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हाथरस : कोरोना काल में मंडी के राजस्व में आई गिरावट
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना की दूसरी लहर ने आमजन को तो मुकिश्ल में डाल ही रखा है, मंडी सहित कई विभागों के राजस्व को भी जबर्दस्त चोट पहुंच रही है। अप्रैल माह में साप्ताहिक लॉकडाउन के चलते मंडी पूरी तरह नहीं खुली। इस कारण मंडी प्रशासन को 17 लाख रुपये के सापेक्ष मात्र पांच लाख रुपये का ही राजस्व मिला है। अब लॉकडाउन के चलते गल्ला मंडी पूरी तरह बंद है। हालांकि केवल फल और सब्जी मंडी ही कुछ समय के लिए खुल रही हैं, लेकिन इनसे राजस्व की भरपाई नहीं हो पा रही। राजस्व में गिरावट से मंडी अधिकारी खासे परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस मंडी में गल्ला आढ़तियों की करीब 200 दुकानें हैं। 200 दुकानें सब्जी मंडी में हैं। बीते साल प्रदेश सरकार ने व्यापारियों को राहत देने के लिए 46 तरह की फल और सब्जियों को करमुक्त किया गया था। तब से मंडी की हालत सही नहीं चल पा रही है। बीच में मंडी कर्मियों को यह आदेश दिया गया था कि राजस्व लाओ, वेतन पाओ।
अब अप्रैल माह में कोरोना संक्रमण ने मंडी प्रशासन की मुश्किलें फिर से बढ़ा दी हैं। अप्रैल माह में शासन से हाथरस मंडी को 17 लाख रुपये के राजस्व की वसूली का लक्ष्य मिला है। इसके सापेक्ष मात्र पांच लाख रुपये की ही वसूली हो पाई। मंडी सचिव यशपाल सिंह का कहना है कि कोरोना के चलते वीकली लॉकडाउन हुआ। मंडी में फसलों की आवक भी कम हुई। इस कारण मात्र पांच लाख रुपये का राजस्व ही मिल सका है।
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आलू से मिलता था अच्छा टैक्स
प्रदेश सरकार ने 46 तरह की फल और सब्जियों को कर मुक्त कर दिया गया है। इसमें आलू भी शामिल है। मंडी प्रशासन को आलू से अच्छा खासा राजस्व मिलता था। मंडी से आलू कई राज्यों को जाता था। आलू के करमुक्त होने से मंडी का राजस्व काफी प्रभावित हुआ है। इस बात को खुद अधिकारी भी मान रहे हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर ने आमजन को तो मुकिश्ल में डाल ही रखा है, मंडी सहित कई विभागों के राजस्व को भी जबर्दस्त चोट पहुंच रही है। अप्रैल माह में साप्ताहिक लॉकडाउन के चलते मंडी पूरी तरह नहीं खुली। इस कारण मंडी प्रशासन को 17 लाख रुपये के सापेक्ष मात्र पांच लाख रुपये का ही राजस्व मिला है। अब लॉकडाउन के चलते गल्ला मंडी पूरी तरह बंद है। हालांकि केवल फल और सब्जी मंडी ही कुछ समय के लिए खुल रही हैं, लेकिन इनसे राजस्व की भरपाई नहीं हो पा रही। राजस्व में गिरावट से मंडी अधिकारी खासे परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस मंडी में गल्ला आढ़तियों की करीब 200 दुकानें हैं। 200 दुकानें सब्जी मंडी में हैं। बीते साल प्रदेश सरकार ने व्यापारियों को राहत देने के लिए 46 तरह की फल और सब्जियों को करमुक्त किया गया था। तब से मंडी की हालत सही नहीं चल पा रही है। बीच में मंडी कर्मियों को यह आदेश दिया गया था कि राजस्व लाओ, वेतन पाओ।
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अब अप्रैल माह में कोरोना संक्रमण ने मंडी प्रशासन की मुश्किलें फिर से बढ़ा दी हैं। अप्रैल माह में शासन से हाथरस मंडी को 17 लाख रुपये के राजस्व की वसूली का लक्ष्य मिला है। इसके सापेक्ष मात्र पांच लाख रुपये की ही वसूली हो पाई। मंडी सचिव यशपाल सिंह का कहना है कि कोरोना के चलते वीकली लॉकडाउन हुआ। मंडी में फसलों की आवक भी कम हुई। इस कारण मात्र पांच लाख रुपये का राजस्व ही मिल सका है।
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आलू से मिलता था अच्छा टैक्स
प्रदेश सरकार ने 46 तरह की फल और सब्जियों को कर मुक्त कर दिया गया है। इसमें आलू भी शामिल है। मंडी प्रशासन को आलू से अच्छा खासा राजस्व मिलता था। मंडी से आलू कई राज्यों को जाता था। आलू के करमुक्त होने से मंडी का राजस्व काफी प्रभावित हुआ है। इस बात को खुद अधिकारी भी मान रहे हैं।