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हाथरस: एक ही सड़क पर तीन बार इंटरलॉकिंग के मामले को निपटाने में जुटे अफसर

Sat, 21 Mar 2020 12:28 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2020 12:28 AM IST
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Hathras: Officers engaged in settling the case of interlocking thrice on the same road
हाथरस: एलआईसी ऑफिस के पीछे बदहाल सड़क। - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले के विकास कार्यों के गुणगान के लिए छपी पुस्तिकाओं ने पंचायती राज विभाग मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी के सामने अफसरों की फजीहत करा दी थी। अब इस फजीहत को बचाने के लिए शुक्रवार को अफसरों के साथ कार्मिक भी पत्रावलियों को पूरा करने व स्थलीय निरीक्षण किए जाने में जुट गए।
सीडीओ आरबी भास्कर का दावा है कि पीडी डीआरडीए को स्थलीय निरीक्षण में सब कुछ सही पाया गया है। इस संबंध में उन्होंने अपनी रिपोर्ट डीएम को दे दी है। हैरानी की बात यह है कि सडक़ निर्माण के लगाए गए शिलालेखों व पुस्तिका में छपे एस्टीमेट में भी झालमेल है। फाइलों में सडक़ की लागत कुछ है और शिलालेखों पर सडक़ निर्माण की लागत कुछ है, इतना ही नहीं पुस्तिका में लागत कुछ और ही अंकित की गई है। अब पूरे मामले में प्रशासनिक अफसर सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं। वहीं क्षेत्रीय लोगों के अनुसार सडक़ निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई है, तकनीकी टीम द्वारा कोई भी मानक पूरा नहीं किया गया है।
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उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की ओर से जिले में कराए गए विकास कार्यों के बखान के लिए विधानसभा बार पुस्तिकाएं छपवाई गई। इन पुस्तिकाओं में विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत विधानसभा क्षेत्रों में हुए कार्यों का बखान किया गया। इस गुणगान के बीच ऐसा मामला सामने आया कि जिले के अफसरों ने चुप्पी साध ली और प्रभारी मंत्री के सामने फजीहत शुरू हो गई। जिले के हाथरस विधान सभा क्षेत्र के विकास कार्यों के छपी पुस्तिका में शहरी क्षेत्र में एक सडक़ पर तीन बार सांसद निधि से इंटरलॉकिंग कार्य किए जाने का मामला सामने आया। सांसद निधि से कराए गए कार्यों में सामने आया कि एलआईसी ऑफिस के पीछे एक सडक़ पर तीन बार इंटरलॉकिंग की गई।
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इस मामले के सुर्खियों में आते ही अफसर हरकत में आ गए। पत्रावलियों को खंगाला गया और मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण किया गया। पत्रावलियों को पूर्ण किया गया। हैरानी की बात सामने आई कि मौके पर लगे शिलालेखों पर एस्टीमेट के आधार पर लंबाई व लागत कुछ लिखी हुई है और पुस्तिका में कुछ और अंकित की गई है। इस मामले को अनदेखा कर रिपोर्ट तैयार कर डीएम को सौंप दी गई है। सीडीओ आरबी भास्कर का दावा है कि पीडी ने स्थलीय निरीक्षण के दौरान सब कुछ ठीक पाया है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि महज दो सालों में ही सडक़ धसने लग गई है, नालियां टूट गई हैं। मानकों की अनदेखी की गई है। लोगों ने इस सडक़ निर्माण की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
सडक़ निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई है। नाली व सडक़ दो बरसातों में धस गई है। नालियों के निर्माण कार्य में खानापूर्ति बरती गई है। सडक़ को मुख्य मार्ग से नीचा रखा गया है, जिसके कारण जल निकासी नहीं होती है।

कन्हैया, स्थानीय निवासी
महज दो साल में ही सडक़ उखडने लग गई है। संबंधित कार्यदायी संस्था मनमाने तरीके से सडक़ निर्माण किया है। निर्माण कार्य में घटिया साम्रगी का प्रयोग किया गया है। इस ओर किसी भी अधिकारी ने कोई ध्यान नहीं दिया है।
बृजेश कुमार, स्थानीय निवासी
शिलालेखों पर लागत अगर एस्टीमेट से अलग अंकित है, तो इसकी जांच कराई जाएगी।
आरबी भास्कर, सीडीओ
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