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हाथरस : अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला, प्रयोगशाला में नहीं हो रहीं जांचें
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
जिले की सरकारी चिकित्सकीय सेवा बदहाल है। बागला जिला अस्पताल की ओपीडी में सुबह अमर उजाला की टीम ने जब पड़ताल की तो यहां का नजारा हतप्रभ कर देने वाला था। अस्पताल में चिकित्सक नहीं थे। मरीज इधर-उधर भटक रहे थे। अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला बंद था। बायोकेमिकल लैब में एसी खराब होने की वजह से काफी जांच नहीं हुई। मरीज व उनके तीमारदार वहां से निराश होकर चले गए।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के साथ-साथ संसाधनों का टोटा है। अस्पताल में 28 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन केवल 10 की ही तैनाती है। इसमें से भी इन्हीं चिकित्सकों को इमरजेंसी के अलावा पोस्टमार्टम गृह में भी ड्यूटी लगाई जाती है।
सोमवार को जब ओपीडी खुली तो वहां करीब 1800 मरीज थे। इन्हें देखने के लिए सिर्फ पांच चिकित्सक मौजूद थे। ऐसे में मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों को तो घंटों इंतजार के बाद भी उपचार नहीं मिल सका। एक चिकित्सक के अवकाश पर रहने के कारण अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटका रहा।
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केस नंबर - 1
ओपीडी वाले इमरजेंसी, इमरजेंसी वाले ओपीडी में टरकाते रहे
चंदपा क्षेत्र के गांव बिसाना निवासी चंद्रपाल सिंह अपनी पत्नी पुष्पा को बेहद गंभीर हालत में उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर आए। उनकी 55 वर्षीय पत्नी को बुखार था और वह बार-बार बेहोश हो रही थी। वहां ओपीडी में उन्होंने जब चिकित्सक को दिखाया तो चिकित्सक ने उनकी हालत गंभीर बताते हुए उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराने को कहा।
जब परिजन उन्हें लेकर इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे तो वहां फिर यह कह दिया गया कि यह इमरजेंसी का केस नहीं हैं। इस पर फिर यह लोग उन्हें ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने लेकर आए तो वहां चिकित्सक ने यह कह दिया कि यह इमरजेंसी वार्ड का ही केस है। यह लोग फिर इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे तो वहां फिर ओपीडी में भेज दिया। इस पर ओपीडी में फिर यह लोग पहुंचे तो वहां चिकित्सक ने यह कह दिया कि महिला की हालत गंभीर है और उसे भर्ती करना पड़ेगा।
भर्ती सीएमएस के आदेश पर ही किया जाएगा। यह लोग सीएमएस के कार्यालय पहुंचे तो वहां इन्हें सीएमएस नहीं मिले। महिला के परिजनों का कहना था कि वह पिछले चार घंटे से अस्पताल में कभी इमरजेंसी वार्ड तो कभी ओपीडी में भटक रहे हैं लेकिन अभी तक इलाज ही शुरू नहीं किया गया है।
केस नंबर - 02
अल्ट्रासाउंड बंद होने पर लौटे शीलेंद्रपाल
हसायन के गांव अंडौली के शीलेंद्रपाल सिंह अपने पेट का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए काफी दूर से यहां आए लेकिन अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ताला लटका हुआ था। उन्हें एक्स-रे भी कराना था। एक्स-रे तो उन्होंने करा लिया लेकिन वह काफी देर तक इस इंतजार में बैठे रहे कि अल्ट्रासाउंड कक्ष खुलेगा और अल्ट्रासाउंड हो जाएगा लेकिन कई घंटे बाद भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। ऐसे में शीलेंद्र का कहना था कि अब या तो उन्हें अस्पताल आना पड़ेगा या फिर किसी निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराना होगा।
केस नंबर -03
लैब की एसी खराब बता नहीं की बीपी की जांच
सादाबाद की मथुरा रोड निवासी एक महिला अनीता यहां अपनी ब्लड शुगर की जांच कराने के लिए आई। अस्पताल में उन्होंने पर्चा भी बनवा लिया और लैब में भी भेज दिया लेकिन घंटों इंतजार के बाद वहां यह कह दिया गया कि अब यहां एसी खराब हो गया और इसके चलते आज ब्लड शुगर की जांच नहीं हो सकती। ऐसे में वह निराश होकर वापस लौट आई। कई और मरीज भी इसी तरह से वापस लौट आए। हालांकि कुछ मरीजों के नमूने ले लिए गए।
- जिला अस्पताल में 28 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन इनके सापेक्ष केवल 10 की तैनाती है। इसमें भी कुछ चिकित्सकों की इमरजेंसी कक्ष, पोस्टमार्टम में ड्यूटी रहती हैं। अल्ट्रासाउंड कक्ष में तैनात चिकित्सक इमरजेंसी ड्यूटी के चलते आज मौजूद नहीं थे। लैब का एसी खराब हो गया था। इसकी वजह से वहां कुछ समय के लिए काम प्रभावित हुआ होगा। एसी ठीक करा लिया जाएगा। - डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस, बागला जिला अस्पताल।
