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हाथरस : ऐसा मंजर 20 साल की नौकरी में आज तक नहीं देखा

Fri, 14 May 2021 10:52 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 14 May 2021 10:52 PM IST
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Hathras: Never seen such a sight in a 20-year job
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिला अस्पताल के शव वाहन चालक मुकेश कोरोना काल में नियमित अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। पिछले एक महीने में मुकेश करीब दो दर्जन मृतकोें से ज्यादा शवों को उनके ठिकाने तक पहुंचा चुके हैं। उनका कहना है कि इतनी लाशें तो एक साल में नहीं होती थीं, जितनी पिछले एक माह में हो गईं। कोई कोविड से संक्रमित था तो किसी ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। कई लावारिस शवों को मुकेश ने श्मशान या कब्रिस्तान तक पहुंचाया।
बागला जिला संयुक्त अस्पताल में एक ही शव वाहन संचालित है। उस पर मुकेश कुमार चालक हैं। इसी अस्पताल के दूसरे परिसर में एमडीटीबी अस्पताल में कोविड अस्पताल स्थापित कर दिया गया है। वहां भी कोविड मरीज दम तोड़ रहे है। साथ ही बागला चिकित्सालय और महिला अस्पताल में भी मरीजों की मौत होती है।
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हालांकि काफी लोग मौत के बाद अपने साधनों से अपने शवों को ले जाते हैं, लेकिन कोरोना काल में काफी लोगों को शव वाहन भी नहीं मिल रहे। ऐसे में शव वाहन चालक मुकेश की ड्यूटी और बढ़ गई है। मुकेश का कहना है कि वह 20 साल से नौकरी कर रहे हैं, लेकिन कोरोना काल में जो हालात हैं, ऐसी स्थिति उन्होंने पहले नहीं देखी। उनका कहना है कि करीब एक माह में वह दो दर्जन से ज्यादा लाशों को उनके ठिकाने तक पहुंचा चुके हैं। इनमें कुछ लोगों की मौत कोरोना से हुई तो कुछ ने जिला अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। कुछ अस्पताल के गेट पर ही मर गए।
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उनका कहना है कि इसी माह कई अज्ञात लोगों की मौत भी उपचार के दौरान हो गई और उनके शवों को उन्होंने श्मशान स्थल अथवा कब्रिस्तान तक पहुंचाया। कई बार तो स्थिति यह हो गई कि तीन-तीन शव एक साथ रखे हैं और यही समझ में नहीं आया कि आखिर किस शव को पहले गाड़ी में ले जाएं। मुकेश का कहनला है कि कई लोग तो अपने वाहनों से ही शव ले जाते हैं। ऐसे में मरने वालों की संख्या का तो अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता। उनका कहना है कि जब रोते-पीटते लोग अपने किसी परिजन के शव को गाड़ी में रखवाते हैं तो उनकी भी आंखें नम हो जाती हैं। ऐसे में वह पीड़ित लोगों को सिवाय दिलासा देने के आखिर कर भी क्या सकते हैं।
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