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हाथरस : चेक बाउंस में एक साल का कारावास, 25 लाख अर्थदंड लगाया

Sat, 04 Jun 2022 11:15 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jun 2022 11:15 PM IST
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Hathras: One year imprisonment in check bounce, 25 lakh fine imposed
संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आलू खरीद के बाद भुगतान के लिए दिए गए चेक के बाउंस हो जाने के मामले में आलू व्यापारी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आलू व्यापारी को एक साल के साधारण कारावास और 25 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
नगला हरनाम एदलपुर निवासी गिर्राज सिंह पुत्र घनश्याम सिंह द्वारा न्यायालय में अनिल त्यागी पुत्र राधेश्याम त्यागी निवासी सर्वोदय नगर आश्रम के सामने डाकखाना रोड के खिलाफ परिवाद पत्र धारा 138 एनआई एक्ट के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया था। वह जय गंगे मां कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड नगला हरनाम का निदेशक है।
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वाद में हरनाम ने कहा है कि वर्ष 2016 में व्यापारी द्वारा उनके शीतगृह पर आलू की खरीद-फरोख्त का कारोबार किसान शीतगृह के खाते से किया जाता था। व्यापारी ने वर्ष 2016 में व्यापार की बकाया धनराशि का अधिक हिस्सा शीतगृह पर अदा कर दिया था, लेकिन व्यापारी की तरफ उनका वर्ष 2016 का 18.13 लाख रुपया बकाया रह गया था।
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इसकी अदायगी वर्ष 2017 में करनी थी। 17 सितंबर 2017 को जब वह व्यापारी के घर अपनी बकाया धनराशि लेने के लिए गए तो व्यापारी द्वारा अपने पंजाब नेशनल बैंक सादाबाद शाखा के चेक दिया गया। चेक को भुगतान के लिए कोल्ड स्टोर के खाता केनरा बैंक शाखा सादाबाद में जमा किया। इसे बैंक द्वारा मुख्य शाखा खंदौली आगरा के लिए भुगतान के लिए भेज दिया गया।
बैंक ने व्यापारी के प्रदत्त चेक को अनादरित कर उसको 27 सितंबर 2017 को वापस कर दिया। आलू व्यापारी की ओर से इस मामले में संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद शीतगृह के निदेशक ने अधिवक्ता के माध्यम से 10 अक्तूबर 2017 को एक नोटिस चेक की धनराशि के भुगतान के लिए भेजा।
नोटिस के बावजूद उसको चेक की धनराशि का भुगतान नहीं किया। इस मामले की सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. लक्की ने आरोपी अनिल त्यागी को धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दोषी पाया। व्यापारी को 25 लाख रुपये के जुर्माना और एक साल के साधारण कारावास की सजा से दंडित किया गया है।

अर्थदंड अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही धारा 357 (1)(बी) दंड प्रक्रिया संहिता के अनुपालन में आदेश किया जाता है कि आरोपी अर्थदंड में से 23.50 लाख रुपये परिवादी को क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करेगा। शेष धनराशि 1.50 लाख रुपये अभियोजन में हुए खर्चा के लिए राज्य के पक्ष में जमा करेगा।
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