरे पर कई बार जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनो पक्षों में सहपऊ के गांव मानिकपुर में खूनी संघर्ष हुआ था। इस मामले में पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल को जेल जाना पड़ा था।
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वहीं पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय पर एक बीडीसी सदस्य के अपहरण के प्रयास का मुकदमा भी कोर्ट में चल रहा है। न्यायालय ने पिछले दिनों इस मामले में पूर्व मंत्री रामवीर व उनके पीए रानू पंडित के गैरजमानती वारंट जारी किए थे, लेकिन इस पर भी वह हाजिर नहीं हुए थे तो उनके खिलाफ धारा 82 के तहत कुर्की नोटिस चस्पा के आदेश दिए थे। पिछले दिनों चंदपा कोतवाली पुलिस ने रामवीर के लेबर कॉलोनी स्थित आवास के बाहर पुलिस ने यह नोटिस चस्पा भी किया था। संवाद
वाई श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी रामवीर को
हाथरस। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी। यह सुरक्षा उन्हें मंत्री रहते हुए मिली थी। हालांकि अखिलेश सरकार ने उनकी यह सुरक्षा वापस ले ली थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर उनकी यह सुरक्षा बहाल हो गई थी। संवाद
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जिले के कुछ राजनेताओं से पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय की अदावत चलती रही। यह अदावत कई बार खूनी संघर्ष में भी बदली। रामवीर उपाध्याय के समर्थकों और उनके विरोधियों के समर्थकों में कई बार खूनी संघर्ष हुआ। इसे लेकर आज भी मुकदमेबाजी चल रही है। एक मुकदमे में पिछले दिनों ही कोर्ट के आदेश पर रामवीर के खिलाफ कुर्की नोटिस चस्पा की कार्रवाई पुलिस ने की थी।
रामवीर उपाध्याय ने जब हाथरस की राजनीति में प्रवेश किया तो उन्हें सबसे ज्यादा ब्राह्मणों ने ही सहयोग किया था। वर्ष 1993 में वह निर्दलीय चुनाव लड़े तो उनके समर्थकों और इस चुनाव को जीतने वाले राजवीर सिंह पहलवान के समर्थकों में शहर के सरक्यूलर रोड पर जमकर फायरिंग हुई थी। इस घटना में रामवीर के समर्थक एक युवक की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। ऐसे में उनकी पूर्व विधायक राजवीर सिंह पहलवान से लंबे समय तक अदावत चली।
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इसके अलावा उनकी पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल से भी अदावत जगजाहिर है। दोनों ने एक-दूसरे पर कई बार जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनो पक्षों में सहपऊ के गांव मानिकपुर में खूनी संघर्ष हुआ था। इस मामले में पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल को जेल जाना पड़ा था।
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वहीं पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय पर एक बीडीसी सदस्य के अपहरण के प्रयास का मुकदमा भी कोर्ट में चल रहा है। न्यायालय ने पिछले दिनों इस मामले में पूर्व मंत्री रामवीर व उनके पीए रानू पंडित के गैरजमानती वारंट जारी किए थे, लेकिन इस पर भी वह हाजिर नहीं हुए थे तो उनके खिलाफ धारा 82 के तहत कुर्की नोटिस चस्पा के आदेश दिए थे। पिछले दिनों चंदपा कोतवाली पुलिस ने रामवीर के लेबर कॉलोनी स्थित आवास के बाहर पुलिस ने यह नोटिस चस्पा भी किया था। संवाद
वाई श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी रामवीर को
हाथरस। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी। यह सुरक्षा उन्हें मंत्री रहते हुए मिली थी। हालांकि अखिलेश सरकार ने उनकी यह सुरक्षा वापस ले ली थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर उनकी यह सुरक्षा बहाल हो गई थी। संवाद