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हाथरस : जिले भर में 53 दिन में सिर्फ 150 किसानों ने बेचा गेहूं
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
जिले में तमाम कोशिशों के बाद 53 दिन में सिर्फ 150 किसानों ने ही क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचा है। खरीद के रफ्तार न पकड़ने के कारण साढ़े चार एमटी गेहूं केंद्रों पर पहुंचा है। केंद्रों पर पर्याप्त गेहूं न आने के कारण हाथरस मंडल में दूसरे स्थान पर और प्रदेश में 24 पायदान पर टिका हुआ है। इसे लेकर अधिकारी भी खासे परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि शासन स्तर से गेहूं खरीद के लिए 67 हजार मैट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया। इसके सापेक्ष अधिकारियों ने जिले में 67 क्रय केंद्र बनाए। एक अप्रैल से जिले के केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू हुई। शुरुआत में अधिकारियों का लगा अभी गेहूं निकल रहा है। उसके बाद मंडी के आढ़तियों द्वारा अधिक रेट पर गेहूं की खरीद की जाने लगे।
क्रय केंद्रों पर दो हजार पंद्रह रुपये मूल्य तय किया गया। वहीं आढ़तियों द्वारा 22 व 23 रुपये क्विंटल गेहूं खरीदा गया। इस कारण केंद्रों की ओर किसानों ने रुख नहीं किया। डिप्टी आरएमओ शिशिर कुमार का कहना है कि आढ़त पर रेट अधिक होने के चलते किसानों क्रय केंद्रों पर गेहूं कम बेचा है। अभी तक साढ़े चार सौ एमटी गेहूं की खरीद हो पाई है।
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जिले में तमाम कोशिशों के बाद 53 दिन में सिर्फ 150 किसानों ने ही क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचा है। खरीद के रफ्तार न पकड़ने के कारण साढ़े चार एमटी गेहूं केंद्रों पर पहुंचा है। केंद्रों पर पर्याप्त गेहूं न आने के कारण हाथरस मंडल में दूसरे स्थान पर और प्रदेश में 24 पायदान पर टिका हुआ है। इसे लेकर अधिकारी भी खासे परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि शासन स्तर से गेहूं खरीद के लिए 67 हजार मैट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया। इसके सापेक्ष अधिकारियों ने जिले में 67 क्रय केंद्र बनाए। एक अप्रैल से जिले के केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू हुई। शुरुआत में अधिकारियों का लगा अभी गेहूं निकल रहा है। उसके बाद मंडी के आढ़तियों द्वारा अधिक रेट पर गेहूं की खरीद की जाने लगे।
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क्रय केंद्रों पर दो हजार पंद्रह रुपये मूल्य तय किया गया। वहीं आढ़तियों द्वारा 22 व 23 रुपये क्विंटल गेहूं खरीदा गया। इस कारण केंद्रों की ओर किसानों ने रुख नहीं किया। डिप्टी आरएमओ शिशिर कुमार का कहना है कि आढ़त पर रेट अधिक होने के चलते किसानों क्रय केंद्रों पर गेहूं कम बेचा है। अभी तक साढ़े चार सौ एमटी गेहूं की खरीद हो पाई है।
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