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हाथरस : 39 साल पहले फरार हुए तीन दरोगाओं को नहीं ढूंढ पा रही पुलिस

Tue, 12 Jul 2022 11:30 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jul 2022 11:30 PM IST
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Hathras: Police is unable to find the three policemen who escaped 39 years ago
गोविंद उपाध्याय
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हाथरस। पुलिस से अपेक्षा होती है कि वह शातिर से शातिर अपराधियों को खोज निकाले। ज्यादातर मामलों में ऐसा होता भी है। लेकिन 39 साल पुराने फर्जी एनकाउंटर के मामले में फंसे तीन दरोगाओं को पुलिस नहीं खोज पा रही। इन तीनों के खिलाफ कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी कर रखे हैं। न्यायालय में इस मामले की सुनवाई के लिए 15 जुलाई को होगी।
15 जनवरी 1983 को एटा कचहरी से कुछ पुलिसकर्मियों ने मनवीर सिंह एडवोकेट के बिस्तर से एक ग्रामीण हीरालाल पुत्र बलवंत सिंह निवासी महमूदपुर थाना सिकंदराराऊ को दिन दहाड़े उठा लिया था। पुलिस कार्रवाई का कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं ने तीव्र विरोध किया था। पुलिस ने उसे हिरासत में रखा। उसे हसायन पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। इसके बाद हीरालाल को चंदपा पुलिस पकड़कर ले आई।
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चदंपा पुलिस ने पांच फरवरी 1983 को चंदपा के गांव अर्जुनपुर के निकट रजवाहे के पुल पर मुठभेड़ में उसे मार गिराना दर्शाया। पुलिस की इस मुठभेड़ पर तमाम लोगों को शक हुआ। शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता रायवीर सिंह ने इस मामले की शिकायत उच्च स्तर तक की। संवाद
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मजिस्ट्रेटी जांच के बाद सीबीसीआईडी ने भी की थी जांच
तब इस एनकाउंटर की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू हुई। हाथरस के तत्कालीन एसडीएम ने मजिस्ट्रेटी जांच के उपरांत शासन को यह सिफारिश भेजी थी कि इस मामले की जांच सीबीसीआईडी से कराई जाए। उनकी सिफारिश पर शासन ने सीबीसीआईडी को जांच के आदेश दिए थे। मामले की जांच सीबीसीआईडी के सुपुर्द की गई और जांच में यह मुठभेड़ फर्जी निकली।
15 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दाखिल किया था आरोपपत्र
10 जनवरी 1987 को थाना चंदपा में इस मामले में अपराध संख्या दो-87 अंतर्गत धारा 147,148,149,302 364,344, 201 357,218,120 बी आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें 15 पुलिसकर्मी आरोपी बनाए गए। इन पुलिसकर्मियों में दरोगा केएम उपाध्याय, अनिल शर्मा, सत्यप्रकाश शर्मा, धर्म सिंह यादव, आरके त्यागी, हरीशचंद्र विद्यार्थी, बीडी दुबे, केवल सिंह के अलावा कांस्टेबिल धनपाल सिंह, बहादुर खां, श्याम सिंह, रूपराम, हरीशचंद्र, राजवीर सिंह, रनवीर शामिल थे। सीबीसीआईडी ने विवेचना के उपरांत 25 अप्रैल 1996 को साक्ष्य संकलन करने के उपरांत आरोपी 15 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सीजेएम अलीगढ़ के न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था।

दो पुलिसकर्मियों की हो चुकी है मौत, 10 हो चुके हैं हाजिर
ताज्जुब की बात यह है कि 38 साल पुराना इस मामले में केस अभी तक ट्रायल पर नहीं आया है। इनमें से दो पुलिसकर्मियों केएम उपाध्याय व केवल सिंह की मौत हो चुकी है। 10 पुलिसकर्मी हाजिर हैं, लेकिन तीन दरोगा हरिश्चंद विद्यार्थी, धर्म सिंह यादव व बीडी दुबे लंबे समय से फरार हैं। सीजेएम कोर्ट कई बार इनके गैरजमानती वारंट जारी कर चुकी है, लेकिन पुलिस अपने ही विभाग के इन कर्मियों को नहीं पकड़ पा रही। बहरहाल, कोर्ट ने अब फिर इन तीनों के गैरजमानती वारंट जारी किए हैं। केवल सिंह की मृत्यु आख्या भी मांगी है।
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