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हाथरस : मकान के बदले अब तक मिले सिर्फ आश्वासन
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हाथरस : झोपड़ी में गुजर करतीं सर्वेश कुमारी। संवाद
- फोटो : SASNI
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
ग्रामीण क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने से आज भी गरीब परिवार वंचित हैं, लेकिन सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद जरूरतमंदों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। मजबूरी में पात्र लोग घास-फूस की टटिया या छप्पर के नीचे जिंदगी बसर करने के लिए मजबूर हैं। पात्रता तय होने के बाद भी बार-बार लाभार्थियों का नाम सूची से कट जाता है। वर्षों बीत जाने के बाद भी इन बेचारों को छत नसीब नहीं हुई है। ये लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा-लगाकर थक चुके हैं, लेकिन अधिकारी हर बार टालमटोल कर देते हैं। कहीं गांव की पार्टीबंदी के चलते जरूरतमंदों के नाम पात्रता सूची में शामिल नहीं हो पाते तो कहीं किसी और वजह से। दफ्तरों में पहुंचने पर उन्हें सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिलता। संवाद
बोले जरूरतमंद
गरीब होने के बाद भी आवास योजना का कोई लाभ नहीं मिला है। गांव में कोई जमीन जायदाद नहीं है। भूमिहीन हूं। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। हर बार कर्मचारी आवास देने का आश्वासन दे जाते हैं, लेकिन गांव के जनप्रतिनिधियों ने आज तक सूची में नाम नहीं आने दिया है।
-बीना देवी पत्नी दयाशंकर निवासी अमोखरी
आवास के लिए मेरे नाम का कई बार सर्वे हो चुका है, लेकिन अभी तक सिर ढकने के लिए छत नहीं मिली है। दीवार पर छप्पर डालकर गुजारा कर रही हूं। कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए हैं, लेकिन सिवाय झूठे आश्वासन के कुछ नहीं मिला है। यह कहा जाता है कि पात्र होंगे तो नंबर आ जाएगा।
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-चंद्रवती पत्नी सुनीलदत्त निवासी धतरोई
मेरा परिवार गरीब है। भूमिहीन हूं। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। मजदूरी करके गुजर-बसर करते हैं। सिर ढंकने के लिए छप्पर पड़ा है, लेकिन आज तक आवास नहीं मिला है।
-सर्वेश कुमारी पत्नी ओमवीर सिंह निवासी अमोखरी
ये महिलाएं गरीब परिवार की हैं। इनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है। इन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ मिलना चाहिए। प्रधान बनने के बाद मामला संज्ञान में आया है। इनका आवास बनवाने का प्रयास करूंगी।
-नीलम सेंगर ग्राम प्रधान अमोखरी
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ग्रामीण क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने से आज भी गरीब परिवार वंचित हैं, लेकिन सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद जरूरतमंदों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। मजबूरी में पात्र लोग घास-फूस की टटिया या छप्पर के नीचे जिंदगी बसर करने के लिए मजबूर हैं। पात्रता तय होने के बाद भी बार-बार लाभार्थियों का नाम सूची से कट जाता है। वर्षों बीत जाने के बाद भी इन बेचारों को छत नसीब नहीं हुई है। ये लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा-लगाकर थक चुके हैं, लेकिन अधिकारी हर बार टालमटोल कर देते हैं। कहीं गांव की पार्टीबंदी के चलते जरूरतमंदों के नाम पात्रता सूची में शामिल नहीं हो पाते तो कहीं किसी और वजह से। दफ्तरों में पहुंचने पर उन्हें सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिलता। संवाद
बोले जरूरतमंद
गरीब होने के बाद भी आवास योजना का कोई लाभ नहीं मिला है। गांव में कोई जमीन जायदाद नहीं है। भूमिहीन हूं। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। हर बार कर्मचारी आवास देने का आश्वासन दे जाते हैं, लेकिन गांव के जनप्रतिनिधियों ने आज तक सूची में नाम नहीं आने दिया है।
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-बीना देवी पत्नी दयाशंकर निवासी अमोखरी
आवास के लिए मेरे नाम का कई बार सर्वे हो चुका है, लेकिन अभी तक सिर ढकने के लिए छत नहीं मिली है। दीवार पर छप्पर डालकर गुजारा कर रही हूं। कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए हैं, लेकिन सिवाय झूठे आश्वासन के कुछ नहीं मिला है। यह कहा जाता है कि पात्र होंगे तो नंबर आ जाएगा।
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-चंद्रवती पत्नी सुनीलदत्त निवासी धतरोई
मेरा परिवार गरीब है। भूमिहीन हूं। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। मजदूरी करके गुजर-बसर करते हैं। सिर ढंकने के लिए छप्पर पड़ा है, लेकिन आज तक आवास नहीं मिला है।
-सर्वेश कुमारी पत्नी ओमवीर सिंह निवासी अमोखरी
ये महिलाएं गरीब परिवार की हैं। इनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है। इन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ मिलना चाहिए। प्रधान बनने के बाद मामला संज्ञान में आया है। इनका आवास बनवाने का प्रयास करूंगी।
-नीलम सेंगर ग्राम प्रधान अमोखरी