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हाथरस: बिटिया की मौत को एक माह बीता, सच अभी नहीं आया सामने

Wed, 28 Oct 2020 11:30 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2020 11:30 PM IST
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Hathras: One month passed on the death of daughter, the truth has not been revealed
हाथरस: बिटिया के गांव के रास्ते पर तैनात पुलिस बल। - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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चंदपा क्षेत्र की बिटिया को इस दुनिया से विदा हुए आज एक माह हो चुका है, लेकिन बिटिया के असली गुनहगार कौन हैं, यह सवाल अभी भी एक रहस्य बना हुआ है। पिछले करीब दो सप्ताह से सीबीआई इस मामले की विवेचना कर रही है। जांच में नए मोड़ भी आ रहे हैं, लेकिन सभी की टकटकी इस बात पर लगी है कि आखिर सच कब सामने आएगा।
चंदपा क्षेत्र की वाल्मीकि समाज की बिटिया के साथ 14 सितंबर को वारदात हुई। शुरू में उसके गांव के ही एक युवक की संदीप ठाकुर की नामजदगी हुई। मुकदमा जानलेवा हमले का दर्ज कराया गया। उसी दिन बिटिया को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बाद में पुलिस ने विवेचना में गांव के तीन युवकों रामू, रवि व एक अन्य की नामजदगी कर सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया। 28 सितंबर को बिटिया को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भेज दिया गया। वहां 29 सितंबर को उसने आखिरी सांस ली। इससे पहले ही चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था।
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बिटिया जब अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी, तभी इस प्रकरण ने सियासी रंग लेना शुरू कर दिया था। भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर जब अलीगढ़ आए थे तो यह मामला खासा चर्चित हो गया था। 29 सितंबर की रात्रि में ही प्रशासन ने गांव में परिजनों की बिना इजाजत के जबरन बिटिया के शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। इसके बाद माहौल और बिगड़ गया। उसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका जैसे कांग्रेसी नेताओं के अलावा अन्य कई विपक्षी दलों के नेता भी बिटिया के घर पर आए और उसके परिजनों को सांत्वना दी।
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विपक्ष सरकार पर हमलावर रहा। वहीं ठाकुर समाज भी लामबंद हो गया। उसने बिटिया के परिजनों पर हॉरर किलिंग का आरोप लगाना शुरू कर दिया। इससे जातीय तनाव भी फैल गया। मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया। प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। इस मामले में सियासत करने वाले नेताओं पर मुकदमे भी दर्ज हुए। सीबीआई इस मामले की दो सप्ताह से विवेचना कर रही है। जातीय दंगा कराने की साजिश का मुकदमा भी दर्ज कराया गया। जातीय दंगे की साजिश के मुकदमे की जांच एसटीएफ कर रही है। बिटिया के गांव और घर पर धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है, लेकिन अभी इस सवाल का जवाब लोगों को नहीं मिला है कि इस मामले में सच सामने आने में अभी कितना वक्त और लगेगा।

पीड़ित परिवार को न आवास मिला और न ही नौकरी
हाथरस। सरकार ने शुरू में इस मामले में डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की। घटना के बाद बिटिया के पिता से सीएम की फोन पर बात कराई गई। सीएम ने 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद का भरोसा दिया। एक आवास और एक सरकारी नौकरी का भी आश्वासन दिया गया। आर्थिक मदद तो परिजनों को मिल गई है, लेकिन अभी तक न तो आवास मिला है और न ही नौकरी। इसे लेकर सरकार का कोई फरमान भी नहीं आया है।
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