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हाथरस : द्वापर युग से भक्तों पर कृपा बरसा रहीं मां भद्रकाली

Wed, 28 Sep 2022 12:04 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Sep 2022 12:04 AM IST
सार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)कस्बा की पूर्व दिशा में स्थित मां भद्रकाली शक्तिपीठ मंदिर का इतिहास महाभारत कालीन है। जिस रास्ते से मुगल शासक की सेना गई, वह मूर्तियों को रास्ते में फेंकते गए और वहीं माता ने स्वप्न्न देकर उन्ही स्थानों पर मंदिर का निर्माण कराया। संवादमां के दरबार में जो भी भक्त सच्चे दिल से मन्नतें मांगता है, उसकी मन्नत अवश्य पूरी होती है।

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Hathras: Maa Bhadrakali showering blessings on devotees since Dwapar era
हाथरस : मां भद्रकाली शक्ति पीठ। संवाद - फोटो : SHAPHU

विस्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)
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कस्बा की पूर्व दिशा में स्थित मां भद्रकाली शक्तिपीठ मंदिर का इतिहास महाभारत कालीन है। द्वापर युग से ही मां भद्रकाली भक्तों पर कृपा बरसा रही हैं। इसका उल्लेख श्रीमद् भागवत कथा में भी आता है। जब भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा अपने मामा कंस का वध किया था, तब कंस के सुसर मगध राजा जरासंध ने दामाद की मौत पर मथुरा पर कई बार आक्रमण किया था।
इस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने राजा जरासंध के आक्रमण की तैयारी के बारे में सूचना इकट्ठी करने के लिए यहां एक चौकी की स्थापना की थी। समय के साथ यह मंदिर भी जमीन में समाता रहा, लेकिन माता अपने भक्तों को सपने में आती रही और भक्त मंदिर एवं मूर्ति की स्थापना करते रहे।
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मुगल सम्राट औरंगजेब ने इस मंदिर की मूर्तियों को तोड़ दिया था। जिस रास्ते से मुगल शासक की सेना गई, वह मूर्तियों को रास्ते में फेंकते गए और वहीं माता ने स्वप्न्न देकर उन्ही स्थानों पर मंदिर का निर्माण कराया। किवदंती है लगभग 300 वर्ष पहले इस मंदिर पर एक बरात आई थी, जिसमें बरातियों ने पूजा करने आई एक कन्या के साथ अभद्रता की। वह कन्या माता की अनन्य भक्त थी। उसने माता को याद किया।
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उसने मां जलाभिषेक के बाद जग में बचे जल को से बरातियों के ऊपर छिड़क दिया, उसी समय पूरी बरात पत्थर में तब्दील हो गई। इसके पाषाण खंड आज भी मंदिर परिसर में मौजूद हैं। मां की एक प्राचीन मूर्ति मथुरा के डेंपियर नगर के म्यूजियम में मौजूद है। समय के साथ मंदिर का स्वरूप भी बदलता रहा। वर्तमान में इस स्थान पर विशाल मंदिर का निर्माण हो चुका है। संवाद

मां के दरबार में जो भी भक्त सच्चे दिल से मन्नतें मांगता है, उसकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। आज भी मां के दरबार में हजारों श्रद्धालु मां का आशीर्वाद लेने आते रहते हैं।
- धर्मेंद्र शुक्ला, पुजारी मां भद्रकाली शक्ति पीठ सहपऊ
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