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हाथरस : सिर पर छत नहीं, घास-फूस के नीचे कर रहे गुजारा
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हाथरस : आवास की आस में झोपड़ी में गुजर-बसर करते गरीब परिवार। संवाद
- फोटो : SASNI
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत क्षेत्र के कई लाभार्थियों को आज तक आवास का इंतजार है। गांव की गुटबाजी के कारण पात्र परिवार आज भी आवास की सुविधा से वंचित हैं। मजबूर होकर यह लोग खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं। गरीबी की पात्रता तय होने के बावजूद बार-बार सूची से नाम कट जाता है। वर्षों बाद भी इन जरूरतमंदों को सिर पर छत नसीब नहीं हुई है। जरूरतमंद घर की आस में दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन अधिकारी व कर्मचारी टालमटोल कर देते हैं। यह लोग घास-फूस की छत बनाकर जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं। संवाद
मेरे नाम से अंत्योदय कार्ड भी है, जो गरीबी का प्रमाण है। गांव में कोई जमीन जायदाद नहीं है। भूमिहीन हूं। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। एकमात्र बेटा है, जो मजदूरी करके परिवार का गुजारा करता मैं गांव में बचपन से अपनी मां के साथ रह रही हूं। आवास की पात्रता सूची में मां का नाम था, लेकिन आज तक आवास नहीं बना है।
-फूलवती पत्नी केशव देव निवासी मोहरिया
आवास के लिए मेरे नाम का कई बार सर्वे हो चुका है। मेरे पास सिर ढकने के लिए छत नहीं है। दीवार पर छप्पर डालकर गुजारा कर रही हूं। कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए हैं, लेकिन झूठे आश्वासन मिले हैं। यह बता दिया जाता है कि पात्र होंगे तो नंबर आ जाएगा।
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-मंजू देवी पत्नी वीरेश निवासी टिकारी
कलावती गरीब महिला है। उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ मिलना चाहिए। यह मामला संज्ञान में आया है। इनका आवास बनवाने के लिए प्रयास करुंगी।
-सुधा देवी, ग्राम प्रधान मोहरिया
मंजू देवी का परिवार गरीब है। इनके पास रहने के लिए कोई आवास नहीं है। दीवार पर छप्पर डालकर निवास करती हैं। इन्हे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिलना चाहिए।
-बौबी देवी, ग्राम प्रधान टिकारी
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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत क्षेत्र के कई लाभार्थियों को आज तक आवास का इंतजार है। गांव की गुटबाजी के कारण पात्र परिवार आज भी आवास की सुविधा से वंचित हैं। मजबूर होकर यह लोग खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं। गरीबी की पात्रता तय होने के बावजूद बार-बार सूची से नाम कट जाता है। वर्षों बाद भी इन जरूरतमंदों को सिर पर छत नसीब नहीं हुई है। जरूरतमंद घर की आस में दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन अधिकारी व कर्मचारी टालमटोल कर देते हैं। यह लोग घास-फूस की छत बनाकर जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं। संवाद
मेरे नाम से अंत्योदय कार्ड भी है, जो गरीबी का प्रमाण है। गांव में कोई जमीन जायदाद नहीं है। भूमिहीन हूं। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। एकमात्र बेटा है, जो मजदूरी करके परिवार का गुजारा करता मैं गांव में बचपन से अपनी मां के साथ रह रही हूं। आवास की पात्रता सूची में मां का नाम था, लेकिन आज तक आवास नहीं बना है।
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-फूलवती पत्नी केशव देव निवासी मोहरिया
आवास के लिए मेरे नाम का कई बार सर्वे हो चुका है। मेरे पास सिर ढकने के लिए छत नहीं है। दीवार पर छप्पर डालकर गुजारा कर रही हूं। कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए हैं, लेकिन झूठे आश्वासन मिले हैं। यह बता दिया जाता है कि पात्र होंगे तो नंबर आ जाएगा।
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-मंजू देवी पत्नी वीरेश निवासी टिकारी
कलावती गरीब महिला है। उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ मिलना चाहिए। यह मामला संज्ञान में आया है। इनका आवास बनवाने के लिए प्रयास करुंगी।
-सुधा देवी, ग्राम प्रधान मोहरिया
मंजू देवी का परिवार गरीब है। इनके पास रहने के लिए कोई आवास नहीं है। दीवार पर छप्पर डालकर निवास करती हैं। इन्हे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिलना चाहिए।
-बौबी देवी, ग्राम प्रधान टिकारी