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जिले की सरकारी चिकित्सकीय सेवा बदहाल है। बागला जिला अस्पताल की ओपीडी में सुबह अमर उजाला की टीम ने जब पड़ताल की तो यहां का नजारा हतप्रभ कर देने वाला था। अस्पताल में चिकित्सक नहीं थे। मरीज इधर-उधर भटक रहे थे। अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला बंद था। बायोकेमिकल लैब में एसी खराब होने की वजह से काफी जांच नहीं हुई। मरीज व उनके तीमारदार वहां से निराश होकर चले गए।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के साथ-साथ संसाधनों का टोटा है। अस्पताल में 28 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन केवल 10 की ही तैनाती है। इसमें से भी इन्हीं चिकित्सकों को इमरजेंसी के अलावा पोस्टमार्टम गृह में भी ड्यूटी लगाई जाती है।
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सोमवार को जब ओपीडी खुली तो वहां करीब 1800 मरीज थे। इन्हें देखने के लिए सिर्फ पांच चिकित्सक मौजूद थे। ऐसे में मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों को तो घंटों इंतजार के बाद भी उपचार नहीं मिल सका। एक चिकित्सक के अवकाश पर रहने के कारण अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटका रहा।
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केस नंबर - 1
ओपीडी वाले इमरजेंसी, इमरजेंसी वाले ओपीडी में टरकाते रहे
चंदपा क्षेत्र के गांव बिसाना निवासी चंद्रपाल सिंह अपनी पत्नी पुष्पा को बेहद गंभीर हालत में उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर आए। उनकी 55 वर्षीय पत्नी को बुखार था और वह बार-बार बेहोश हो रही थी। वहां ओपीडी में उन्होंने जब चिकित्सक को दिखाया तो चिकित्सक ने उनकी हालत गंभीर बताते हुए उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराने को कहा।
जब परिजन उन्हें लेकर इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे तो वहां फिर यह कह दिया गया कि यह इमरजेंसी का केस नहीं हैं। इस पर फिर यह लोग उन्हें ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने लेकर आए तो वहां चिकित्सक ने यह कह दिया कि यह इमरजेंसी वार्ड का ही केस है। यह लोग फिर इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे तो वहां फिर ओपीडी में भेज दिया। इस पर ओपीडी में फिर यह लोग पहुंचे तो वहां चिकित्सक ने यह कह दिया कि महिला की हालत गंभीर है और उसे भर्ती करना पड़ेगा।
भर्ती सीएमएस के आदेश पर ही किया जाएगा। यह लोग सीएमएस के कार्यालय पहुंचे तो वहां इन्हें सीएमएस नहीं मिले। महिला के परिजनों का कहना था कि वह पिछले चार घंटे से अस्पताल में कभी इमरजेंसी वार्ड तो कभी ओपीडी में भटक रहे हैं लेकिन अभी तक इलाज ही शुरू नहीं किया गया है।
केस नंबर - 02
अल्ट्रासाउंड बंद होने पर लौटे शीलेंद्रपाल
हसायन के गांव अंडौली के शीलेंद्रपाल सिंह अपने पेट का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए काफी दूर से यहां आए लेकिन अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ताला लटका हुआ था। उन्हें एक्स-रे भी कराना था। एक्स-रे तो उन्होंने करा लिया लेकिन वह काफी देर तक इस इंतजार में बैठे रहे कि अल्ट्रासाउंड कक्ष खुलेगा और अल्ट्रासाउंड हो जाएगा लेकिन कई घंटे बाद भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। ऐसे में शीलेंद्र का कहना था कि अब या तो उन्हें अस्पताल आना पड़ेगा या फिर किसी निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराना होगा।
केस नंबर -03
लैब की एसी खराब बता नहीं की बीपी की जांच
सादाबाद की मथुरा रोड निवासी एक महिला अनीता यहां अपनी ब्लड शुगर की जांच कराने के लिए आई। अस्पताल में उन्होंने पर्चा भी बनवा लिया और लैब में भी भेज दिया लेकिन घंटों इंतजार के बाद वहां यह कह दिया गया कि अब यहां एसी खराब हो गया और इसके चलते आज ब्लड शुगर की जांच नहीं हो सकती। ऐसे में वह निराश होकर वापस लौट आई। कई और मरीज भी इसी तरह से वापस लौट आए। हालांकि कुछ मरीजों के नमूने ले लिए गए।
- जिला अस्पताल में 28 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन इनके सापेक्ष केवल 10 की तैनाती है। इसमें भी कुछ चिकित्सकों की इमरजेंसी कक्ष, पोस्टमार्टम में ड्यूटी रहती हैं। अल्ट्रासाउंड कक्ष में तैनात चिकित्सक इमरजेंसी ड्यूटी के चलते आज मौजूद नहीं थे। लैब का एसी खराब हो गया था। इसकी वजह से वहां कुछ समय के लिए काम प्रभावित हुआ होगा। एसी ठीक करा लिया जाएगा। - डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस, बागला जिला अस्पताल।