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हाथरस : होली के लिए सजा पिचकारी का बाजार, उमड़ रहे खरीदार
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हाथरस : होली पर बिकने के लिए एक दुकान पर सजी पिचकारी। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जैसे-जैसे रंगों का त्योहार होली नजदीक आ रहा है, वैसे शहर के मुख्य बाजारों में पिचकारी का बाजार भी सज गया है। बाजार में तरह-तरह की आकृतियों की पिचकारियां बच्चों को रिझा रही हैं। हालांकि कोरोना के खतरे के बीच इस बार भी कारोबारियों ने माल कम मंगवाया था। करीब दो साल बाद कोरोना की दहशत खत्म होने के बाद लोग खुलकर होली खेलने के मूड में हैं।
यही वजह है कि रंग-गुलाल के साथ पिचकारियों की भी खूब खरीदारी हो रही है। थोक विक्रेताओं के यहां अभी से ही पिचकारियों का स्टॉक खत्म हो गया है। अब वह बाजार की मांग भी पूरी नहीं कर पा रहे। रंग-गुलाल और पिचकारियों के दाम भी पिछले साल के मुकाबले 10 से 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में इस वर्ष मक्का की खेती बारिश से प्रभावित हो गई। इस कारण बाजार में इस बार स्टार्च (आरारोट) कम आया है। शहर के कारोबारियों को कम मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध हुआ है। इस कारण बढ़िया गुलाल काफी कम मात्रा में तैयार हुआ है।
पिचकारी भी महंगी, माल की कमी
हाथरस में पिचकारी का माल दिल्ली, आगरा व अन्य शहरों से आता ह।ै इस बार कच्चे माल की कमी से पिचकारी भी कम तैयार की गई हैं। बाजार में ज्यादातर पिछले वर्ष का स्टॉक है। छोटा भीम, मोटू पतलू, टोम एंड जैरी, मोदी, योगी, टैंक, डोरेमोन कार्टून पात्रों की की पिचकारी बाजार में उपलब्ध हैं। इन पिचकारी के रेट में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस साल 10 से 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इस कारण ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। लोग पिचकारी खरीदने से पहले सोचने को मजबूर हैं। संवाद
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इस बार बाजार में कोई नई पिचकारी नहीं आई है। कोरोना की दहशत के चलते इस बार पिचकारी का माल कम तैयार हुआ है। पिछले साल की अपेक्षा गुलाल भी महंगा है। पिचकारी के दामों में 10 से 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
-प्रवीण, दुकानदार
इस बार बाजार में होली के लिए नई पिचकारी नहीं आई है। रंग-गुलाल के दाम भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ गए हैं। इस कारण पिचकारी खरीदने में अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है, लेकिन दो वर्ष बाद होली खुलकर मनाएंगे।
- सचिन ग्राहक
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जैसे-जैसे रंगों का त्योहार होली नजदीक आ रहा है, वैसे शहर के मुख्य बाजारों में पिचकारी का बाजार भी सज गया है। बाजार में तरह-तरह की आकृतियों की पिचकारियां बच्चों को रिझा रही हैं। हालांकि कोरोना के खतरे के बीच इस बार भी कारोबारियों ने माल कम मंगवाया था। करीब दो साल बाद कोरोना की दहशत खत्म होने के बाद लोग खुलकर होली खेलने के मूड में हैं।
यही वजह है कि रंग-गुलाल के साथ पिचकारियों की भी खूब खरीदारी हो रही है। थोक विक्रेताओं के यहां अभी से ही पिचकारियों का स्टॉक खत्म हो गया है। अब वह बाजार की मांग भी पूरी नहीं कर पा रहे। रंग-गुलाल और पिचकारियों के दाम भी पिछले साल के मुकाबले 10 से 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में इस वर्ष मक्का की खेती बारिश से प्रभावित हो गई। इस कारण बाजार में इस बार स्टार्च (आरारोट) कम आया है। शहर के कारोबारियों को कम मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध हुआ है। इस कारण बढ़िया गुलाल काफी कम मात्रा में तैयार हुआ है।
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पिचकारी भी महंगी, माल की कमी
हाथरस में पिचकारी का माल दिल्ली, आगरा व अन्य शहरों से आता ह।ै इस बार कच्चे माल की कमी से पिचकारी भी कम तैयार की गई हैं। बाजार में ज्यादातर पिछले वर्ष का स्टॉक है। छोटा भीम, मोटू पतलू, टोम एंड जैरी, मोदी, योगी, टैंक, डोरेमोन कार्टून पात्रों की की पिचकारी बाजार में उपलब्ध हैं। इन पिचकारी के रेट में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस साल 10 से 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इस कारण ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। लोग पिचकारी खरीदने से पहले सोचने को मजबूर हैं। संवाद
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इस बार बाजार में कोई नई पिचकारी नहीं आई है। कोरोना की दहशत के चलते इस बार पिचकारी का माल कम तैयार हुआ है। पिछले साल की अपेक्षा गुलाल भी महंगा है। पिचकारी के दामों में 10 से 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
-प्रवीण, दुकानदार
इस बार बाजार में होली के लिए नई पिचकारी नहीं आई है। रंग-गुलाल के दाम भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ गए हैं। इस कारण पिचकारी खरीदने में अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है, लेकिन दो वर्ष बाद होली खुलकर मनाएंगे।
- सचिन ग्राहक